scorecardresearch
For the best experience, open
https://m.jansatta.com
on your mobile browser.

सीएम योगी की तारीफ करने वाले जज की टिप्पणी से बिफरा इलाहाबाद हाई कोर्ट, कहा- न्याय के पद पर बैठे अधिकारी से ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती

Allahabad High Court: 2010 के बरेली दंगे को लेकर 5 मार्च, 2023 को बरेली के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश दिवाकर अपने आदेश में कहा था कि सत्ता के पदों पर बैठे लोगों को “धार्मिक व्यक्ति” होना चाहिए। इस दौरान कोर्ट ने उदाहरण के तौर पर सीएम योगी आदित्यनाथ का हवाला दिया था।
Written by: न्यूज डेस्क
Updated: March 20, 2024 16:36 IST
सीएम योगी की तारीफ करने वाले जज की टिप्पणी से बिफरा इलाहाबाद हाई कोर्ट  कहा  न्याय के पद पर बैठे अधिकारी से ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती
Allahabad High Court: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। (PTI)
Advertisement

Allahabad High Court: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में मंगलवार को बरेली के अतिरिक्त सत्र जज रवि कुमार दिवाकर की उन टिप्पणियों को खारिज कर दिया। जिसमें जज रवि कुमार दिवाकर ने 2010 बरेली दंगे की सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना की थी। बरेली के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश दिवाकर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ करते हुए कहा था कि धार्मिक व्यक्ति ही योग्य राजा बन सकता है और अच्छे परिणाम दे सकता है।

जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की पीठ ने बरेली के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश दिवाकर की टिप्पणियों को खारिज करते हुए कहा कि न्यायिक अधिकारी से ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती है कि वो अपनी व्यक्तिगत या पूर्व धारणाओं और लगाव को व्यक्त या प्रर्दशित करे।

Advertisement

सिंगल बेंच ने कहा कि न्यायिक आदेश लोगों के लिए होते हैं और इस प्रकार के आदेश को जनता द्वारा गलत समझा जा सकता है। बेंच ने कहा कि न्यायिक अधिकारी से यह उम्मीद की जाती है कि उन्हें अपने मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करते वक्त एक सीमा में रहकर अभिव्यक्ति का उपयोग करना चाहिए। साथ ही ऐसे मुद्दे का जिक्र नहीं करना चाहिए जो मूल मुद्दे से संबंधित या अलग हों।

बता दें, 2010 के बरेली दंगे को लेकर 5 मार्च, 2023 को बरेली के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश दिवाकर अपने आदेश में कहा था कि सत्ता के पदों पर बैठे लोगों को “धार्मिक व्यक्ति” होना चाहिए। इस दौरान कोर्ट ने उदाहरण के तौर पर सीएम योगी आदित्यनाथ का हवाला दिया था।

कोर्ट ने यह भी कहा था कि एक धार्मिक व्यक्ति का जीवन “त्याग और समर्पण” का होता है, न कि विलासिता में जीने का। कोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए यह कहा था कि कैसे तौकीर रजा ने एक धार्मिक व्यक्ति होने और बरेली में दरगाह आला हजरत के एक बेहद प्रतिष्ठित परिवार से संबंधित होने के बावजूद समुदाय के लोगों को भड़काने, कानून और व्यवस्था को बिगाड़ने में शामिल थे।

Advertisement

कोर्ट ने कहा था कि शक्ति का उपयोग करने वालों को सत्ता का प्रमुख एक धार्मिक व्यक्ति होना चाहिए, क्योंकि एक धार्मिक व्यक्ति का जीवन आनंद का नहीं, बल्कि त्याग और समर्पण का होता है। इस दौरान कोर्ट ने गोरखनाथ मंदिर के पीठाधीश्वर महंत बाबा योगी आदित्यनाथ को उदाहरण दिया था, जो वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। कोर्ट ने कहा था कि उपरोक्त अवधारणा को उन्होंने सच साबित किया है।

Advertisement
Tags :
Advertisement
tlbr_img1 राष्ट्रीय tlbr_img2 ऑडियो tlbr_img3 गैलरी tlbr_img4 वीडियो