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संसद का शीतकालीन सत्र: महुआ मोइत्रा से धीरज साहू तक, क्या कुछ रहा खास

इस साल का शीतकालीन सत्र 4 दिसंबर 2023 से शुरू हुआ और 22 दिसंबर तक चलेगा।
Written by: Suneet Kumar Singh
Updated: December 12, 2023 19:33 IST
संसद का शीतकालीन सत्र  महुआ मोइत्रा से धीरज साहू तक  क्या कुछ रहा खास
शीतकालीन सत्र 4 दिसंबर से हो चुका है।
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संसद संवैधानिक जनतंत्र का शीर्ष मंच है और संसदीय प्रणाली के द्वारा देश की तरक्की की इबारत लिखी जाती है। इसीलिए सरकार द्वारा संसद में पेश किये गये विधेयकों पर दलगत राजनीतिक मानसिकता से बाहर निकलकर एक स्वस्थ चर्चा होती है जिससे देश के विकास का एक मजबूत स्तंभ तैयार हो सके। आमतौर पर संसद का शीतकालीन सत्र नवंबर के मध्य से दिसंबर के मध्य तक आयोजित किया जाता है। यह सभी सत्रों में सबसे छोटा है। संसद के शीतकालीन सत्र पर अपने विचार रखते हुए राजनीतिक विश्लेषक और लेखक अभिषेक गुप्ता ने जनसत्ता से बात करते हुए बताया कि, 'इस बार शीतकालीन सत्र इस मायने में भी महत्वपूर्ण है कि पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों सत्र शुरू होने के मात्र एक दिन पहले आये, जिसमें से तीन बड़े राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनी। इस बड़ी जीत को भारतीय जनता पार्टी 2024 के लोक सभा चुनाव का सेमीफाइनल भी मान रही है।'

इस साल का शीतकालीन सत्र 4 दिसंबर 2023 से शुरू हुआ और 22 दिसंबर तक चलेगा। इस सत्र के 19 दिनों में 15 बैठकें होनी हैं। इस बार शीतकालीन सत्र से ठीक एक दिन पहले तीन दिसंबर को पांच राज्यों- राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना में हुए चुनावों के नतीजे आये, जिसकी वजह से सर्वदलीय बैठक दो दिन पहले यानी कि 2 दिसंबर को ही बुलाई गई थी जबकि आमतौर पर सर्वदलीय बैठक सत्र शुरू होने से एक दिन पहले बुलाई जाती है।

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सदन में बहस के पश्चात् जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2023 और जम्मू और कश्मीर आरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2023 पारित कर दिया । खास बात ये है कि ये लोकसभा में ये दोनों विधेयक पारित हो चुके हैं। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ 'कैश-फॉर-क्वेरी' आरोपों पर लोकसभा में खूब हंगामा भी हुआ ।

कांग्रेस सांसद धीरज साहू पर छापे में 200 करोड़ रुपये से अधिक नकदी बरामद होना एक अनोखा और विचित्र संबंध है जिसे भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस पार्टी के साथ बनाना चाहती है। यदि किसी परिसर में बेहिसाब नकदी पाई गई है तो यह वास्तव में उस परिसर से जुड़े व्यक्ति या कॉर्पोरेट इकाई पर निर्भर है कि वह इसका स्पष्टीकरण दे। कांग्रेस पार्टी का इससे कोई लेना-देना नहीं है।

दरअसल महुआ मोइत्रा के खिलाफ भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकपाल से शिकायत की थी। इसके बाद जांच के लिए एथिक्स कमेटी का गठन किया गया था। गौरतलब है कि भाजपा के नेता निशिकांत दुबे ने महुआ मोइत्रा के खिलाफ लोकपाल में शिकायत दर्ज कराई थी। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा पर उद्योगपति दर्शन हीरानंदानी से उपहार के बदले संसद में सवाल पूछने और संसद की आईडी और पासवर्ड हीरानंदानी को देने का आरोप लगा था। इतना ही नहीं उन्होंने मोइत्रा पर आर्थिक लाभ के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने का भी आरोप लगाया है।

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इसके साथ ही आईपीसी, सीआरपीसी और साक्ष्य अधिनियम को प्रतिस्थापित करने वाले तीन प्रमुख विधेयकों पर सत्र के दौरान चर्चा की जा सकती है । जिनका उद्देश्य ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में लागू किये गए भारतीय दंड संहिता (IPC), दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम को निरस्त कर उनमें बदलाव करना है, जिन्हें बदले जाने की जरूरत भी है क्योंकि देश और समाज के हितों को ध्यान में रखते हुए ब्रिटिश मानसिकता से प्रेरित कानूनों को बदलने की शक्त जरुरत है। इसमें भारतीय दंड संहिता 1860 के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता विधेयक, 2023, दंड प्रक्रिया संहिता 1898 के स्थान पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता विधेयक, 2023 और साक्ष्य अधिनियम, 1872 के स्थान पर भारतीय साक्ष्य विधेयक, 2023 पास कराना सरकार की प्राथमिकता रहेगी।

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टीएमसी की महिला सांसदों ने आज भाजपा नेता गिरिराज सिंह की ममता बनर्जी पर टिप्पणी के खिलाफ संसद भवन परिसर में प्रदर्शन किया। टीएमसी सांसदों ने गिरिराज सिंह को कैबिनेट से बाहर करने की मांग की। इसके अतिरिक्त संसद में लंबित एक अन्य प्रमुख विधेयक मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित है। सरकार इस विधेयक के माध्यम से मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों के दर्जे को कैबिनेट सचिव के बराबर लाना चाहती है। वर्तमान में उन्हें सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस के बराबर का दर्जा प्राप्त है। मानसून सत्र में पेश किए गए यह प्रस्ताव विपक्ष और पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों के विरोध के बीच पास नहीं हो पाया था।

विपक्षी पार्टियों का मानना है कि दो दिसंबर की बैठक सिर्फ औपचारिकता के लिए हुई थी। विपक्षी पार्टियों को पता है कि संसद के इस सत्र में क्या मुद्दे उठाने हैं और केंद्र को किस मुद्दे पर घेरना है। परंतु तीन राज्यों में बीजेपी की भारी जीत ने विपक्ष की बोलती बंद कर दी है। संसदीय पद्धति को गुणवान और प्रभावी बनाए जाने की आवश्यकता है। जिसमें पक्ष और विपक्ष दोनों को गुणवत्तापूर्ण चर्चा के माध्यम से देशहित एवं जनहित के लिए आवश्यक बदलावों का समर्थन करना चाहिए।

संसद के शीतकालीन सत्र के लिए पहुंचे कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा- कांग्रेस सांसद धीरज साहू पर छापे में 200 करोड़ रुपये से अधिक नकदी बरामद होना एक अनोखा और विचित्र संबंध है जिसे भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस पार्टी के साथ बनाना चाहती है। यदि किसी परिसर में बेहिसाब नकदी पाई गई है तो यह वास्तव में उस परिसर से जुड़े व्यक्ति या कॉर्पोरेट इकाई पर निर्भर है कि वह इसका स्पष्टीकरण दे।

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