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रविवारी रसोई: सर्दियों में गाजर का हलवा और गुड़ की बनी चीजें खाएं, गुण गाएं

गाजर एक मौसमी घटक है, यह सर्दियों की प्रतिरक्षा के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है । इसमें विटामिन सी काफी मात्रा में होता है, जो बीमारी से सुरक्षा प्रदान कर सकता है।
Written by: जनसत्ता | Edited By: Bishwa Nath Jha
नई दिल्ली | Updated: January 07, 2024 13:44 IST
रविवारी रसोई  सर्दियों में गाजर का हलवा और गुड़ की बनी चीजें खाएं  गुण गाएं
प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर। फोटो- (इंडियन एक्‍सप्रेस)।
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गुड़ का हलवा

सर्दियों में गाजर का हलवा बहुत खाया जाता है। इसी तरह गुड़ का हलवा एक स्वादिष्ट और लाभदायक मिठाई है। इसे आसानी से घर पर बनाया जा सकता है। यह एक विशेष अमृतसरी व्यंजन है। इसे सूजी, गुड़ का बूरा, सौंफ, मक्खन, केसर, बादाम, काजू, किशमिश और दूध जैसी सरल रसोई-अनुकूल सामग्री का उपयोग करके बनाया जाता है।

सामग्री

1 कप सूजी,1/4 चम्मच सौंफ के बीज, 2 चम्मच बादाम, 2 चम्मच किशमिश, 2 कप पानी, 1/2 कप पिसा हुआ गुड़, 5 रेशा केसर, 2चम्मच काजू
1/4 कप दूध, 2 1/2 चम्मच घी।

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विधि

चरण 1- सूजी को घी में भूनने के लिए एक बर्तन लें और उसे मध्यम आंच पर रखें। पैन में घी डालकर पिघला लें। इसमें सौंफ डालकर चटकने तक पकाएं। अब पैन में सूजी डालें। भूरा होने तक भून लें। आंच धीमी रखें नहीं तो सूजी जल जाएगी।

चरण 2- गुड़ की चाशनी तैयार करने के लिए दूसरा बर्तन लें और उसमें मध्यम आंच पर पानी गर्म करें। एक उबाल आने पर इसमें गुड़ डालें। घुलने दें। आंच धीमी रखें। पानी-गुड़ के मिश्रण को गाढ़ा होने दें।

चरण 3- भुनी हुई सूजी को गुड़ की चाशनी के साथ पकाएं। अब इस गुड़-पानी की चाशनी को सूजी में मिला दें। धीमी आंच पर दो-तीन मिनट तक पकाएं। फिर दूध और केसर डालें। जब हलवा गाढ़ा होने लगे तो इसमें सूखे मेवे डालें और दो मिनट तक पकाएं। कटे हुए बादाम से सजाकर गरमागरम परोसें। एक बात का ध्यान रखें कि इस हलवे को पारंपरिक तरीके से बनाने के लिए सूजी भूनते समय पर्याप्त मात्रा में घी का इस्तेमाल करें।

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गुड़ की रोटी

गुड़ और आटे की रोटी एक अनोखा स्वाद देती है। सर्दियों में यह काफी लाभदायक मानी जाती है।

सामग्री और विधि

एक कटोरे में 1/2 कप गुड़ बूरा और 1/8 कप पानी (2 बड़े चम्मच) लें। गुड़ के बूरे की जगह आप कद्दूकस किया हुआ गुड़ भी इस्तेमाल कर सकते हैं। पानी में गुड़ अच्छी तरह मिलाएं और 30 से 45 मिनट या सारा गुड़ घुलने तक अलग रख दें। दूसरे कटोरे या बर्तन में 1 से 1.25 कप साबुत गेहूं का आटा लें। साथ ही 1 चम्मच सौंफ और 1 चम्मच घी भी डाल दें। 2 बड़े चम्मच में सूखा नारियल पाउडर भी मिला सकते हैं।

सबसे पहले गुड़ के घोल को हिलाएं और फिर चलनी से इसे सीधे आटे वाले बर्तन में छान लें। आटे में गुड़ का घोल मिलाएं। अब आटा गूंथना शुरू करें और चिकना आटा गूंथ लें। गुड़ होने से आटा थोड़ा चिपचिपा हो जाएगा। इसकी चिपचिपाहट पकी हुई चीनी या गुड़ की चाशनी की चिपचिपाहट के बराबर है। अगर आटा गीला लग रहा है तो आप थोड़ा सा गेहूं का आटा और मिला कर गूथ सकते हैं। गूंथते समय बिल्कुल भी पानी न डालें।
आटे से एक मध्यम आकार की लोई लें और इसे जिप लाक बैग में बेलन की सहायता से छोटी रोटी के आकार में बेल लें। बस रोटी भरवां परांठे से थोड़ी मोटी होनी चाहिए।

अब रोटी को धीरे से निकालें और गर्म तवे पर रखें। आंच धीमी या मध्यम रखें और गुड़ की रोटी को भूनना शुरू करें। जब एक तरफ से रंग हल्का भूरा हो जाए तो इसे धीरे से पलट दें। पलटी हुई गुड़ की रोटी के ऊपर से थोड़ा सा घी फैला दीजिए। ये मीठी रोटियां किसी भी चीज की तरह घी सोख लेती हैं। जब दूसरी तरफ भी रोटी भूरी हो जाए तो पलट दें। थोड़ा सा घी इस तरफ भी फैला दें। इसे दो बार पलटें। गुड़ की रोटी को चमचे से दबाएं। फिर इसे गरमागरम परोसें। ध्यान दें गुड़ की रोटी को सादे या ताजे दही या सफेद मक्खन के साथ परोसें। ये मीठी रोटी एक पेट भरने वाला भोजन है और इसे नाश्ते या शाम की चाय के समय मसाला चाय के साथ परोसा जा सकता है।

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