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Jansatta Editorial: लोकतंत्र के लिए... अब नतीजों का इंतजार

Lok Sabha Elections Result 2024: यह ध्यान रखने की जरूरत है कि चुनाव में सत्तापक्ष और विपक्ष की ओर से जितनी कड़वी बातें बोली जाती हैं, वे सब नतीजों से धुल जाती हैं। जनता अपने विवेक के साथ उनमें से किसी को सत्ता इसलिए सौंपती है कि उसका भविष्य बेहतर हो।
Written by: जनसत्ता
नई दिल्ली | June 03, 2024 08:04 IST
jansatta editorial  लोकतंत्र के लिए    अब नतीजों का इंतजार
मौसम और कुछ अन्य वजहों से बड़े पैमाने पर लोग मतदान केंद्रों पर नहीं पहुंचे। इसके बावजूद मतदान के संतोषजनक आंकड़ों से यही पता चलता है कि लोगों ने नई सरकार का चुनाव करने के लिए यथासंभव योगदान दिया। (PTI Image)
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लोकसभा के लिए सात चरणों में हुए मतदान लगभग सहज तरीके से संपन्न हो गए। इस तरह लोकतंत्र के पर्व का यह आयोजन पूरा हुआ और इसके साथ ही सभी उम्मीदवारों की किस्मत मतों की गिनती तक चुनाव आयोग के संरक्षण में रहेगी। अब जाहिर है, इसके बाद समूचे देश को इसके नतीजों का इंतजार होगा, जिसकी घोषणा चार जून को होगी। हालांकि चुनाव में राजनीतिक दलों के बीच जिस स्तर की खींचतान रही, उत्तेजना का माहौल रहा, उसमें उम्मीद यही थी कि इस बार मतदान का फीसद शायद ऊंचा रहे, लेकिन मौसम और कुछ अन्य वजहों से बड़े पैमाने पर लोग मतदान केंद्रों पर नहीं पहुंचे।

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इसके बावजूद मतदान के संतोषजनक आंकड़ों से यही पता चलता है कि लोगों ने नई सरकार का चुनाव करने के लिए यथासंभव योगदान दिया। कमोबेश शांति से गुजर गए मतदान के बाद अब यह परिणाम पर निर्भर रहेगा कि आने वाले वक्त में देश की बागडोर किसके हाथ में होगी और आगे की दिशा क्या होगी।

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गौरतलब है कि इस चुनाव में राजनीतिक दलों के मुख्य रूप से दो ध्रुव बन गए। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन और इसमें शामिल दलों का नेतृत्व जहां भाजपा कर रही है, वहीं विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ और उसमें शामिल दलों का नेतृत्व कांग्रेस कर रही है। राजग की कमान थामे भाजपा चूंकि बीते दो कार्यकाल से सत्ता में रही, तो माना जा रहा था कि इस चुनाव में उसके शासन को लेकर अगर कोई असंतोष होगा तो वह मतदान में फूटेगा।

अगर ऐसा होता है तो इसका स्वाभाविक लाभ विपक्षी गठबंधन को मिलेगा और वह सरकार बनाएगी। मगर चुनाव का अध्ययन करने वाले समूहों ने जिस तरह भाजपा के मैदान में कायम होने की उम्मीद जाहिर की, उससे यही लगता है कि लड़ाई फिलहाल कांटे की है और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले तमाम लोग अब बस इंतजार करेंगे कि देश की बागडोर किसके हाथों में जाएगी।

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यह ध्यान रखने की जरूरत है कि चुनाव में सत्तापक्ष और विपक्ष की ओर से जितनी कड़वी बातें बोली जाती हैं, वे सब नतीजों से धुल जाती हैं। जनता अपने विवेक के साथ उनमें से किसी को सत्ता इसलिए सौंपती है कि उसका भविष्य बेहतर हो।

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