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रविवारी जीवन शैली: सकारात्मक सोचें, तन-मन से स्वस्थ रहें

एक अध्ययन में यह तथ्य उजागर हुआ कि नकारात्मक सोच शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली यानी इम्युनिटी में बदलाव लाती है और ऊतकों को शिथिल करती है, जबकि सकारात्मक सोच इम्युनिटी को मजबूत करती है।
Written by: जनसत्ता | Edited By: Bishwa Nath Jha
नई दिल्ली | Updated: February 11, 2024 12:36 IST
रविवारी जीवन शैली  सकारात्मक सोचें  तन मन से स्वस्थ रहें
प्रतीकात्मक तस्वीर। फोटो -(फ्रीपिक)।
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खुश रहना और सकारात्मक सोचना न सिर्फ अपनी सेहत को दुरुस्त रखने का एक अच्छा जरिया है, बल्कि इससे आसपास के वातावरण में भी ऊर्जा घुलती है। दरअसल, नकारात्मक विचारों का चक्र हमें मन और शरीर से बीमार कर सकता है, इसलिए इसके संजाल से बाहर आना और सकारात्मक बातों को अपने जीवन का हिस्सा बनाना हमारी मानसिक-शारीरिक सेहत के लिए जरूरी कारक है।

चुनौतियों का सामना

चुनौतियों का सामना करना जीवन की मुश्किलों को दूर करने का सबसे बेहतरीन जरिया होता है। इसमें सबसे ज्यादा सहायक साबित होता है सकारात्मक दृष्टिकोण। इस तरह से सोचने-समझने के तरीके से लैस व्यक्ति नकारात्मकता के बजाय आसपास होने वाली घटनाओं के सकारात्मक पहलुओं से अपने जीवन को समृद्ध करता है।

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लंबे सुखी जीवन की सोच

उम्मीद तो वैसे भी जीवन को नई राह दिखा जाती है या नई राह निकाल लाती है। अध्ययनों में भी यह साबित हो चुका है कि जो लोग नकारात्मकता से दूर रहते हैं, सकारात्मक पहलू से किसी समस्या पर विचार करते हैं, वे लंबी उम्र जीते हैं। वे जोखिम से लड़ने और उससे निकलने के रास्ते आसानी से बना लेते हैं। इस तरह की सोच से शरीर में रोग प्रतिरोधक प्रणाली भी मजबूत होती है और मौसमी से लेकर कई तरह की बीमारियों से लड़ने में काफी मदद मिलती है।

उम्मीदों की राह

एक अध्ययन में यह तथ्य उजागर हुआ कि नकारात्मक सोच शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली यानी इम्युनिटी में बदलाव लाती है और ऊतकों को शिथिल करती है, जबकि सकारात्मक सोच इम्युनिटी को मजबूत करती है। इससे रक्तचाप भी सामान्य होता है। इससे बचने के लिए सकारात्मकता और उम्मीद एक बड़ा सहायक तत्त्व है, क्योंकि ऐसे लोग अव्वल तो बहुत कम तनाव को अपने पास फटकने देते हैं। अगर कभी किसी परिस्थिति में वे तनाव से घिरते भी हैं तो उससे आसानी से बाहर निकल आते हैं।

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कुछ आसान रास्ते

कहा जाता है कि इंसान अपनी समस्याओं का समाधान खुद बेहतर निकाल सकता है। खासतौर पर जीवनशैली से जुड़ी परिस्थितियों को बदलने का सबसे कारगर वाहक वह खुद होता है। इस क्रम में जब भी कोई विचार के लायक मुश्किल पैदा हो, अकेलापन महसूस हो, तो सबसे अच्छा और आसान रास्ता डायरी के पन्नों पर अपने अनुभवों को दर्ज करना, जटिल हालात में भी मुस्कुराते हुए विचार करना तनाव को दूर करने का बेहतर उपाय होता है।

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इससे अपने भीतर के गुबार बाहर निकल आते हैं और मुश्किल में नया रास्ता सूझता है। अपनी क्षमताओं का स्वीकार और अपने कौशल में इजाफा करना जीवन में सकारात्मक मूल्यों को मजबूत करता है और आखिरकार यह जीवन को भावनात्मक और वैचारिक स्तर पर समृद्ध करता है। इसका सीधा असर रोजमर्रा से लेकर दीर्घकालिक स्तर पर जीवन के बारे में लिए जाने वाले फैसलों पर पड़ता है।

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