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टिकट मिलने के 22 दिन बाद बदायूं पहुंचे शिवपाल, बोले- ये सपा का गढ़, BJP को खोजने पर भी नहीं मिल रहा प्रत्याशी

Lok Sabha Elections: बदायूं लोकसभा सीट पर चुनाव रोचक होने वाला है। यहां से सपा ने शिवपाल यादव को उम्मीदवार बनाया है।
Written by: न्यूज डेस्क
Updated: March 14, 2024 18:30 IST
टिकट मिलने के 22 दिन बाद बदायूं पहुंचे शिवपाल  बोले  ये सपा का गढ़  bjp को खोजने पर भी नहीं मिल रहा प्रत्याशी
शिवपाल सिंह यादव। (इमेज- पीटीआई)
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Lok Sabha Elections: बदायूं समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता था। साल 1996 से लेकर 2014 तक इस सीट पर सपा का ही कब्जा था लेकिन 2019 में भारतीय जनता पार्टी ने इस वर्चस्व को तोड़ा। इस बार समाजवादी पार्टी ने शिवपाल यादव को बदायूं सीट से टिकट दिया है। बदायूं लोकसभा सीट से टिकट मिलने के 22 दिन बाद उन्होंने क्षेत्र का दौरा किया है।

सियासी गलियारों में चर्चा तो इस बात की भी थी कि शिवपाल यादव खुद बदायूं से चुनाव नहीं लड़ना चाहते। ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि सपा इस सीट पर उम्मीदवार को बदल सकती है। हालांकि, 22 दिन बाद शिवपाल सिंह के दौरा करने के बाद इन अटकलों पर विराम लग गया है। उम्मीदवारी मिलने पर सपा नेता शिवपाल सिंह यादव कहते हैं कि यह सीट समाजवादियों का गढ़ रही है।

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शिवपाल यादव ने कहा कि बदायूं लोकसभा सीट से पहले मुलायम सिंह यादव सासंद थे। फिर इसके बाद इस सीट पर धमेंद्र यादव को टिकट दिया गया था। अब इसके बाद मैं यहां से चुनाव लड़ने के लिए यहां पर हूं। बीजेपी को हमारे सामने प्रत्याशी नहीं मिल रहा है पहले प्रत्याशी तो लाएं। उन्होंने कहा कि इंडिया अलायंस इस बार 80 सीटें जीतेगा।

बीजेपी ने पिछली बार दी थी मात

बदायूं लोकसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने अभी किसी भी उम्मीदवार के नाम का ऐलान नहीं किया है। इसके बावजूद चुनावी व्यूह रचना शुरू हो चुकी है। इस समय इस सीट पर बीजेपी का ही कब्जा है। पिछले लोकसभा चुनाव में सीट पर बीजेपी की संघमित्रा ने मुलायम सिंह यादव परिवार के धर्मेंद्र यादव को लोकसभा चुनाव में पराजित कर दिया था।

संघमित्रा स्वामी प्रसाद मौर्या की बेटी है। उनके पिता उस समय भारतीय जनता पार्टी के साथ थे और स्वामी प्रसाद मौर्या बीजेपी नेतृत्व से अपनी बेटी को टिकट दिलवाने में कामयाब हो गए थे। हालांकि, बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों की दो लिस्ट जारी कर दी हैं। लेकिन अभी तक बदांयू सीट पर किसी के भी नाम की घोषणा नहीं की गई है।

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समाजवादी पार्टी इस सीट को लेकर पशोपेश में है कि किस रणनीति के तहत वो अपनी मजबूत सीट को वापस पाएं। इसलिए धर्मेंद्र यादव की जगह शिवपाल यादव को टिकट दिया गया है। इस क्षेत्र में यादव वोटर्स की संख्या बहुत ज्यादा है। यही नहीं मुस्लिम मतदाता भी बड़ी संख्या में है लेकिन यादव और मुस्लिम निर्णायक तो हैं ही, अगर पिछड़े और सवर्ण वोटर्स भी एकजुट हो जाएं तो नतीजे बदल सकते हैं। बदायूं किसके साथ जाएगा सवाल बड़ा है और इसका जवाब इतना भी आसान नहीं है।

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