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किसानों ने बढ़ाईं सरकार की मुश्किलें, SKM ने 26 के लिए जारी किया फरमान, दर्शनपाल बोले, कृषि कानूनों से भी इतर मुद्दे, सरकार करे चर्चा

मोर्चा ने प्रधानमंत्री के फैसले का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही कहा है कि वह संसदीय प्रक्रियाओं के जरिए घोषणा के प्रभावी होने की प्रतीक्षा करेगा। चालीस किसान संघों के प्रमुख संगठन एसकेएम ने एक बयान में कहा कि प्रदर्शनकारी किसानों की सभी मांगों को पूरा कराने के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
Written by: जनसत्ता | Edited By: shailendra gautam
November 20, 2021 20:00 IST
किसानों ने बढ़ाईं सरकार की मुश्किलें  skm ने 26 के लिए जारी किया फरमान  दर्शनपाल बोले  कृषि कानूनों से भी इतर मुद्दे  सरकार करे चर्चा
किसान कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। (एक्सप्रेस फोटो)।
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तीनों कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा करके मोदी सरकार समझ रही होगी कि अब मुसीबत से छुटकारा मिला, लेकिन ऐसा होता लग नहीं रहा है। किसान आंदोलन की पहली सालगिरह पर संयुक्त किसान मोर्चा ने फरमान जारी किया है कि सभी प्रदर्शन स्थलों पर भारी तादाद में किसान जमा हों। वहीं किसान नेता दर्शन पाल ने कहा कि कृषि कानूनों से भी इतर कई मुद्दे हैं। इन सभी पर चर्चा के लिए सरकार को पहल करनी होगी।

संयुक्त किसान मोर्चा ने किसानों से 26 नवंबर को कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन की पहली वर्षगांठ पर सभी विरोध स्थलों पर बड़ी संख्या में इकट्ठा होने का आग्रह किया। मोर्चा ने प्रधानमंत्री के फैसले का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही कहा है कि वह संसदीय प्रक्रियाओं के जरिए घोषणा के प्रभावी होने की प्रतीक्षा करेगा। चालीस किसान संघों के प्रमुख संगठन एसकेएम ने कहा कि किसानों की सभी मांगों को पूरा कराने के लिए संघर्ष जारी रहेगा।

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किसान नेताओं ने कहा कि रविवार को सिंघू बॉर्डर धरना स्थल पर मोर्चा की बैठक में आंदोलन के भविष्य और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के मुद्दे पर अंतिम फैसला किया जाएगा। किसान संगठन ने कहा कि आंदोलन की पहली वर्षगांठ पर दूसरे राज्यों में ट्रैक्टर और बैलगाड़ियों की परेड आयोजित की जाएगी। मोर्चा ने कहा कि दिल्ली से दूर विभिन्न राज्यों में 26 नवंबर को एक साल पूरा होने पर राजधानियों में ट्रैक्टर और बैलगाड़ी परेड के साथ-साथ अन्य प्रदर्शन किए जाएंगे। संगठन का कहना है कि प्रधानमंत्री ने कानूनों को वापस लेने की घोषणा की, लेकिन वह अन्य मांगों पर चुप रहे।

मोर्चा ने कहा कि किसान आंदोलन में अब तक 670 से अधिक किसान शहीद हुए। सरकार ने उनके बलिदान को स्वीकार तक नहीं किया। इन शहीदों के परिवारों को मुआवजे और रोजगार के अवसरों के साथ समर्थन दिया जाना चाहिए। ये शहीद संसद सत्र में श्रद्धांजलि के हकदार हैं और उनके नाम पर एक स्मारक बनाया जाना चाहिए। एसकेएम का कहना है कि हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, चंडीगढ़, मध्य प्रदेश और अन्य जगहों पर हजारों किसानों को फंसाने के लिये दर्ज मामले बिना शर्त वापस लिए जाने चाहिए। इसमें यह भी कहा गया है कि 29 नवंबर से शुरू हो रहे संसद सत्र के दौरान प्रतिदिन 500 प्रदर्शनकारी ट्रैक्टर ट्रॉलियों से संसद तक शांतिपूर्ण मार्च करेंगे।

मोर्चा ने यह भी संकेत दिया कि एमएसपी की वैधानिक गारंटी और बिजली संशोधन विधेयक वापस लिए जाने की मांग के लिए आंदोलन जारी रहेगा। मोर्चा ने किसानों से 22 नवंबर को लखनऊ किसान महापंचायत में "बड़ी" संख्या में शामिल होने की भी अपील की है। ध्यान रहे कि राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं पर हजारों किसान, खासकर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के, तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग के साथ पिछले साल 26 नवंबर से प्रदर्शन कर रहे हैं।

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