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रविवारी जीवन शैली: आनंद की चाह, घुमक्कड़ी की राह

पर्यटन का ऐतिहासिक महत्त्व है। मगर इसके विकास और विस्तार ने जितनी बड़ी तादाद में लोगों को आकर्षित किया है, उसकी वजह से बहुत सारी जगहों पर पर्यटन अब एक उद्योग के रूप में विकसित हो चुका है।
Written by: जनसत्ता | Edited By: Bishwa Nath Jha
Updated: March 10, 2024 13:48 IST
रविवारी जीवन शैली  आनंद की चाह  घुमक्कड़ी की राह
प्रतीकात्मक तस्वीर। फोटो -सोशल मीडिया)।
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यह सदियों से एक स्थापित सत्य रहा है कि पर्यटन जीवन शैली के हिस्से के तौर पर अनुभव और ज्ञान के दायरे का विस्तार करता है। बल्कि जीवन का वास्तविक सुख पर्यटन के आनंद में होता है, अगर इसे सही तरीके से खोजा जाए। शहरों-महानगरों में रहने वाले लोग पर्यटन को शौक और वक्ती जरूरत के तौर पर देखते हैं, कुछ पलों की राहत का रास्ता मानते हैं।

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इसलिए वे शहरों की सड़कों की भीड़ से बचने के लिए कुछ दिनों के लिए प्राकृतिक सौंदर्य स्थलों की ओर निकल जाते हैं। यह बेवजह नहीं है कि भारत में हिमाचल प्रदेश या उत्तराखंड के सुंदर इलाकों में साल के कई महीने भीड़ रहती है।

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घुमक्कड़ी के फायदे

इसके लाभ को वही महसूस कर पाता है, जो घर की चारदीवारियों से निकल कर कहीं घूमने निकल जाता है। घूमने का मतलब केवल यह नहीं है कि ज्ञान या आनंद के लिए घूमा जाए। बल्कि सिर्फ घूमने के लिए भी घूमा जा सकता है। इसका अपना सुख है। यों घुमक्कड़ी की राह में जितना ज्यादा वक्त रहा जाए, उतना ज्यादा लाभ मिलता है, मगर यह सबके लिए शायद व्यावहारिक नहीं है, इसलिए आप अपने मुताबिक, जितना वक्त मिल सके, इसका लाभ उठा सकते हैं।

अनुभव और ज्ञान

हम जिस समाज में रहते हैं, उसमें ज्ञान के बारे में आम धारणा यही है कि इसे हासिल करने का जरिया किताबें हैं। अपने बंधे-बंधाए दायरे से निकल कर कहीं भी घूमने निकल जाया जाए तब कुछ वक्त के बाद पता चलता है कि ज्ञान हमारे आसपास भी बिखरा होता है, बस हमें उन्हें चुनते हुए अपने विवेक की दुनिया को समृद्ध करना होता है। पर्यटन इसमें एक सबसे मददगार कारक की भूमिका निभाता है।

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हम घर से निकल कर जहां-जहां या देश-विदेश जाते हैं, उन सभी जगहों के खानपान, रहन-सहन और सभ्यता संस्कृति से रूबरू होते हैं। सबसे अहम कि कुछ जगहों और संस्कृतियों को लेकर हमारे भीतर बैठी धारणाएं टूटती हैं और हम नए सच से साक्षात्कार करते हैं। हमें इस विश्वास का साथ मिलता है कि दुनिया भर में मनुष्य का जीवन कमोबेश एक ही है।

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पर्यटन का अर्थ

यों पर्यटन का महत्त्व ऐतिहासिक रूप से एक साबित तथ्य रहा है। मगर इसके विकास और विस्तार ने जितनी बड़ी तादाद में लोगों को आकर्षित किया है, उसकी वजह से बहुत सारी जगहों पर पर्यटन अब एक उद्योग के रूप में विकसित हो चुका है। भारत में हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड जैसे राज्यों की अर्थव्यवस्था ही पर्यटन के बूते चलती है।

वहां देश के अलग-अलग इलाकों सहित दुनिया भर से पर्यटक आते हैं और उसी के बूते वहां के स्थानीय निवासी अपना जीवन चलाते हैं। जाहिर है, अगर आप एक पर्यटक हैं तो कई जगह पर लोगों की आजीविका के साधन भी हैं और खुद को भी कई स्तर पर समृद्ध करते हैं।

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