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दरखास्त लगाओ, मैं देखूंगा, CJI चंद्रचूड़ ने मुस्लिम पक्ष को किया आश्वस्त, ज्ञानवापी में वजू की अनुमति के लिए गए थे सुप्रीम कोर्ट

ज्ञानवापी में वजू एरिया फिलहाल विवादों में घिरा है, क्योंकि हिंदू पक्ष दावा कर रहा है कि शिवलिंग इसी जगह पर मिला है।
Written by: shailendragautam
Updated: April 07, 2023 11:18 IST
दरखास्त लगाओ  मैं देखूंगा  cji चंद्रचूड़ ने मुस्लिम पक्ष को किया आश्वस्त  ज्ञानवापी में वजू की अनुमति के लिए गए थे सुप्रीम कोर्ट
ज्ञानवापी मस्जिद। एक्सप्रेस फोटो।
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ज्ञानवापी मस्जिद के भीतर वजू की अनुमति हासिल करने के लिए मुस्लिम पक्ष ने सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ के सामने गुहार लगाई। सीजेआई ने उनको कहा कि आप Interlocutory Application दाखिल करो। मैं खुद इस केस को देखूंगा। मामले की सुनवाई 14 अप्रैल को की जाएगी।

सीनियर एडवोकेट हुजेफा अहमदी ने सीजेआई से अपील की कि रमजान में मुस्लिम पक्ष को ज्ञानवापी के भीतर जाकर वजू करने की अनुमति दी जाए। रमजान हमारे लिए पवित्र महीना होता है। मुस्लिमों की अपील को संजीदगी से सुप्रीम कोर्ट देखे। खास बात है कि ज्ञानवापी में वजू एरिया फिलहाल विवादों में घिरा है, क्योंकि हिंदू पक्ष दावा कर रहा है कि शिवलिंग इसी जगह पर मिला है।

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ज्ञानवापी में वजू हो या नहीं, सुप्रीम कोर्ट 14 अप्रैल को करेगा फैसला

दोनों पक्षों की तरफ से बनारस की कोर्ट के साथ इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कई केस दायर किए जा चुके हैं। सीजेआई ने अहमदी से कहा कि पहले से चल रहे किसी केस में आप दरखास्त ( Interlocutory Application) लगाओ। मैं इस मामले को खुद देखने जा रहा हूं।

सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने मामले को सुनवाई के लिए 14 अप्रैल को लिस्ट किया है।

ज्ञानवापी में शिवलिंग मिलने का मामला फिलहाल काफी सुर्खियों में है। हिंदू पक्ष का दावा है कि ये परिसर हिंदू मंदिर था। मुस्लिमों ने इसे तोड़कर मस्जिद में तब्दील किया। जबकि मुस्लिम पक्ष इसे गलत बताता है। उनका कहना है कि जिस चीज को हिंदू पक्ष शिवलिंग मान रहा है वो दरअसल एक फव्वारा है।

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मुस्लिम पक्ष ने शिवलिंग की जांच कराने के लिए बनारस की कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। लेकिन कोर्ट ने इनकार कर दिया। लोकल कोर्ट का मानना था कि कार्बन डेटिंग का इस्तेमाल किया गया तो शिवलिंग को क्षति पहुंच सकती है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ASI के निदेशक से पूछा शिवलिंग की सही उम्र पता करने का तरीका

डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देकर कहा कि शीर्ष अदालत ने खुद भी कहा है कि शिवलिंग को पूरी तरह से संरक्षित किया जाए। उसके बाद मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा तो बेंच ने ASI की डायरेक्टर व विद्यावती से जवाब मांगा कि वो बताएं कि क्या कार्बन डेटिंग के जरिये शिवलिंग की सही उम्र पता लगाई जा सकती है। हाईकोर्ट का सवाल था कि इससे शिवलिंग को कोई नुकसान तो नहीं पहुंचेगा। इस मामले में डायरेक्टर ने जवाब दाखिल नहीं किया तो हाईकोर्ट के तेवर काफी तीखे हुए थे। उनको जवाब दाखिल करने के लिए आखिरी मौका दिया गया है।

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