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रायबरेली: कांग्रेस के अभेद्य किले में भाजपा लगा रही जोर

कांग्रेस के वर्चस्व का अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि वह आजादी के बाद से केवल तीन बार - 1977, 1996 और 1998 में रायबरेली हारी है। सोनिया गांधी ने 2004 से लगातार चार बार इस निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और अब उन्होंने अपने बेटे राहुल गांधी को कमान सौंप दी है।
Written by: जनसत्ता | Edited By: Bishwa Nath Jha
नई दिल्ली | Updated: May 19, 2024 10:57 IST
रायबरेली  कांग्रेस के अभेद्य किले में भाजपा लगा रही जोर
प्रतीकात्मक तस्वीर। फोटो -(इंडियन एक्सप्रेस)।
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चर्चा में रहने वाले रायबरेली लोकसभा क्षेत्र में हो रही हर राजनीतिक चर्चा गांधी नाम के जिक्र के बिना अधूरी है। राम मंदिर, मोदी का नाम, सरकार की मुफ्त राशन योजना, गरीबों के लिए पक्के मकान, आवारा पशु और भाजपा के सत्ता में आने पर संविधान बदलने के कांग्रेस के आरोप चुनाव में चर्चा का विषय हैं। लेकिन गांधी परिवार इने सब पर हावी है।

कांग्रेस के वर्चस्व का अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि वह आजादी के बाद से केवल तीन बार - 1977, 1996 और 1998 में रायबरेली हारी है। सोनिया गांधी ने 2004 से लगातार चार बार इस निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और अब उन्होंने अपने बेटे राहुल गांधी को कमान सौंप दी है।

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गांधी परिवार का गढ़ रहे पड़ोसी लोकसभा क्षेत्र अमेठी में पिछले चुनाव में भाजपा की नेता स्मृति ईरानी से हार का सामना करने वाले कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी का मुकाबला भाजपा के दिनेश प्रताप सिंह से है। रिक्शा चालक सोनू पांडे ने कहा, ‘यहां तो पंजा चलता है, ये गांधी परिवार का गढ़ है। कोई भी उम्मीदवार हो, गांधी परिवार ही जीतेगा। यहां सिर्फ मतों के अंतर की बात है।’

खिलौनों की दुकान के मालिक रवींद्र सिंह का भी ऐसा ही मानना है। उनके विचार से राहुल गांधी यहां से जीत जाएंगे क्योंकि गांधी परिवार के साथ रिश्ता अन्य चीजों से ऊपर है। उन्होंने कहा कि पिछली बार देश में अलग तरह की भावना थी और फिर भी सोनिया गांधी जी 1,67,000 से अधिक मतों से जीती थीं। इसलिए इस बार राहुल के लिए कोई परेशानी नहीं है। दिलचस्पी केवल मतों के अंतर को लेकर है।

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रायबरेली में जारी चुनावी जंग का दूसरा पहलू भी है। भाजपा समर्थकों का कहना है कि राम मंदिर के निर्माण से पार्टी को फायदा हो सकता है, लेकिन वे अपनी चुनौतियों से भी अवगत हैं और मानते हैं कि यह दिनेश सिंह के लिए एक कठिन चुनावी मुकाबला है, जो 2019 के लोकसभा चुनावों में सोनिया गांधी से हार गए थे। रायबरेली शहर के एक टैक्सी चालक आलोक सिंह ने कहा कि वह भाजपा को वोट देंगे।

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उन्होंने कहा कि सदियों के इंतजार के बाद आखिरकार मोदी सरकार में राम मंदिर बना। हालांकि, वह यह भी मानते हैं कि यहां से भाजपा की जीत मुश्किल नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि मैं भाजपा समर्थक और मतदाता हूं क्योंकि मुझे लगता है कि गांधी परिवार ने यहां लंबे समय तक शासन किया है और जो विकास होना चाहिए था, वह नहीं हुआ है, हालांकि मैं किसी भ्रम में नहीं रहना चाहता… 99 फीसद राहुल जीतेंगे।

राहुल को अमेठी के बजाय रायबरेली से उम्मीदवार बनाए जाने पर कई लोगों का मानना है कि उन्हें यहां से इसलिए प्रत्याशी बनाया गया क्योंकि यह अपेक्षाकृत सुरक्षित सीट है। गांधी परिवार के प्रति जुड़ाव यहां हर जगह देखने को मिलता है। कांग्रेस ने यहां के लिए ‘रायबरेली के राहुल’ नारा दिया है और पार्टी पीढ़ियों से चले आ रहे भावनात्मक जुड़ाव पर जोर देती रही है। सोनिया गांधी ने एक रैली को संबोधित कर भावनात्मक अपील की। उन्होंने कहा कि मैं अपने बेटे (राहुल गांधी) को आपको सौंप रही हूं। उन्हें इसी तरह अपना मानें, जैसा आपने मुझे माना। राहुल आपको कभी निराश नहीं करेंगे।

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