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Gyanvapi Case: व्यासजी के तहखाने में पूजा-अर्चना पर रोक नहीं, इलाहाबाद हाई कोर्ट में मुस्लिम पक्ष ने जानिए क्या कहा?

Gyanvapi Case: मुस्लिम पक्ष की ओर से इंतजामिया कमेटी और वक्फ बोर्ड के वकीलों ने एक बार फिर से दलील दी कि व्यास तहखाने में कभी हिंदुओं का कब्जा नहीं रहा। मुस्लिम पक्ष ने कहा कि हिंदुओं का तहखाने पर कब्जे का दावा पूरी तरह से गलत है।
Written by: न्यूज डेस्क
Updated: February 12, 2024 15:53 IST
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Gyanvapi Case: ज्ञानवापी में व्यासीजी के तहखाने में पूजा अर्चना को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की दलीलें सुनीं। (ANI)
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Gyanvapi Case: इलाहाबाद हाई कोर्ट में सोमवार को वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर स्थित व्यासजी के तहखाने में पूजा अर्चना शुरू किए जाने के मामले को लेकर सुनवाई हुई। यह सुनवाई वाराणसी जिला जज के आदेश के खिलाफ दाखिल की गई मुस्लिम पक्ष की याचिका पर हुई। हालांकि, आज सुनवाई पूरी नहीं हो सकी।

इलाहाबाद हाई कोर्ट में लगभग 1:20 घंटे तक मामले की सुनवाई हुई। जिसमें ज्ञानवापी मस्जिद की इंतजामिया कमेटी और यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के वकीलों ने पक्ष रखा। हालांकि, हिंदू पक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार को अपनी दलीलें पेश करने का मौका नहीं मिला। हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई होने तक पूजा अर्चना के आदेश पर किसी तरह की रोक नहीं लगाई है। सोमवार को सुनवाई के बावजूद व्यास तहखाने में पूजा अर्चना जारी रहेगी।

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मुस्लिम पक्ष की ओर से इंतजामिया कमेटी और वक्फ बोर्ड के वकीलों ने एक बार फिर से दलील दी कि व्यास तहखाने में कभी हिंदुओं का कब्जा नहीं रहा। मुस्लिम पक्ष ने कहा कि हिंदुओं का तहखाने पर कब्जे का दावा पूरी तरह से गलत है। मुस्लिम पक्ष ने अयोध्या विवाद की तर्ज पर व्यास परिवार की याचिका को खारिज किए जाने की दलील दी। उन्होंने कहा कि बाबरी मामले में निर्मोही अखाड़े की तरफ से एक व्यक्ति खड़ा हुआ और उसने पूजा के अधिकार की मांग की, लेकिन कोर्ट ने उसे मंजूर नहीं किया था।

सीनियर एडवोकेट सैयद फरमान अहमद नकवी ने दलील दी कि जिला जज को यह पूछना चाहिए था कि व्यास परिवार आखिरकार किस अधिकार के तहत पूजा अर्चना शुरू किए जाने की मांग कर रहा है। जिला जज ने उसकी अर्जी की पोषणीयता तय करने के बजाय सीधे तौर पर पूजा करने का आदेश दे दिया।

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इस मामले इलाहाबाद हाईकोर्ट 15 फरवरी को फिर सुनवाई करेगा। जिसमें यूपी सरकार, हिंदू पक्ष और काशी विश्वनाथ ट्रस्ट अपनी दलीलें पेश करेगा। हालांकि, उम्मीद यह भी की जा रही है कि 15 फरवरी को केस की सुनवाई पूरी हो जाएगी। सुनवाई पूरी होने पर अगर कोर्ट उसी दिन फैसला नहीं सुनाता है, तो जजमेंट रिजर्व हो सकता है।

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सोमवार यानी आज हुई सुनवाई में सबसे पहले उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने अपनी दलीलें रखी। इसके बाद मस्जिद कमेटी ने दलीलें पेश कीं। मामले की सुनवाई जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की सिंगल बेंच में हुई। बता दें, इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट में मुस्लिम पक्ष ने याचिका दाखिल की थी। याचिका में वाराणसी जिला जज के 17 और 31 जनवरी के आदेश को चुनौती दी गई थी।

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