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CJI की टीम ने माना था फिट, नहीं मानी सरकार, परमानेंट चीफ जस्टिस बनने की हसरत लिए जस्टिस सबीना को होना पड़ा रुखसत

रिटायर होने तक जस्टिस सबीना ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के एक्टिंग (कार्यवाहक) चीफ जस्टिस के तौर पर काम किया। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाले कॉलेजियम ने जस्टिस सबीना को हिमाचल प्रदेश का चीफ जस्टिस बनाने के लिए कॉलेजियम की सारी कसरत बेकार साबित हुई।
Written by: shailendragautam
Updated: April 24, 2023 10:57 IST
cji की टीम ने माना था फिट  नहीं मानी सरकार  परमानेंट चीफ जस्टिस बनने की हसरत लिए जस्टिस सबीना को होना पड़ा रुखसत
CJI डीवाई चंद्रचूड़ (बाएं) की अध्यक्षता वाली Supreme Court Collegium और केंद्र सरकार के बीच तकरार की स्थिति बनी है। एक्सप्रेस फाइल फोटो
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कॉलेजियम और सरकार के बीच की तनातनी में कुछ ऐसे जजों को नुकसान उठाना पड़ा है जो प्रमोशन के सही हकदार थे। हिमाचल प्रदेश का हाईकोर्ट इसका सबसे जीता जागता उदाहरण है। कॉलेजियम ने जस्टिस सबीना को चीफ जस्टिस बनने का सही हकदार मानकर सरकार को सिफारिश भेजी। लेकिन सरकार ने सिफारिश को ठंडे बस्ते में डाल दिया। 19 अप्रैल को जब वो रिटायर हुईं तब भी सिफारिश पेंडिंग थी।

रिटायर होने तक हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की कार्यवाहक चीफ जस्टिस रहीं

रिटायर होने तक जस्टिस सबीना ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के एक्टिंग (कार्यवाहक) चीफ जस्टिस के तौर पर काम किया। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाले कॉलेजियम ने जस्टिस सबीना को हिमाचल प्रदेश का चीफ जस्टिस बनाने के लिए कॉलेजियम की सारी कसरत बेकार साबित हुई। कॉलेजियम की निगाहों में वो सबसे सीनियर जस्टिस थीं। लिहाजा चीफ जस्टिस के पद पर सबसे ज्यादा हक उनका ही बनता था। लेकिन सरकार को कॉलेजियम का फैसला सटीक नहीं लगा। सरकार ने जस्टिस सबीना को परमानेंट चीफ जस्टिस बनाने में कोई रुचि दिखाई ही नहीं।

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पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट से शुरू हुआ था कैरियर, 19 अप्रैल को हुईं रिटायर

जस्टिस सबीना का कैरियर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट से शुरू हुआ था। 12 मार्च 2008 को वो इस हाईकोर्ट की एडिशनल जज बनीं। 2010 में उनको परमानेंट जज का दर्जा मिला। 2016 में उनको राजस्थान हाईकोर्ट में भेज दिया गया। वहां उन्होंने पांच सालों तक काम किया। 2021 में वो हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में ट्रांसफर की गईं। जब चीफ जस्टिस की पोस्ट खाली हुई तब जस्टिस सबीना सीनियर मोस्ट थीं।

हाल के समय में पांच और जस्टिस भी सरकार की बेरुखी का बने शिकार

हालांकि जस्टिस सबीना अकेला उदाहरण नहीं हैं जो सरकार और कॉलेजियम के बीच की रस्साकसी का शिकार बनीं। उनके अलावा जस्टिस एस मुरलीधर, जस्टिस अकील कुरैशी, जस्टिस टी राजा, जस्टिस के विनोद चंद्रन ऐसे नाम रहे जिनके नाम को सरकार ने मंजूर नहीं किया। जस्टिस के विनोद चंद्रन को पटना हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की बात सरकार ने मार्च 2023 में मानी। आज उनका रिटायरमेंट है।

ओडिशा के चीफ जस्टिस मुरलीधर को लेकर की गई सिफारिश लेनी पड़ गई वापस

जस्टिस एस मुरलीधर को जोर लगाकर भी कॉलेजियम मद्रास हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नहीं बनवा सका। वो ओडिशा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस हैं। कॉलेजियम ने अब अपनी उस सिफारिश को ही वापस ले लिया है जिसमें उनको मद्रास हाईकोर्ट भेजने को कहा गया था।

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