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Tripura : त्रिपुरा में हार पर वामपंथी नेता ने समझाया गणित, बोले- टिपरा मोथा से तालमेल न हो पाने की वजह से बीजेपी को मिला फायदा

Tripura : माकपा के राज्य सचिव जितेंद्र चौधरी ने इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत की है। क्या हैं इस बातचीत के अहम पहलू ? जानिए..
Written by: Debraj Deb | Edited By: Mohammad Qasim
Updated: March 05, 2023 18:09 IST
tripura   त्रिपुरा में हार पर वामपंथी नेता ने समझाया गणित  बोले  टिपरा मोथा से तालमेल न हो पाने की वजह से बीजेपी को मिला फायदा
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Tripura : त्रिपुरा में एक बार फिर भाजपा सरकार बना रही है। कांग्रेस और वाम दलों ने एक साथ चुनाव लड़ने का फैसला लेकर यह ऐलान किया था कि इस बार राज्य में सत्ता परिवर्तन होगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। त्रिपुरा की राजनीति और यहां एक बार फिर भाजपा के सत्ता में वापसी से लेकर, वाम गठबंधन के खराब प्रदर्शन और टिपरा मोथा के उदय तक, क्या अहम कारण रहे हैं।

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ऐसे ही सवालों पर माकपा के राज्य सचिव जितेंद्र चौधरी ने इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत की है। क्या हैं इस बातचीत के अहम पहलू ? जानिए..

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वाम गठबंधन के कमजोर प्रदर्शन के क्या कारण रहे?

माकपा के राज्य सचिव जितेंद्र चौधरी ने कहा कि चुनावी अभियान के दौरान जब हम यह दावे कर रहे थे कि भाजपा इस चुनाव में हारेगी तब हम गलत नहीं थे, आप वोट प्रतिशत के आंकड़े उठाकर देखिए, भाजपा इस लिहाज से हार गयी है। भाजपा का वोट प्रतिशत 2018 के मुक़ाबले कम है। उन्होने अपनी हार की वजह पर बात करते हुए कहा कि हमने कांग्रेस से गठबंधन किया लेकिन हम ऐसा टिपरा मोथा के साथ नहीं कर सके, हालांकि हमने इसके लिए कोशिश की थी। टिपरा मोथा ने भाजपा के लिए राह आसान कर दी और वोटों का विभाजन हो गया।

टिपरा मोथा के साथ लड़ते तो अलग होते परिणाम

जितेंद्र चौधरी ने कहा कि कांग्रेस माकपा और टिपरा मोथा तीनों भाजपा के खिलाफ मैदान में थे। हालांकि हमारे मुद्दे और नारे अलग-अलग थे। वाम-कांग्रेस ने लोकतंत्र और कानून के शासन को बहाल करने के वादे पर मतदान किया। जबकि मोथा का मुद्दा आदिवासी स्वायत्तता की मांग के लिए एक संवैधानिक समाधान था। अगर हमने इन दोनों मुद्दों को साथ लेकर लड़ते तो परिणाम कुछ अलग हो सकते थे।

कांग्रेस के साथ गठबंधन ने नुकसान किया?

माकपा सचिव ने कहा कि यह सही नहीं है। हर जगह, हर स्तर पर कांग्रेस समर्थकों ने काफी मेहनत की है लेकिन 2018 के बाद से कांग्रेस का एक बड़ा वोट शेयर गिर गया है। जिसमें से एक बड़ा हिस्सा भाजपा में बदल गया है।

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इसके अलावा, कांग्रेस केवल कुछ इलाकों में ही सक्रिय थी, वह भी ज्यादातर चुनाव से पहले। हमारी पार्टी से उलट कांग्रेस नेता आधारित पार्टी है। हमारे मामले में नेता हों या न हों, कैडर सक्रिय रहता है।

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