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बेटी की शादी के लिए शॉपिंग की, सब बह गया; मोमोज बेचता था, कोई मदद करने नहीं आया, दिल्ली के राहत शिवरों से लोगों की आपबीती

चिंता की बात यह भी है कि एक बाढ़ की वजह से कई लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ गया है, यानी की वे राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने कुछ ऐसे ही राहत शिविरों को चिन्हित किया है और वहां की असलियत जानने की कोशिश की
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: Sudhanshu Maheshwari
Updated: July 17, 2023 00:27 IST
बेटी की शादी के लिए शॉपिंग की  सब बह गया  मोमोज बेचता था  कोई मदद करने नहीं आया  दिल्ली के राहत शिवरों से लोगों की आपबीती
दिल्ली की जमीनी हकीकत
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Gayathri Mani 

दिल्ली बाढ़ की वजह से जमीन पर स्थिति विस्फोटक बनी हुई है। हजारों लोग प्रभावित हैं और जीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है। चिंता की बात यह भी है कि एक बाढ़ की वजह से कई लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ गया है, यानी की वे राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने कुछ ऐसे ही राहत शिविरों को चिन्हित किया है और वहां की असलियत जानने की कोशिश की-

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दिल्ली के खजूरी खास में एक राहत शिविर बनाया गया है जहां पर इस समय 150 लोग रह रहे हैं। इसमें रिक्शेवाले, मजदूर शामिल हैं। लोगों का कहना है कि उन्हें यहां पर तीन वक्त का खाना तो मिल रहा है, लेकिन लाइट नहीं है, पंखा नहीं है और जमीन पर बिछाने के लिए कोई गद्दा भी नहीं दिया गया है। दिल्ली के एक सरकारी स्कूल में सिक्योरिटी गार्ड के रूप में कार्यरत महिला बताती हैं कि खाना तो तीनों टाइम अच्छा मिल रहा है, पर सोने के लिए कुछ साधन नहीं है। यहां पर बहुत गर्मी है, हम अमीर तो नहीं हैं, लेकिन हमारे घर में बिजली, फ्रिज और एक गैस सिलेंडर जरूर था। लेकिन अब हम यहां पर बीच सड़क पर रहने को मजबूर हैं। बच्चे लगातार भागते रहते हैं, हमें देर रात डर लगता है कि कहीं किसी गाड़ी से उनका एक्सीडेंट ना हो जाए।

इसी कड़ी में एक और पीड़ित राजकुमार बताते हैं कि उनकी एक किराना की दुकान थी जो बाढ़ में डूब चुकी है। उनकी सारी सेविंग उस बाढ़ में बह गई है। वे जोर देकर कहते हैं कि अगर सरकार पहले कुछ इंतजाम कर देती, यह जानकारी दे देती तो कई चीजों को बचाया जा सकता था। लेकिन क्योंकि ऐसा नहीं हुआ इस वजह से उनको पूरे तीन लाख का नुकसान हुआ है।

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अब यह किसी एक शख्स का दर्द नहीं है, जितने लोगों से बात की गई सभी परेशान हैं, सभी किसी न किसी समस्या से जूझ रहे हैं। इसी कड़ी में 28 वर्षीय प्रदीप बताते हैं कि वे मोमोज बेचते हैं, लेकिन मुश्किल समय में कोई भी उनकी मदद करने नहीं आया। जैसी ही पानी का लेवल बढ़ा, वे खुद अपना घर छोड़कर चले गए। वे बताते हैं कि इस समय उनके पास कोई भी काम नहीं है। उन्हें इस बात की खुशी है कि सरकार द्वारा खाने का इंतजाम कर दिया गया है लेकिन क्योंकि उनकी सेविंग उस बाढ़ में बह चुकी है, ऐसे में वे सरकार से आर्थिक सहायता की उम्मीद लगा रहे हैं।

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अब ऐसा नहीं है कि बाढ़ में सिर्फ रिक्शेवाले या फिर मजदूर परेशान हुए हैं। जो स्कूली बच्चे हैं, उनकी पढ़ाई रुक चुकी है। 11वीं क्लास की हीना बताती है कि उसने अपनी मां से कहकर कोरोना काल में एक फोन खरीदा था। उसी फोन पर वो ऑनलाइन क्लास अटेंड करती थी। लेकिन बाढ़ ने वो फोन भी उस लड़की से छीन लिया है। वो बताती है कि अब ऑनलाइन क्लास भी अटेंड नहीं कर पा रही है। अब वो हर कीमत पर अपने घर वापस जाना चाहती है।

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