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रविवारी विचार बोध: धीरज से बढ़कर संसार में कुछ भी नहीं

जब कोई खुद को किसी काम में फंसा हुआ पाता है तो उसके लिए उस चीज को उसी क्षण पूरा करना बेहद जरूरी बन जाता है। अगर उसे नहीं किया गया, तो उसके साथ क्या होगा, इसके बारे में सोचना अधीरता को बढ़ावा देता है।
Written by: जनसत्ता | Edited By: Bishwa Nath Jha
Updated: December 03, 2023 06:44 IST
रविवारी विचार बोध  धीरज से बढ़कर संसार में कुछ भी नहीं
प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर। फोटो- (इंडियन एक्‍सप्रेस)।
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जब कोई काम मन के मुताबिक न हो रहा हो, तब बेसब्री, बेचैनी या अधीरता महसूस होती है। अपनी इस अधीरता को नियंत्रित और बेअसर करने का तरीका हर किसी को जरूर आना चाहिए। इससे एक शांत, खुश और ज्यादा समझदार इनसान बनने में मदद मिलेगी। जब कोई खुद को किसी काम में फंसा हुआ पाता है तो उसके लिए उस चीज को उसी क्षण पूरा करना बेहद जरूरी बन जाता है।

अगर उसे नहीं किया गया, तो उसके साथ क्या होगा, इसके बारे में सोचना अधीरता को बढ़ावा देता है। इसके बजाय ऐसे व्यक्ति को खुद से पूछना चाहिए कि वह आखिर इतनी जल्दी में क्यों है। फिर भले ही काम जरा देरी से ही क्यों न हो, यह तभी पूरा होगा, जब सब कुछ सही रहेगा।

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अपनी कुछ कमियों को लेकर अपने साथ नरमी से पेश आना बेहद आवश्यक है। अगर कोई परेशान रहता है और इसके पीछे उसकी अधीरता की वजह है, तो उसे एक कदम पीछे खींच लेना चाहिए और इस बात को महसूस करना चाहिए कि अपने आप से बहुत कुछ करने की उम्मीद ही लगाई जा सकती है।

अच्छी बात है, अगर कोई खुद में सुधार करना चाहता है और कुछ नए कौशल सीखना चाहता है, लेकिन इसके लिए खुद को सिर्फ कोसता रहता है तो इससे उसका आत्मविश्वास डगमगा जाएगा। कायदे से व्यक्ति को अपनी कमियों का सामना करना चाहिए और देखना चाहिए कि वह किस तरह से उनसे निपट सकता है या फिर उन्हें सकारात्मकता में बदल सकता है।

एक बात याद रखें कि ज्यादातर चीजों को पूरा करने में वक्त और मेहनत की जरूरत होती है। अपने साथ धैर्य बनाए रखना, खुद के लिए एक शानदार तोहफा होता है।विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आप किसी चीज के प्रति अधीरता महसूस कर रहे हैं, तो इस विचार को छोड़ दें। इसके बजाय, इस समय जो कुछ भी सामने है, उसके लिए खुलापन रखेेंं। अपनी सांस को और अधिक शिथिल करें और अपने पैरों को जमीन पर लगाकर स्थिर रहें। फिर, अपने चिंता में डालने वाले विचारों को अपने शरीर के बाकी हिस्सों में लौटने दें।

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अगर आप अपनी परिस्थिति को बदल नहीं पा रहे हैं, तो आप अपने नजरिए को ही बदल डालें। आप अभी जिस भी जगह पर हैं, अपने आप से उसके बारे में कुछ सकारात्मक तलाशने के बारे में बोलें और फिर अपनी बेचैनी के ऊपर ध्यान लगाने के बजाय, उसी सकारात्मक चीज के ऊपर ध्यान लगाएं। यह पहली बार में शायद मुश्किल लग सकता है लेकिन आगे आपको बेहतर महसूस हो सकता है।

इस बात को स्वीकारें कि आपकी उम्मीदें शायद हमेशा पूरी न भी हों। ज्यादातर अधीरता अक्सर ही लोगों या परिस्थितियों के मुताबिक उम्मीद पूरी नहीं होने की वजह से जन्म लिया करती है। चीजों को एक सोचे-समझे तरीके में होता हुआ देखने की उम्मीद लगाने के बजाय, अपनी उम्मीदों को थोड़ा ढील दे दें और फिर आपके सामने आने वाले आश्चर्य के लिए तैयार रहें। इस बात को स्वीकार करें कि परिस्थिति कभी भी परिपूर्ण नहीं हो सकती है और जिंदगी के उतार-चढ़ाव को खुले दिल और पूरे मन के साथ स्वीकार करें।

लंबे इंतजार के कारण होने वाली अधीरता का सामना करने के लिए तैयार रहें

कई लोगों को उस वक्त अधीरता महसूस होती है, जब उन्हें काफी वक्त के लिए इंतजार करने के लिए मजबूर किया जाता है… जैसे कि रेस्तरां में या फिर क्लीनिक में। अगर आप इंतजार करते हुए, खुद को दूसरी गतिविधि से अपने को एकाग्रचित कर सकते हैं, तो आपके लिए धैर्य रख पाना ज्यादा आसान हो जाएगा।

उदाहरण के लिए, जब आपको लगे, कि आपको ज्यादा वक्त तक इंतजार करना पड़ सकता है तो आप अपने साथ में एक पुस्तक, क्रासवर्ड पजल या फिर एक गेम पैक कर सकते हैं। इंतजार करते वक्त दूसरे लोगों की बातचीत सुनें, या पत्रिकाएं या अखबार पढ़ें।

भरोसा रखें कि आपको हल मिल जाएगा

हर किसी की जिंदगी में ऐसी कुछ न कुछ परेशानियां आती ही हैं, जिनसे निपटना उन्हें नामुमकिन सा लगता है। ऐसे में अपने आत्मविश्वास को जगाना एक तरीका है। आपको यह महसूस कराने में मदद करेगा कि आप में क्षमता है और आप इन परेशानियों से निपटने के लिए कोई न कोई रास्ता जरूर खोज निकालेंगे, फिर भले इसकी वजह से आप कितना भी अधीर या उखड़ा हुआ क्यों न महसूस कर रहे हों। उदाहरण के लिए, आप शायद नौकरी के लिए आवेदन करते हैं। काम नहीं मिलने से आप चिढ़चिढ़े होते हैं तो ऐसे में आपको भरोसा और आशावाद बनाए रखना होगा।

अधीर होने के विचारों और शारीरिक प्रतिक्रियाओं को समझेंं

अगर आप किसी तनाव वाली स्थिति में हैं, तब आपके अधीर होने की तरफ इशारा करने वाले विचारों को लेकर सतर्क रहें, जैसे कि इसमें तो लगता है जिंदगी गुजर जाएगी, या यह इनसान कितना परेशान कर रहा है। जब आप इन अधीर विचारों को पकड़ लें, रुक जाएं और फिर एक बार अपने शरीर को जांचे कि आप शारीरिक तौर पर कैसा महसूस कर रहे हैं।

शायद आप अधीरता के लक्षणों को फौरन ही पहचान सकेंगे और उन्हें पहचानने से आपको चिड़चिड़ाहट रोकने में मदद मिल सकती है। ये कुछ लक्षण हो सकते हैं। 1-आपकी मांसपेशियों में खिंचाव 2-बेचैनी, पैरों या पंजों में थरथराहट 3-अपने हाथों को जकड़ना 4-सांस लेने में परेशानी 5-बढ़ी हुई हृदय गति 6-चिड़चिड़ापन या गुस्सा।

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