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EXCLUSIVE INTERVIEW: योगी के इस मंत्री ने नहीं ली सिक्योरिटी, बताया क्यों पुलिस से पॉलिटिक्स में की एंट्री?

UP Politics: योगी सरकार के मंत्री असीम अरुण ने कहा कि दो-एक सीटों में फाइट की बात है तो मुझे लगता है कि मैनपुरी और आजमगढ़ में फाइट होने की संभावना है।
Written by: vivek awasthi
Updated: April 24, 2024 21:31 IST
exclusive interview  योगी के इस मंत्री ने नहीं ली सिक्योरिटी  बताया क्यों पुलिस से पॉलिटिक्स में की एंट्री
Lok Sabha Elections: योगी सरकार में मंत्री असीम अरुण राजनीति में आने से पहले कानपुर के पुलिस कमिश्नर थे। (जनसत्ता.कॉम)
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Lok Sabha Elections: लोकसभा चुनाव के बीच उत्तर प्रदेश सरकार में समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने जनसत्ता.कॉम से कई मुद्दों को लेकर खास बातचीत की। योगी सरकार के मंत्री ने लोकसभा चुनाव से लेकर अतीक अहमद की हत्या, मुख्तार अंसारी की मौत समेत तमाम सवालों के बेबाकी से जवाब दिए। आइए जानते हैं योगी सरकार में मंत्री असीम अरुण से बातचीत के प्रमुख अंश-

इस वक्त चुनावी माहौल कैसा चल रहा है?

इस सवाल के जवाब में असीम अरुण कहते हैं कि चुनावी माहौल काफी जोरदार और गर्म चल रहा है, लेकिन भाजपा के लिए बहुत मीठा भी चल रहा है। पहले आठ लोकसभा सीटों पर हुआ। उन सभी जगहों पर मुझे जाने का मौका मिला है। नए लोग और नए वोट बीजेपी के साथ काफी जुड़ा है। दूसरी तरफ विरोधी पार्टियां बिल्कुल अलग-थलग पड़ी हैं। जनता का समर्थन बीजेपी-मोदी जी के पक्ष में है। अनुसूचित जाति का काफी वोट बीजेपी के साथ जुड़ा है। जिसका सबसे बड़ा कारण है मोदी जी के नेतृत्व में देश का विकास।

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यूपी में बीजेपी और देश एनडीए को कितनी सीटें मिलेंगी?

बीजेपी प्रदेश में 80 में से 80 सीटों के टॉरगेट को लेकर चल रही है। यह टॉरगेट आसान नहीं है, लेकिन असंभव भी नहीं है। हम लोग उसी पर काम कर रहे हैं। मुझे लगता है कि 80 में से 80 सीट प्रदेश में एनडीए के खाते में आएंगी, लेकिन दो एक-सीटों पर फाइट टाइट होगी और यह होना भी चाहिए। मुझे पूरा भरोसा है कि 80 में से 80 सीटें एनडीए को मिलेंगी और इन 80 सीटों पर राष्ट्रीय स्तर पर 400 में योगदान होगा। इस तरह से एनडीए 400 सीटें जीतेगी।

आपने कहा कि दो-एक सीटों पर फाइट होगी, आपकी निगाह में वो ऐसी कौन से सीटें हैं?

योगी सरकार के मंत्री असीम अरुण ने कहा कि दो-एक सीटों में फाइट की बात है तो मुझे लगता है कि मैनपुरी और आजमगढ़ में फाइट होने की संभावना है। असीम अरुण ने कहा कि उपचुनाव की बात अलग थी, क्योंकि उस वक्त मुलायम सिंह जी का निधन हुआ था। जिसकी वजह से जनता की सहानुभूति उनके साथ थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है। मैनपुरी में जनता के मुद्दों को कभी संसद में नहीं उठाया गया। सपा ने जो वोट बैंक की राजनीति करने की कोशिश की है, जनता ने आज उसको भी नकार दिया है। आज हर जाति क्या मुस्लिम, क्या यादव सभी लोग भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़ रहा है।

मुलायम सिंह यादव के समय की समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव की अब की समाजवादी पार्टी में क्या अंतर देखते हैं?

मुलायम सिंह जी का मैं बहुत सम्मान करता हूं। उनकी नीतियों का मैं विरोध जरूर करता था। मुलायम सिंह का इसलिए सम्मान करता हूं कि वो धरती पुत्र, किसान पुत्र और जमीन से जुड़े हुए थे। वो इन सभी बातों को समझते थे। वो भीड़ से नाम पुकार कर लोगों को बुला लेते थे और उनको सम्मानित करते थे, लेकिन अखिलेश यादव जमीन से जुड़े हुए नेता नहीं हैं। वो नेता और मुख्यमंत्री इसलिए बने, क्योंकि वो मुलायम सिंह की संतान हैं। असीम अरुण ने कहा कि यह बहुत गलत बात है। लोकतंत्र की परिकल्पना बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने इसलिए नहीं की थी कि यहां कोई राजशाही होगी। योगी के मंत्री ने कहा कि अगर बाबा साहेब ने संविधान में योगदान न दिया होता तो मुलायम सिंह जैसे लोग ऊपर आ ही नहीं पाते, जो राजे-रजवाड़े थे वो ही लोकतंत्र के ऊपर कब्जा कर लेते। असीम अरुण ने कहा कि समाजवादी ने यह बहुत बड़ी गलती की है कि उन्होंने जमीन से जुड़े हुए व्यक्ति को आगे न बढ़ाकर केवल परिवारवाद को आगे बढ़ाया। जिस-जिस पार्टी ने ऐसा किया, उसके पतन का रास्ता वहीं से खुल गया। क्योंकि अखिलेश जमीन से जुड़े हुए नेता नहीं हैं। उनको जमीन की नब्ज भी नहीं पता है। दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी है। उसके पास जमीन की नब्ज है और हम सर्वे भी कराते हैं। फोन से पूछते हैं, पूरा संगठन फीडबैक देता है, उसके बाद बीजेपी में फैसले लिए जाते हैं।

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अखिलेश यादव आरोप लगाते हैं कि बीजेपी सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही है? हिंदू-मुस्लिम की कोशिश कर रही है?

असीम अरुण ने कहा कि इसका ठीख उल्टा है। क्योंकि भारतीय जनता पार्टी हर मोहल्ले, हर घर में वोट मांगने जाती है। कुछ ऐसे में आंकड़े हो सकते हैं कि जहां हम वोट मांगने गए, वहां हमें एक वोट भी नहीं मिला, लेकिन हम फिर भी वोट मांगने जाते हैं, हो सकता है कि इस चुनाव में हमको वोट न मिले, अगली बार वोट मिलेगा। योगी के मंत्री ने कहा कि वोटर बनाना एक दोस्त बनाने जैसा है, ऐसा हम समझते हैं।

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योगी के मंत्री ने कहा रही बात धुव्रीकरण की राजनीति की तो वो तो अखिलेश यादव कर रहे हैं। क्योंकि वो तो घोषणा ही कर चुके हैं कि उनको पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक (पीडीए) का ही वोट चाहिए। असीम अरुण ने पूछा क्या अखिलेश को सवर्ण वोट नहीं चाहिए। क्या आप इन्हीं जीत वर्ग की बात रखेंगे। यहा तो लोकतंत्र की परिभाषा नहीं है।

राज्य मंत्री ने कहा कि अखिलेश यादव से जब भी कोई सवाल करता है तो वो एक ही बात का जिक्र करते हैं कि मैंने हाइवे बनाया, लखनऊ में रिवर फ्रंट बनाया है, वो इस तरह के कुछ प्रोजेक्ट बताते हैं। असीम अरुण ने कहा कि हाइवे में किसकी जमीन ली गई, जो साइकिल पर चलता है उसकी और उस हाइवे पर जर्मनी से तीन करोड़ की गाड़ी में दौड़ता है, वो कहता है कि हां, हाइवे बहुत अच्छा है। असीम अरुण ने पूछा कि अखिलेश यादव को किसकी चिंता थी, उसकी जिसकी जमीन ली या फिर उसकी जो तीन करोड़ की गाड़ी में दौड़ रहा।

योगी के मंत्री ने कहा कि इसके विपरीत भाजपा ने हाइवे, एयरपोर्ट सब बनाए, लेकिन वो प्रोजेक्ट हमारे नंबर दो पर हैं। हमारा पहला प्रोजेक्ट है कि हमने चार करोड़ परिवारों को प्रधानमंत्री आवास दिए। हमने मेडिकल की चिंता की, 36 करोड़ परिवारों को हमने आयुष्मान कार्ड दिया। इसको असल में विकास कहते हैं।

असीम अरुण ने कहा कि रिवर फ्रंट बन जाता तो खूबसूरत होता, लेकिन वो भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया, लेकिन क्या वो पीडीए के लिए बना रहे थे। अरुण ने कहा कि सही मायने में पीडीए का विकास तो मोदी जी ने किया, फिर भी मैं पीडीए शब्द का इस्तेमाल करना ही नहीं चाहूंगा, क्योंकि मोदी जी ने कहा कि किसान, गरीब, महिलाओं को लाभ देने वाली केवल भारतीय जनता पार्टी है।

मंत्री ने कहा कि आजादी के इतने साल बाद प्रधानमंत्री मोदी ने शौचालय को लेकर चिंता की है। उन्होंने सोचा की हमारी बहनें शौच के लिए कहां जाएंगी। उन्होंने कहा कि एक वक्त ऐसा था कि हमारी बहनें संध्याकाल के वक्त शौच के लिए जाती थीं और गाड़ियां की हेडलाइट पड़ने पर खड़ी हो जाती थीं। इससे बड़ी शर्मिंदगी की बात क्या है। योगी के मंत्री ने पूछा कि क्या इसको बदलना इतना मुश्किल था। लेकिन मोदी जी ने संकल्प लिया और हर परिवार को शौचालय दिया। अब किसी बहन को खेत में नहीं जाना पड़ता है।

बीजेपी कहती है कि भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई हो रही है? विपक्ष कहता है जो भी भ्रष्टाचारी हैं वो बीजेपी की वाशिंग मशीन में जाकर दूध की तरह साफ हो जाते हैं?

ऐसा कुछ भी नहीं है। जितने भी भ्रष्टाचारी हैं उनके खिलाफ कार्रवाई हो रही है। 2014 में बीजेपी के कई बड़े वादे थे, लेकिन उनमें से एक था कि मोदी ने कहा था न खाऊंगा और न खाने दूंगा। असीम अरुण ने कहा कि जो लोग भ्रष्टाचार कर रहे थे, उनके खिलाफ जांच हो रही है, कार्रवाई हो रही है। उन्होंने कहा कि कार्रवाई ऐसा नहीं है कि ईडी, सीबीआई अपने मन से कर लेती है, क्योंकि मैं इस बात को अच्छे से जानता हूं क्योंकि मैं पुलिस में रहा हूं। विवेचना को अच्छे से समझता हूं।

योगी के मंत्री ने अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी गिरफ्तारी शराब नीति घोटाले को लेकर हुई। सीबीआई ने इसकी जांच की, जांच को कोर्ट में प्रस्तुत किया। कोर्ट देखता है कि इनके खिलाफ सबूत क्या हैं। अधीनस्थ न्यायालय ने पाया कि गिरफ्तारी के पर्याप्त सबूत हैं और कोर्ट ने केजरीवाल को जेल भेज दिया। इसके बाद केजरीवाल ने अपने बेल एप्लीकेशन हाई कोर्ट में डाली। कोर्ट ने एक लंबा ऑर्डर जारी किया। जिसमें कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि केजरीवाल की गिरफ्तारी के पर्याप्त आधार हैं। इसके लिए इनको बेल नहीं दी जा सकती है।
असीम अरुण ने कहा कि हाई कोर्ट के बाद केजरीवाल सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। वहां भी इनको पता है कि जमानत नहीं मिलेगी तो एक मेडिकल आधार बनाने पर जुटे हैं। मीठा खाकर वो अपनी डायबिटीज बढ़ा रहे हैं, जिससे मेडिकल आधार पर बेल मिल जाए। अरुण ने कहा कि यह इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। ईडी,सीबीआई, पुलिस कोई भी कार्रवाई अपने दम पर नहीं करती है, वो कोर्ट के दम पर करती है।

राजनीति में आने के लिए आपने पुलिस कमिश्नर पद से इस्तीफा क्यों दे दिया। क्या कमिश्नर पद रास नहीं आया या फिर कोई और वजह? मंत्री बनने के बाद आपने सिक्योरिटी और सरकारी आवास भी नहीं लिया?

मेरे पिता यूपी पुलिस में डीजीपी रहे। उनसे मुझे संस्कार मिले। मेरे कन्नौज के मित्रों ने मुझे विधायक चुना है। क्या इसलिए चुना है कि मेरे आसपास वर्दीधारी और बंदूकधारी हों, इससे क्या संदेश जाता है? अरुण ने कहा कि इससे केवल यही संदेश जाता है कि यह बहुत असुरक्षित व्यक्ति हैं। इनको बहुत खतरा है। लेकिन मुझे ऐसा कोई खतरा है नहीं। योगी के मंत्री ने कहा कि अगर मेरे आसपास बंदूकधारी होंगे तो जिनकी सेवा के लिए आया हूं वो तो डर जाएंगे। वो हमारे पास नहीं आएंगे।

असीम अरुण ने कहा कि जब मैं पुलिस में था और यहां तक मुझे तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी का बॉडीगार्ड (2004-2008) रहने का सौभाग्य मिला। उनकी सुरक्षा का जो अंदरूनी घेरा था, उसे क्लोज प्रोडेक्शन टीम बोलते हैं। उस टीम में 22-23 लोग होते हैं। उस टीम का चीफ के रूप में मुझे काम करने मौका मिला।

उन्होंने कहा कि इस चीज को मैं बहुत अच्छी तरह से समझता हूं कि लोकतंत्र में जो वीआईपी सिक्योरिटी है, वो बड़ी-बड़ी बंदूकों और कमांडो के साथ नहीं होना चाहिए। अगर किसी को खतरा भी है तो ऐसी सिक्योरिटी होनी चाहिए, जो किसी को पता ही न चले, ऐसा मेरा मामना है। किसी का और भी मत हो सकता है।

असीम अरुण ने कहा कि दूसरा मुझे कोई खतरा नहीं है, इसलिए मुझे सुरक्षा की कोई जरूरत नहीं है। मैंने एस्क़ॉर्ट नहीं लिया है। इससे मेरा काम यह भी आसान होता है, जब मैं गाड़ी से चलता हूं तो मेरा एक गाड़ी से काम चल जाता है। कहीं गेस्ट हाउस या होटल में रुकता हूं तो दो कमरे से काम चल जाता है। तामझाम, भौकाल लेकर चलूंगा तो मेरा खर्चा बढ़ जाएगा। खर्चा बढ़ जाएगा तो मुझे पैसा लाना पड़ेगा, पैसा मेरे पास है नहीं तो फिर मुझे भ्रष्टाचार करना पड़ेगा तो फिर मैं बहुत गलत चक्कर में फंस जाऊंगा, इसलिए मैंने सिक्योरिटी नहीं ली।

पुलिस से पॉलिटिक्स में एंट्री कैसे? अंतर्आत्मा की आवाज या फिर परिवार से बातचीत के बाद लिया फैसला?

पहली बात यह है कि इधर भौकाल ज्यादा या उधर भौकाल ज्यादा है। यह मेरा सिद्धांत नहीं है, लेकिन यह भारतीय जनता पार्टी की ताकत है, जो केवल नए नेतृत्व को आमंत्रित करती है। वो युवा भी हो सकते हैं, मेरे जैसे 52 साल के व्यक्ति भी हो सकते हैं और भी ज्यादा उम्र के लोग हो सकते हैं। असीम अरुण ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी एक्सपर्ट को लाती है। साथ ही सामाजिक विविधा भी बनाती है। मैं अकेला नहीं हूं, उत्तर प्रदेश बीजेपी विधानमंडल दल में 8 ऐसे लोग हैं, जो डॉक्टर हैं।

असीम अरुण ने कहा कि बीजेपी की मेरे ऊपर निगाह पड़ी। मुझे चुनाव लड़ने का सुझाव दिया गया। मुझसे कहा गया कि आप कन्नौज के रहने वाले हैं। एक कारण यह भी था कि भाजपा 26 साल से कन्नौज सदर विधानसभा से सफल नहीं हो रही थी। कुछ समीकरण और कुछ और भी कारण रहे होंगे। इन वजहों से मेरे सामने सुझाव आया। मुझे भी लगा कि ऐसा मौका भारतीय जनता पार्टी जैसी पार्टी से बहुत कम लोगों को मिलता होगा, जो केंद्र और प्रदेश दोनों जगह है। ऐसी पार्टी मुझे एक मौका दे रही है।

दूसरी बात पुलिस में मैंने 28 साल सेवा दी। मैं कानपुर में पुलिस कमिश्नर था। ऐसे में पुलिस में जो योगदान करने का स्कोप था, वो मैं बहुत सारा कर चुका था। आगे और भी हो सकता था, लेकिन उससे ज्यादा मुझे जनता का विश्वास मिला, जो शायद पुलिस में रहते हुए नहीं मिलता। आज मैं जनता की सेवा बड़ी गहराई से कर रहा हूं। यह बहुत बड़ा मौका है और इसी मौके के लिए मैं आया हूं।

आपने काफी वक्त तक पुलिस में सेवा की। कोई ऐसी घटना बताइए जिसने आपको अंदर तक झकझोर दिया हो?

कानपुर पुलिस कमिश्नर पर पोस्टिंग मेरी अंतिम थी। इसी दौरान एक दिन मेरे पास बुजुर्ग दंपति आए। उन्होंने कहा कि मेरे बेटे और बहू ने मुझे मेरे ही घर से निकाल दिया है। हम घर जाते हैं कि तो वो मार के भगा देते हैं। यह घटना जाजमऊ की है। असीम अरुण ने कहा कि इस घटना के बाद मुझे बहुत गुस्सा आया। मैंने उनके कागज देखे। उनकी बात पूरी तरह से सही थी। इसके बाद मैंने उनको अपनी गाड़ी में बैठाया। सीधे उनके घर गया। जांच के दौरान मैंने पाया कि यह पूरी बात सही है। इसके बात मैंने बुजुर्ग दंपत्ति को उनके घर में प्रवेश कराया। साथ ही जो बेटा-बहू थे उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई। मुझे बड़ा संतोष हुआ कि उनको मैं राहत पहुंचा पाया।

असीम अरुण ने कहा कि ऐसा मौका सभी जगह है, लेकिन आज मैं योगी सरकार में समाज कल्याण मंत्री हूं तो अब जैसे उन बुजुर्ग को मैं घर में तो प्रवेश कराया, अगर उनको पेंशन की जरूरत है तो पुलिस कमिश्नर के रूप में मैं उनको पेंशन नहीं दिला सकता। लेकिन समाज कल्याण मंत्री के रूप में मैं यह कर सकता हूं।

योगी के मंत्री ने कहा कि कन्नौज में हमने 16 हजार बुजुर्गों की पेंशन दिलवाने का काम किया है, जो एक रिकॉर्ड है। अब शायद 400-500 लोग बचे होंगे। उनको भी काम जल्द पूरा होगा। कोई हक वाला व्यक्ति नहीं बचेगा।

आप पुलिस कमिश्नर रहे, ऐसे में आप पुलिस कर्मियों के लिए क्या कहना चाहेंगे?

मैं अपने को बहुत हार्डकोर पुलिस वाला मानता था, लेकिन वर्दी तो नहीं पहनता हूं, लेकिन मेरी सोच और मेरे काम करने का तरीका हमेशा पुलिस वाल रहेगा। जोकि पुलिस का काम है कि कानून-व्यवस्था को सख्ती से लागू करना, जो योगी जी ने किया है। असीम अरुण ने कहा कि आज योगी जी लोकप्रियता बहुत से कारणों से हैं, लेकिन बड़ा कारण बुलडोजर बाबा है। उन्होंने कानून को सख्ती से लागू किया है।

आपने बुलडोजर का नाम लिया। बुलडोजर के एक्शन को लेकर विपक्ष का कहना है कि यह कार्रवाई एक जाति-धर्म के लोगों के खिलाफ हो रही है?

ऐसा तो बिल्कुल भी नहीं है। बुलडोजर का मतलब यह नहीं है कि कहीं भी जाकर चढ़ जाओ। बुलडोजर का मतलब है कि इस दृढ़ शक्ति के साथ कानून को लागू करो कि जो माफिया है उसकी कमर टूट जाए। असीम अरुण ने कहा कि माफिया वो है जिसके एक हाथ में तमंचा है तो दूसरे हाथ में नोट की गड्डी है। अभी तक पुलिस तमंचे का इलाज कर पाती थी, लेकिन नोट की गड्डी का इलाज पुलिस के पास नहीं था। नोट की गड्डी यानी धनबल का इलाज मुख्यमंत्री के पास है। बुलडोजर बाबा ने तमंचे का भी इलाज कर दिया और नोट की गड्डी का भी कर दिया। बुलडोजर चलाने की कार्रवाई को लेकर मंत्री ने कई उदारहण दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामसभा की जमीन पर कब्जा, किसे ने सरकारी जमीन पर मैरिज हॉल बनाया है। उसके पैसे से क्राइम करते हैं तो उस पर बुलडोजर चलाया गया। उन्होंने कहा कि यही कारण कि जो विरोधी हैं वो ही यह सवाल उठाते हैं, क्योंकि वो तो माफिया के पैरोकार हैं।

असीम अरुण ने कहा कि माफियागिरी और व्यवसायिक अपराध को हमने हल कर लिया है। अब हम ऐसी व्यवस्था पर काम कर रहे हैं कि जो भी हमारी बहन हैं, उन पर उनका पति या पड़ोसी भी हाथ नहीं उठाएगा। क्योंकि अगले चौराहे पर योगी जी मिलेंगे और उसका इलाज कर देंगे।

अतीक अहमद का मर्डर और मुख्तार अंसारी की हार्ट अटैक से मौत इन दोनों घटनाओं को लेकर विपक्ष ने बड़े आरोप लगाए कि अतीक अहमद की हत्या एक प्लानिंग के तहत हुई और मुख्तार अंसारी की नेचुरल डेथ नहीं थी?

असीम अरुण ने कहा कि मुख्तार अंसारी की मौत हुई है। वो पहले से बीमार थे। उनका पूरा मेडिकल चेकअप भी हुआ। उनकी उम्र भी लगभग हो गई थी। इसमें सब कुछ प्रमाणित है कि मुख्तार की नेचुरल डेथ हुई। उन्होंने कहा कि यही माफिया एक वक्त चीप फॉर चिप्सी में घूमा करते थे। हमारी बहनों को बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ा, जब यह माफिया व्हीलचेर में पर आ गए तो उत्तर प्रदेश की जनता को बहुत संतुष्टी हुई। साथ ही जहां इनका स्थान वहां योगी जी ने नहीं, बल्कि ईश्वर ने पहुंचा दिया।

उन्होंने कहा कि सबसे बड़े दुख की बात यह है कि ऐसे माफिया के जनाजे में फातिया पढ़ने के लिए अखिलेश यादव गए। यह वही हैं जो कल्याण सिंह जी की अंत्येष्टि में शामिल होने नहीं गए। जबकि मुलायम सिंह जी की अंत्येष्टि में शामिल हो होने के लिए मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री के साथ मैं भी गया। असीम अरुण ने कहा कि यह मुख्तार को तो सम्मान देने जाते हैं, लेकिन कल्याण सिंह जी अंत्येष्टि में शामिल होने की इनको चिंता नहीं हुई। यह इनकी सोच को दर्शाता है। ऐसे लोग सवाल ही उठाएंगे। योगी के मंत्री ने कहा कि मुख्तार को बीमारी थी, उससे वो मर गया।

असीम अरुण ने कहा कि अगर मुख्तार अंसारी जीवित भी रहते तो इस जीवन में उनके जेल से निकलने की संभावना नहीं थी। उनको ताउम्र अब जेल में रहना था।

अतीक अहमद की हत्या को लेकर असीम अरुण ने कहा कि इसमें दो सवाल हैं। एक गैंगवार इन लोगों का चल रहा था। सभी को पता है कि गैंगवार के तहत जेल में रहते हुए इसने किस तरह की घटनाएं कराईं थीं। दूसरा विषय पुलिस की प्रक्रिया का आता है। उन्होंने कहा कि जब हम किसी को जेल भेजते हैं तो सबसे पहले हम उसका मेडिकल कराते हैं, फिर उसको न्यायालय ले जाते हैं। उसके बाद उसको जेल ले जाते हैं। यह प्रक्रिया समान रूप से चलती रहती है।

योगी के मंत्री ने कहा कि अतीक अहमद जैसे लोगों जिनका गैंगवार चल रहा है या फिर जिनके जीवन को खतरा है। इसके बार में न्यायालय में पेशी और मेडिकल प्रक्रिया के बारे में जरूर सोचना होगा। क्या डॉक्टरों को थाने में बुलाकर मेडिकल कराया जा सकता है। ऐसी कुछ नहीं तकनीक के बारे में हम लोगों को सोचना होगा। जिससे इस तरह की घटनाएं न हों।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी की आप सुरक्षा में रहे। उनसे जुड़ी कोई अच्छी बात?

मुझे उनकी सबसे अच्छी बात लगती है कि वो टाइम के बहुत पाबंद हैं। अगर उनको नौ बजे पहुंचना है तो पौने नौ बजे ही निकल लेते थे। वो बहुत सादगी और शालीनता वाले शख्स हैं।

आपके परिवार में कौन-कौन है?

मेरे पिता जी श्रीराम अरुण जी डीजीपी रहे। मेरी माता जी नहीं रहीं। वो एक लेखिका थीं। अब हम और मेरी पत्नी उस चीज को आगे बढ़ा। मेरा बेटा ताज ग्रुप ऑफ होटल्स में है, जबकि छोटा बेटा तैयारी कर रही है।

आप चाहेंगे कि आपका बेटा राजनीति में आए?

हम यह बिल्कुल नहीं चाहेंगे कि मेरा बेटा मेरी वजह से राजनीति में आए या फिर मेरे नाम से आए। हम चाहेंगे कि अगर वो राजनीति में आएं तो अपने दम पर आए।

सबसे अच्छा प्रधानमंत्री कार्यकाल किसका रहा?

सबसे अच्छा कार्यकाल पीएम मोदी का रहा है। उनके कार्यकाल में बहुत-बहुत बड़े-बड़े काम किए हैं। बता दें, राजनीति में आने से पहले असीम अरुण कानपुर के पुलिस कमिश्नर हुआ करते थे। इनके पिता जी उत्तर प्रदेश के दो बार डीजीपी रहे। एक बार कल्याण सिंह-रामप्रकाश की गुप्त की सरकार में तो दूसरी बार बसपा प्रमुख मायावती की सरकार में।

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