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हाथरस हादसे में पुलिस की FIR में क्या-क्या? जानिए क्या कहती हैं धाराएं

Hathras Stampede: हाथरस पुलिस की एफआईआर में सेवादार और आयोजक का तो नाम है, लेकिन बाबा का नाम शामिल नहीं है।
Written by: न्यूज डेस्क
Updated: July 03, 2024 13:31 IST
हाथरस हादसे में पुलिस की fir में क्या क्या  जानिए क्या कहती हैं धाराएं
Hathras Stampede: हाथरस हादसे में जानिए पुलिस की FIR में क्या है? (PTI)
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Hathras Stampede: उत्तर प्रदेश के हाथरस में नारायण साकार हरि उर्फ भोले बाबा के सत्संग में भगदड़ से मरने वालों की संख्या 121 पहुंच चुकी है। जबकि 28 लोग घायल बताए जा रहे हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पुलिस ने जो एफआईआर दर्ज की है। उसमें बाबा का नाम शामिल नहीं है।

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एक वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई-भाषा को बताया कि मंगलवार देर रात सिकंदराराऊ पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी में 'मुख्य सेवादार' देवप्रकाश मधुकर और अन्य आयोजकों के नाम शामिल हैं। अधिकारी ने बताया कि एफआईआर भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 (गैर इरादतन हत्या), 110, 126 (2) (जबरन बंधक बनाना), 223, 238 (अपराध सबूतों और साक्ष्य को मिटाना) के तहत दर्ज की गई है। हालांकि, भगदड़ का कारण बने 'सत्संग' के पीछे के व्यक्ति भोले बाबा का नाम अभी तक एफआईआर में नहीं है।

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हाथरस पुलिस की FIR में क्या?

हाथरस पुलिस ने जो FIR दर्ज की है, उसमें मुख्य सेवादार देव प्रकाश मधुकर, अन्य आयोजक और अन्य अज्ञात सेवादारों को आरोपी बनाया है।साकार हरि उर्फ भोले बाबा का नाम आरोपियों में नहीं है, जो आरोपी बनाए गए हैं, उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 (गैर इरादतन हत्या) 110 126 (2) (जबरन बंधक बनाना) दो 223 और 238 (अपराध के सबूतों को मिटाना और गलत जानकारी देना) लगाई गई है।

पुलिस की एफआईआर में कहा गया है कि आयोजकों ने 80000 श्रद्धालुओं की परमिशन मांगी थी। उन्होंने इस तथ्य को छिपाया कि वास्तविक श्रद्धालुओं की संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। कार्यक्रम में करीब 2.5 लाख लोगों की भीड़ जुट गई। जीटी रोड पर ट्रैफिक ब्लॉक हो गया। सत्संग के बाद करीब 2 बजे जब भोले बाबा जाने लगे तो भीड़ उनकी कार के पीछे धूल लेने के लिए भागी और इसके बाद भगदड़ मच गई।

एक वरिष्ठ अधिवक्ता के मुताबिक, पुलिस की FIR में धारा 105 और 110 लगाई गई है। पहले आईपीसी में 105 की जगह 304 (गैर इरादतन हत्या) की धारा थी। धारा 105 में कहा गया है कि ‘हत्या का इरादा यानी इंटेंशन’ होना चाहिए, पर हाथरस के मामले में हत्या का इरादा नजर नहीं आता। इसलिये यह धारा लागू नहीं होगी। पहली नजर में किसी को न तो मारने का न इंटेशन नजर आता है और न ही नॉलेज है।

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इसी तरह, 126 (2) जबरन बंधक बनाने से जुड़ी धारा लगाई गई है। IPC में यह धारा 339 हुआ करती थी। 126 (2) में सिर्फ एक महीने की सजा का प्रावधान है। इसी तरह, 223 सरकारी कर्मचारी द्वारा दिये गए आदेश की अवहेलना करने से जुड़ा है। इसमें 6 महीने या एक साल तक की सजा हो सकती है। धारा 238 साक्ष्य को मिटाने से संबंधित है। इस धारा में 238 (बी) या (सी) के तहत अधिकतम 3 साल तक की सजा हो सकती है।

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