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रविवारी सेहत: उतरती और चढ़ती सर्दी में कभी न बरतें लापरवाही

उतरती और चढ़ती सर्दी में लापरवाही बरतने का मतलब बीमारियों को आमंत्रित करना होता है। इस मौसम में शरीर को ठंड लगने से बचाना जरूरी है।
Written by: जनसत्ता | Edited By: Bishwa Nath Jha
नई दिल्ली | Updated: February 18, 2024 10:43 IST
रविवारी सेहत  उतरती और चढ़ती सर्दी में कभी न बरतें लापरवाही
प्रतीकात्मक तस्वीर। फोटो -(फ्रीपिक)।
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जब कड़ाके की ठंड होती है, तब लगभग सभी लोग उससे बचने के लिए तमाम तरह के उपाय करते हैं, मगर फरवरी महीने में जैसे ही ठंड कम महसूस होने लगती है, लोग इसके प्रति थोड़े लापरवाह भी हो जाते हैं। जबकि यह मौसम के लिहाज से एक संवेदनशील वक्त होता है।
दरअसल, जाती सर्दी एक ऐसा दौर होता है, जब तापमान में होने वाला उतार-चढ़ाव शरीर में अनेक तरह के उथल-पुथल पैदा कर सकता है।

लोग सर्दी-जुकाम या बुखार की समस्या से घिर तो जाते हैं, मगर यह सोचना और ध्यान रखना जरूरी नहीं समझते हैं कि आखिर वे इस तरह की समस्या से घिरे क्यों! यही वजह है कि कड़ाके की ठंड के बाद तापमान में सहजता आने के साथ ही व्यक्ति का शरीर कई बार असंतुलित होकर किसी बीमारी की चपेट में आ जाता है। इसलिए ठंड कम होने पर राहत महसूस करने और खुश होने के साथ-साथ कई तरह की सावधानियां भी बरतने की जरूरत है, ताकि सेहत को दुरुस्त रखा जा सके।

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अनदेखी से बचें

मौसम के मुताबिक कुछ खाद्य पदार्थों को अपने रोजमर्रा के भोजन में शामिल करना चाहिए, ताकि शरीर अचानक मौसमी संक्रमण या अन्य दिक्कतों का सामना करने लिए तैयार हो सके। यों जाड़े के मौसम में आमतौर पर हमारी पाचन शक्ति अच्छी रहती है। ठंड में शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पंजीरी, सूखे मेवे या ड्राइ फ्रूट और बीजों को अपने आहार में शामिल कर लेना चाहिए। तिल के लड्डू और बर्फी को बनाकर सेवन करने से ठंड और इसके उतार-चढ़ाव का सामना करने में मदद मिलेगी। यों आहार में ज्यादा से ज्यादा सब्जी और फलों का उपयोग करना सेहत के लिए फायदेमंद है।

ताजा भोजन से दोस्ती

सर्दियों में वायु या वातरोग का जरिया बनने वाली चीजों का ज्यादा सेवन करना नुकसानदेह हो सकता है। इस दौरान बासी भोजन से बचने की जरूरत होती है। खाने को बार-बार गरम करने के बजाय ताजा बना कर खाना चाहिए। देर से रखा हुआ खाना न खाएं और राजमा, छोले जैसी देर से पचने वाली दालों से परहेज करना चाहिए। सांस और वायु संबंधित बीमारियों के मरीजों को इस मौसम में सावधानी बरतनी चाहिए।

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सर्दी से सतर्कता

उतरती और चढ़ती सर्दी में लापरवाही बरतने का मतलब बीमारियों को आमंत्रित करना होता है। इस मौसम में शरीर को ठंड लगने से बचाना जरूरी है। गर्म कपड़े पहनने और खुद को कई परतों वाले कपड़ों से ढक कर रखना चाहिए। इस मौसम में कभी गर्मी भी लगने लग सकती है, मगर अचानक ही ठंड भी लगने लगती है। यही वह सबसे संवेदनशील समय होता है, जब थोड़ी भी लापरवाही बीमार कर दे सकती है। ठहरी हुई कड़ाके की ठंड के मुकाबले आती और जाती सर्दी ज्यादा संवेदनशील होती है।

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आराम नहीं, व्यायाम

खानपान और रहन-सहन के समांतर ही शारीरिक गतिविधियां भी सर्दियों के मौसम में स्वस्थ रहने का सबसे जरूरी कारक हैं। यों किसी भी बीमारी से बचने के लिए किसी को भी एक आदत की तरह हर रोज व्यायाम जरूर करना चाहिए। हां, जरूरी नहीं है कि व्यायाम करने के लिए किसी पार्क में ही जाया जाए।

अगर कोहरा या ज्यादा प्रदूषण है, तो घर में खुली जगह या छत पर ही कुछ गतिविधियां कर ली जा सकती हैं। कोहरे में बाहर निकल कर रोग का जोखिम उठाने से बेहतर है कि घर में प्राणायाम या कुछ हल्के व्यायाम कर लिए जाएं। गले के संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए गुनगुना पानी पीने के अलावा हल्दी का सेवन भी किया जा सकता है।

(यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है। उपचार या स्वास्थ्य संबंधी सलाह के लिए विशेषज्ञ की मदद लें।)

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