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Tripura में बीजेपी के ट्रंप कार्ड हैं जिष्णु देव वर्मा, अच्छे और बुरे समय दोनों में रहे हैं पार्टी के वफादार, ऐसे चढ़ा करियर का ग्राफ

Jishnu Dev Varma News: 'नानी कर्ता' के नाम से जाना जाते रामेंद्र किशोर देव वर्मा और 'राजकुमारी' कमल प्रभा देवी के बेटे 'कर्ता (राजकुमार') जिष्णु देव वर्मा ने लगभग पांच दशक पहले राजनीति में प्रवेश किया था।
Written by: Debraj Deb | Edited By: Keshav Kumar
Updated: February 13, 2023 18:01 IST
tripura में बीजेपी के ट्रंप कार्ड हैं जिष्णु देव वर्मा  अच्छे और बुरे समय दोनों में रहे हैं पार्टी के वफादार  ऐसे चढ़ा करियर का ग्राफ
64 वर्षीय जिष्णु देव वर्मा ने त्रिपुरा में भाजपा सरकार में वित्त, बिजली और ग्रामीण विकास के प्रमुख विभागों को भी संभाला। ( PHOTO- Twitter/Jishnu_Devvarma)
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Tripura Elections: त्रिपुरा में उपमुख्यमंत्री जिष्णु देव वर्मा कई तरीकों से भाजपा के तुरुप का इक्का हैं। पहले तरीका यानी तत्कालीन त्रिपुरा शाही परिवार से आने वाले जिष्णु देव वर्मा ने 2018 में पहली बार सत्ता में आने से पहले ही भारतीय जनता पार्टी को वैधता प्रदान कर दी थी। दूसरा, इससे पहले कि वह राज्य में सियासत के खिलाड़ी बने वह लंबे समय तक भाजपा के वफादार रहे हैं। तीसरा, साल 2018 में जब भाजपा जीती तो जिष्णुदेव वर्मा ने अपनी चारिलम विधानसभा सीट पर प्रतिद्वंद्वियों को चुनाव में सबसे बड़े अंतर 26,580 वोट या कुल वोटिंग का 89.33 फीसदी से हराया।

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पांच दशक पहले राजनीति में सक्रिय हुए थे जिष्णु देववर्मा

'नानी कर्ता' के नाम से जाना जाते रामेंद्र किशोर देव वर्मा और 'राजकुमारी' कमल प्रभा देवी के बेटे 'कर्ता' (राजकुमार) जिष्णु देव वर्मा ने लगभग पांच दशक पहले राजनीति में प्रवेश किया था। 1989 और 1993 के बीच वह उत्तर-पूर्वी परिषद सलाहकार समिति के सदस्य थे और भारतीय राष्ट्रीय कला और सांस्कृतिक विरासत परिषद (INTACH) के संयोजक भी थे।

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1990 के दशक में भाजपा में प्रवेश

कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस दोनों में कार्यकाल के बाद उन्होंने 1990 के दशक की शुरुआत में भाजपा में अपना कदम रखा। तब भाजपा अपने राम मंदिर आंदोलन की ऊंचाई पर थी, लेकिन त्रिपुरा में उसे बहुत कम समर्थन प्राप्त था। भाजपा ने उनकी क्षमता को पहचानते हुए साल 1993 में अपनी राष्ट्रीय परिषद में त्रिपुरा के चेहरे के रूप में जिष्णुदेव वर्मा को शामिल किया। बाद में उन्हें त्रिपुरा का प्रभारी राष्ट्रीय महासचिव नामित किया गया।

1996 में पहली बार बने भाजपा उम्मीदवार, तीन बार हारे

उन्होंने 1996 में भाजपा उम्मीदवार के रूप में पूर्वी त्रिपुरा आदिवासी-आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा चुनाव लड़ा। इसके बाद 1998 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव और 1999 के लोकसभा चुनाव भी लड़े। वे तीनों बार हार गए। हालांकि उन्होंने 29 फीसदी वोट हासिल किए और वह तब ​​​​त्रिपुरा में भाजपा को मिले वोटों में सबसे अधिक था। जब भाजपा ने 2015 से शुरू होने वाले अपने पूर्वोत्तर अभियान के हिस्से के रूप में त्रिपुरा पर ध्यान केंद्रित किया तो उनकी वफादारी और प्रदर्शन को पुरस्कृत किया गया। उन्हें अपनी कोर कमेटी के सदस्य के रूप में शामिल किया। हालांकि भाजपा ने बिप्लब कुमार देब को पार्टी के त्रिपुरा प्रमुख के रूप में नियुक्त किया था।

2018 विधानसभा चुनाव में भाजपा के तुरुप के इक्के रहे देव वर्मा

2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जिष्णुदेव वर्मा को उनके भतीजे प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा के खिलाफ अपने शाही तुरुप के इक्के के रूप में पेश किया था। शाही वंशज प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा उस समय कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष थे। भाजपा के जीतने के बाद बिप्लव देब ने सीएम के रूप में पदभार संभाला। वहीं जिष्णुदेव वर्मा को डिप्टी सीएम नामित किया गया। 64 वर्षीय जिष्णुदेव वर्मा ने निवर्तमान भाजपा सरकार में वित्त, बिजली और ग्रामीण विकास के प्रमुख विभागों को भी संभाला और उनमें महत्वपूर्ण सफलता हासिल की।

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चारिलम में त्रिकोणीय मुकाबले में हैं जिष्णुदेव वर्मा

त्रिपुरा के आगामी विधानसभा चुनाव में जिष्णुदेव वर्मा को चारिलम में सीपीआई (एम)-कांग्रेस के संयुक्त आदिवासी उम्मीदवार अशोक देबबर्मा से कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ रहा है। वहां रेस में एक और उम्मीदवार हैं सुबोध देबबर्मा। वे प्रद्योत की टिपरा मोथा पार्टी से हैं। उनकी संभावना के बारे में पूछे जाने पर जिष्णुदेव वर्मा ने कहा, “वे (सीपीएम और कांग्रेस) एक साथ आए क्योंकि वे कमजोर हैं। वे दशकों से एक-दूसरे के गले लगे हैं। अब वे एक अवसरवादी गठबंधन में साथ आ गए हैं। वे दावा करते हैं कि लोकतंत्र नहीं है, वे खुले तौर पर हमारी आलोचना कर रहे हैं। लोकतंत्र नहीं है तो चुनाव कैसे हो रहे हैं?”

प्रद्योत की रैलियों में भीड़ त्रिपुरा की राजनीति में नई नहीं

जिष्णुदेव वर्मा एक कवि भी हैं। उन्होंने चिल्ड्रन ऑफ वॉटर देवी और मास्टर ऑफ टाइम जैसी किताबें लिखी हैं। इसके अलावा उन्हें पेंट और स्कल्प्ट्स की रचना भी की है। टिपरा मोथा के बारे में उन्होंने कहा कि वह किसी और चीज की तुलना में अधिक प्रचार है जो प्रद्योत की रैलियों में देखी जा रही बड़ी भीड़ आदिवासी राजनीति के लिए "नई नहीं" है। उन्होंने स्वीकार किया कि त्रिपुरा में आदिवासी राजनीति का एक पारंपरिक स्थान है, "जिस पर मोथा सवार है", हालांकि जिष्णुदेव वर्मा ने कहा कि यह स्थान सीमित था।

उठे और गायब हो गए कई आदिवासी दल- जिष्णुदेव वर्मा

जिष्णुदेव वर्मा ने कहा, 'उनकी युवाओं में अपील है, लेकिन यह मांग (आदिवासियों के लिए राज्य का दर्जा) अब खत्म हो रही है।” अन्य आदिवासी दलों का नाम गिनाते हुए उन्होंने बताया कि वे कैसे उठे और गायब हो गए। "अब टिपरा मोथा इस जगह में काम कर रहा है। त्रिपुरा अपने आप में एक छोटा राज्य है और वह (प्रद्योत) जो कर रहे हैं वह आला राजनीति है। उस जगह में वह बड़ा दिखता है।

चलो भविष्वात बनै… बीजेपी का नया नारा

यह पूछे जाने पर कि सत्ता में आने पर उनकी प्राथमिकताएं क्या होंगी उन्होंने कहा कि वह चारिलम को शिक्षा और खेल का केंद्र बनाने की उम्मीद करते हैं। “सड़कें, स्कूल हो गए हैं, हम अब लेवल दो विकास देना चाहते हैं। अगरतला के बाहर विकास अधिक होना चाहिए, ताकि प्रगति कहीं और हो।” उन्होंने कहा कि 2018 में चलो पलटाई (चलो बदलो) के बदले इस बार भाजपा का नारा है, चलो भविष्वात बनै (चलो भविष्य बनाते हैं)।

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