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रविवारी रसोई: सात्विक, स्वादिष्ट, सुपाच्य भोजन सेहत के लिए है बेजोड़

मोठ सबसे सुपाच्य दाल है इसे सुबह के नाश्ते या रात के भोजन के तौर पर इसे चाट के रूप में खाएं, तो पूरी ऊर्जा देता है, दूसरी कई दालों की तरह यह बादी भी नहीं होता, यानी गैस नहीं बनाता।
Written by: जनसत्ता | Edited By: Bishwa Nath Jha
नई दिल्ली | Updated: February 18, 2024 13:31 IST
रविवारी रसोई  सात्विक  स्वादिष्ट  सुपाच्य भोजन सेहत के लिए है बेजोड़
प्रतीकात्मक तस्वीर। फोटो -(इंडियन एक्सप्रेस)।
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दाल सीताफल

बहुत जगहों पर शादी-विवाह, भंडारे आदि में भी सीताफल की सब्जी अवश्य परोसी जाती है। पूरी के साथ इसकी खट्टी-मीठी सब्जी का मेल बेजोड़ होता है। मगर कभी बिना छिलके वाली मसूर दाल के साथ इसे बना कर खाएं, अलग ही स्वाद के आनंद से भर उठेंगे। इसे बनाने में भी इतना कम समय लगता है कि झट-पट बनाया जा सकता है।

सामग्री

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हरा सीताफल: आधा किलो, बिना छिलके वाली मसूर दाल: आधा कटोरी या अंदाजन सौ ग्राम, दो से तीन हरी मिर्च, हरा धनिया, तड़के के लिए: एक-एक चुटकी जीरा, राई, सौंफ, अजवायन और साबुत धनिया, मसाला: सब्जी मसाला, लाल मिर्च पाउडर।

विधि

हल्के हाथों से सीताफल का छिलका उतार कर उसका बीज वाला हिस्सा हटा दें और तीन से चार इंच के छोटे टुकड़ों में काट लें। इसे अच्छी तरह धोकर अलग रख दें। दाल को धोकर पंद्रह से बीस मिनट के लिए भिगो दें।

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अब कुकर में एक चम्मच घी गरम करें। उसमें तड़के की सामग्री डालें। तड़का चटक जाए, तो उसमें कटा हुआ सीताफल छौंक दे आंच मध्यम कर दें और एक बार चलाने के बाद ढक्कन से ढक दें। ढक्कन बंद नहीं करना है, बस ऊपर रख देना है, ताकि सीताफल थोड़ा नरम हो जाए। करीब पांच मिनट पकने के बाद उसमें भिगोई हुई दाल और आधा कटोरी पानी डालें। नमक और एक छोटा चम्मच सब्जी मसाला या सिर्फ धनिया पाउडर और आधा चम्मच लाल मिर्च पाउडर डालें। एक बार चलाएं और कुकर का ढक्कन लगा दें।

तब तक सजाने के लिए मिर्च को बीच से फाड़ कर बीज झाड़ कर अलग करें और छोटे टुकड़ों में काट लें। धनिया को भी साफ करके धोएं और बारीक काट लें। कुकर में दो सीटी आने के बाद बंद कर दें। भाप पूरी तरह निकल जाने का इंतजार करें। अब ऊपर से हरी मिर्च और धनिया पत्ता डाल कर परोसें।

मोठ मूंगफली चाट

मोठ सबसे सुपाच्य दाल है। इसे सुबह के नाश्ते या रात के भोजन के तौर पर इसे चाट के रूप में खाएं, तो पूरी ऊर्जा देता है, दूसरी कई दालों की तरह यह बादी भी नहीं होता, यानी गैस नहीं बनाता। प्रोटीन तो भरपूर मिलता ही है। इसी तरह कच्ची मूंगफली को अगर भिगो और उबाल कर खाएं तो भूनी और तली मूंगफली की अपेक्षा अधिक गुणकारी होती है। स्वाद भी अलग होता है। इसलिए दोनों को मिला कर अगर चाट बनाएं, तो इसकी पौष्टिकता बढ़ जाती है। इसे बनाने में समय भी बहुत नहीं लगता, न इसके लिए कोई विशेष तैयारी करने की जरूरत होती है।

सामग्री

मोठ दाल: आधा कटोरी, कच्ची मूंगफली: चौथाई कटोरी, खीरा: एक, चाट मसाला: एक चम्मच, हरी मिर्च- दो, धनिया पत्ता।

विधि

मोठ दाल और मूंगफली को अच्छी तरह धोकर भिगो दें। आठ से दस घंटे भिगोने के बाद इसका पानी निथारें और एक-दो बार और धो लें। अगर अंकुरित करना चाहें, तो किसी कपड़े में लपेट कर या किसी बरतन में ढंक कर बारह-चौदह घंटे के लिए रख दें। इस तरह इसके गुण और प्रकट रूप में प्राप्त होंगे।

चाट बनाने के लिए मोठ और मूंगफली को एक कुकर में डाल कर चौथाई कटोरी पानी, थोड़ा नमक और एक पुड़िया ईनो डाल कर दो सीटी आने तक उबाल लें। भाप शांत होने तक कुकर का ढक्कन बंद रहने दें। इस तरह मोठ और मूंगफली नरम हो जाएगी। पानी भी पूरी तरह जज्ब हो जाएगा।

अब उबली हुई मोठ और मूंगफली में ऊपर चाट मसाला, हरी मिर्च, बारीक कटा खीरा और धनिया डालें, मिलाएं और परोसें। चूंकि हम सात्विक तरीके से चाट बना रहे हैं, इसलिए इसमें प्याज-टमाटर डालने की जरूरत नहीं। अगर चाहें, तो ऊपर से थोड़ा बेसन भुजिया या कार्न फ्लैक्स डाल सकते हैं।

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