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RSS समर्थक ने नहीं मांगी हाईकोर्ट से दोबारा माफी, बोले- लड़ेंगे मुकदमा, जस्टिस से पूछा था- क्या आप चिदंबरम के जूनियर थे

जस्टिस एस मुरलीधर ने इसके तुरंत बाद दिए गए अपने जवाब में कहा था कि वो कभी भी पी चिदंबरम के साथ काम नहीं करते थे। उनके साथ उनका कोई संबंध नहीं है। मामले ने तूल पकड़ा तो संघ समर्थक एस गुरुमूर्ति ने अपने कदम पीछे करते हुए माफीनामा भी हाईकोर्ट भेज दिया।
Written by: shailendragautam
Updated: April 28, 2023 06:37 IST
rss समर्थक ने नहीं मांगी हाईकोर्ट से दोबारा माफी  बोले  लड़ेंगे मुकदमा  जस्टिस से पूछा था  क्या आप चिदंबरम के जूनियर थे
दिल्ली हाईकोर्ट (File Photo)
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दिल्ली हाईकोर्ट में तैनात रहे जस्टिस मुरलीधर के खिलाफ आपत्तिजनक ट्वीट के मामले में संघ समर्थक एस गुरुमूर्ति के खिलाफ अदालत ने शिकंजा कस दिया है। उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना के केस में सुनवाई के लिए हाईकोर्ट ने तारीख तय कर दी है। 6 जुलाई को जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस तलवंत सिंह की बेंच मामले की सुनवाई करेगी। दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की तरफ से ये याचिका दायर की गई थी। इसमें कहा गया था कि संघ समर्थक और तमिल राजनीतिक पत्रिका के संपादक एस गुरुमूर्ति के खिलाफ अवमानना का केस चलाया जाए।

पी चिदंबरम के बेटे को INX media मीडिया केस में राहत देने पर किया था ट्वीट

मामला 2018 का है। पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम को INX media मीडिया केस में जस्टिस एस मुरलीधर ने अंतरिम राहत दे दी थी। इसके तुरंत बाद संघ समर्थक एस गुरुमूर्ति ने ट्वीट कर पूछा कि क्या जस्टिस मुरलीधर कभी सीनियर एडवोकेट पी चिदंबरम के जूनियर रहे थे। ट्वीट के बाद बवाल मच गया। दिल्ली बार एसोसिएशन ने उनकी इस हरकत पर तीखी आपत्ति जताकर अवमानना का केस भी दायर कर दिया।

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जस्टिस मुरलीधर ने सफाई में कहा था- उनका चिदंबरम से कोई संबंध नहीं

हालांकि जस्टिस एस मुरलीधर ने इसके तुरंत बाद दिए गए अपने जवाब में कहा था कि वो कभी भी पी चिदंबरम के साथ काम नहीं करते थे। उनके साथ उनका कोई संबंध नहीं है। मामले ने तूल पकड़ा तो संघ समर्थक एस गुरुमूर्ति ने अपने कदम पीछे करते हुए माफीनामा भी हाईकोर्ट भेज दिया।

वकील बोले- एक बार माफी मांग ली थी, दोबारा नहीं मांगेंगे, मुकदमा लड़ेंगे

संघ समर्थक एस गुरुमूर्ति की तरफ से आज हाईकोर्ट में पेश हुए एडवोकेट महेश जेठमलानी ने अदालत से कहा कि उनके मुवक्किल ने अपनी ट्वीट के लिए बिना किसी शर्त के माफी पहले ही मांग ली थी। अब वो दोबारा ऐसा नहीं करने जा रहे हैं। उनका कहना था कि मेरिट के आधार पर उनके केस की सुनवाई की जाए।

जस्टिस तलवंत सिंह का कहना था कि उनका पहले का हलफनामा पर्याप्त नहीं था। गुरुमूर्ति को फिर से एफिडेविट देकर बगैर किसी शर्त के कोर्ट से माफी मांगनी होगी। आप केवल दो लाईन का हलफनामा भी दायर कर सकते हैं। लेकिन जेठमलानी नहीं माने। उन्होंने हाईकोर्ट से दरखास्त की कि वो मेरिट के आधार पर मामले की सुनवाई करे। उन्हें और उनके मुवक्किल गुरुमूर्ति अपना पक्ष मजबूती से सामने रखेंगे।

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