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बंगाल में कांग्रेस हुई निल बट्टे सन्नाटा! इकलौते विधायक ने भी थाम लिया TMC का दामन

कुछ महीने पहले ही सागरदिघी में हुए उपचुनाव में कांग्रेस विधायक बायरन बिस्वास ने बड़ी जीत दर्ज की थी। तब उन्होंने टीएमसी उम्मीदवार को 22 हजार के बड़े अंतर से हरा दिया था।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: Sudhanshu Maheshwari
Updated: May 29, 2023 19:38 IST
बंगाल में कांग्रेस हुई निल बट्टे सन्नाटा  इकलौते विधायक ने भी थाम लिया tmc का दामन
Bayron Biswas ने टीएमसी ज्वाइन की
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पश्चिम बंगाल में कांग्रेस को बड़ा और शर्मनाक झटका लगा है। उसका आंकड़ा विधानसभा में शून्य पर पहुंच गया है। इकलौते विधायक ने भी टीएमसी का दामन थाम बड़ा उलटफेर कर दिया है। कुछ महीने पहले ही सागरदिघी में हुए उपचुनाव में कांग्रेस विधायक बायरन बिस्वास ने बड़ी जीत दर्ज की थी। तब उन्होंने टीएमसी उम्मीदवार को 22 हजार के बड़े अंतर से हरा दिया था।

बंगाल में कांग्रेस हुई शून्य

उस एक जीत की वजह से कांग्रेस का पश्चिम बंगाल विधानसभा में खाता खुला था। लेकिन अब उसी विधायक ने टीएमसी ज्वाइन कर कांग्रेस को राज्य में फिर निल बट्टे सन्नाटा कर दिया है यानी कि शून्य। टीएमसी ने एक ट्वीट कर लिखा कि टीएमसी का परिवार अब और बढ़ा हो गया है। अभिषेक बनर्जी की उपस्थिति में कांग्रेस विधायक बायरन बिस्वास ने हमारे साथ आने का फैसला किया। अब साथ मिलकर बीजेपी की बांटने वाली राजनीति के खिलाफ लड़ा जाएगा।

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कांग्रेस ने गंवाया बड़ा अवसर

इस बड़े झटके पर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा है कि बिस्वास ने सागरदिघी की जनता के साथ धोखा किया है। टीएमसी ने गलत तरीकों से बिस्वास को अपने पाले में किया। अगली बार भविष्य में और भरोसेमंद प्रत्याशी को उतारा जाएगा। अब कांग्रेस भविष्य में क्या कदम उठाएगी, वो अलग विषय है, लेकिन किसी राज्य में शून्य पर पहुंच जाना बड़ा सियासी झटका है। कांग्रेस के लिए ये दर्द ज्यादा बड़ा इसलिए है क्योंकि उसने सागरदिघी में जीत दर्ज कर खुद को बंगाल में फिर जिंदा करने का काम किया था। राजनीतिक जानकार भी उसे देश की सबसे पुरानी पार्टी के लिए बूस्टर मान रहे थे।

विपक्षी एकता के लिए झटका?

वैसे इस एक झटके को दूसरे नजरिए से भी देखा जा रहा है। कांग्रेस विधायक का टीएमसी में जाने का मतलब है कि कांग्रेस से फिर तकरार। इस समय 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर विपक्षी एकता की बात चल रही है, नीतीश कुमार ने तो सियासी पर्यटन कर सभी साथ लाने का काम भी कर दिया है। उस स्थिति में इस प्रकार की राजनीतिक गतिविधियां विपक्षी पार्टियों में ही फूट डालने का काम कर सकती हैं।

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