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अमेठी की तरह रायबरेली नहीं गंवाना चाहती कांग्रेस, राहुल को जिताने के लिए कर रही टू प्वाइंट स्ट्रेटजी पर काम

Raebareli Lok Sabha Chunav: राहुल गांधी पहली बार रायबरेली लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस अपना अभियान नेहरू-गांधी परिवार के इस गढ़ से 100 साल पुराने संबंधों के आधार पर बना रही है।
Written by: न्यूज डेस्क
Updated: May 10, 2024 07:37 IST
अमेठी की तरह रायबरेली नहीं गंवाना चाहती कांग्रेस  राहुल को जिताने के लिए कर रही टू प्वाइंट स्ट्रेटजी पर काम
Raebareli Lok Sabha Chunav: कांग्रेस रायबरेली सीट पर हर वो कोशिश कर रही है, जिससे उसे सफलता मिले। (@RahulGandhi)
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Raebareli Lok Sabha Chunav: रायबरेली हमेशा से गांधी परिवार का गढ़ रहा है। लेकिन इस बार सोनिया गांधी रायबरेली से चुनाव नहीं लड़ रही हैं, बल्कि उनके पुत्र और कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी रायबरेली से मैदान में हैं। राहुल के रायबरेली लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने से राजनीतिक हल्कों में सभी की नजर रायबरेली और राहुल पर आ टिकी है। ऐसे में कांग्रेस हाईकमान अमेठी की तरह रायबरेली से कोई भी वो गलती नहीं करना चाहती है, जिसके चलते साल 2019 में उसे अमेठी सीट गंवानी पड़ी थी। ऐसे में राहुल गांधी को जिताने के लिए के कांग्रेस पार्टी कई रणनीतियों पर काम कर रही है।

चूंकि राहुल गांधी पहली बार रायबरेली लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस अपना अभियान नेहरू-गांधी परिवार के इस गढ़ से 100 साल पुराने संबंधों के आधार पर बना रही है और मतदाताओं को बता रही है कि वह उनके साथ बने रहेंगे। कांग्रेस, बीजेपी के उन आरोपों का जवाब देने की कोशिश कर रही है कि सत्ता में आने के बाद कांग्रेस प्रत्याशी अपने क्षेत्र से गायब हो जाते हैं।

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ऐसे में कांग्रेस ने दो स्तरीय रणनीति अपनाई है। जिसमें 'सेवा के 100 साल' और 'रायबरेली के राहुल'। बताया जाता है कि यह पब्लिसिटी मैटेरियल जल्द ही सोशल मीडिया के माध्यम से कांग्रे पार्टी द्वारा लॉन्च किया जाएगा।

पार्टी सूत्रों ने बताया कि इससे पहले राहुल यहां अपना अभियान शुरू करेंगे। राहुल की बहन प्रियंका गांधी वाड्रा-जो अपनी मां सोनिया की सीट पर चार बार से चुनाव प्रचार का नेतृत्व कर रही हैं, अपनी उपस्थिति के दौरान रणनीति के लिए माहौल तैयार कर रही हैं।

पिछले दो दिनों में रायबरेली के बछरावां और रायबरेली सदर विधानसभा क्षेत्रों में 25 से अधिक नुक्कड़ सभाओं को संबोधित करने वाली प्रियंका वाड्रा ने बार-बार 7 जनवरी, 1921 के मुंशीगंज हत्याकांड का जिक्र करते हुए बताया कि नेहरू-गांधी की चार पीढ़ियां कैसे मोतीलाल नेहरू और जवाहरलाल नेहरू से लेकर परिवार तक लोगों के साथ खड़ी रही हैं।

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एक कांग्रेस नेता रायबरेली से नेहरू-गांधी कनेक्शन का जिक्र करते हुए कहा कि मोती लाल नेहरू और जवाहर लाल नेहरू के दिनों से लेकर, जो 1921 में पुलिस द्वारा किसानों की हत्या के दौरान किसानों के साथ खड़े थे, उनके लिए रायबरेली एक सदी पुराना है। यह असहयोग आंदोलन के युग के दौरान था, जब प्रदर्शनकारी किसानों को गोली मार दी गई थी और बाद में किसानों को समर्थन देने की पेशकश करते हुए जवाहर लाल नेहरू को भी गिरफ्तार कर लिया गया था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस घटना में लगभग 13 लोग मारे गए, हालांकि यह विवादित है।

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प्रियंका गांधी ने चुनाव प्रचार के दौरान इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि गलतियां हुईं, लेकिन सबक भी सीखा गया, जो रायबरेली से हार गईं, लेकिन बाद में जीत गईं। 1952 में भारत के पहले चुनाव के बाद से कांग्रेस ने 72 वर्षों में से 66 वर्षों तक रायबरेली लोकसभा सीट पर कब्जा किया है।

एक अन्य कांग्रेस नेता ने कहा, "यह अभियान इस कहानी को बयान करता है कि कैसे कांग्रेस हमेशा किसानों के साथ खड़ी रही है, न कि अमीरों के साथ क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि एक तालुकदार द्वारा प्रदर्शनकारी किसानों पर गोली चलाने के बाद ही पुलिस गोलीबारी शुरू हुई थी।"

प्रियंका गांधी ने चुनाव अभियान के दौरान रायबरेली की जनता से गांधी और नेहरू परिवार के रिश्ते का जिक्र किया। प्रियंका ने कहा कि हमने आपकी पुकार सुनी और आ गए। मोतीलाल और जवाहरलाल भी आए थे। देखा था क्या हुआ था। चार पीढ़ियों के बाद हम भी हम आपसे जुड़े हुए हैं।

मुंशीगंज के शहीद स्मारक जो हत्याओं का प्रतीक है। पार्टी इस घटना का इस्तेमाल यह बताने के लिए भी कर रही है कि कैसे पासी समुदाय का एक किसान नेता अंग्रेजों के खिलाफ खड़ा हुआ था।

बछरावां में प्रियंका की एक नुक्कड़ बैठक से कुछ मीटर की दूरी पर, भाजपा उम्मीदवार दिनेश प्रताप सिंह और पार्टी नेता सुरेश चंद तिवारी ने कार्यकर्ताओं को बताया कि कैसे गांधी परिवार ने रायबरेली को "छोड़ दिया" और चुनाव के बाद "फिर से छोड़ देंगे"। तिवारी ने कहा, "यह स्थानीय नेता सिंह हैं, जो आपके अच्छे और बुरे दिनों में आपके साथ रहेंगे।"

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