scorecardresearch
For the best experience, open
https://m.jansatta.com
on your mobile browser.

रविवारी सेहत: पैरों में सूजन गंभीर खतरा, कभी न करें नजरअंदाज

बीमारी कोई भी हो, उसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। यदि शरीर पर उभरने वाले लक्षणों को हम नजरअंदाज कर देते हैं, तो आंतरिक बीमारियां कभी-कभी बहुत गंभीर रूप ले लेती हैं।
Written by: जनसत्ता | Edited By: Bishwa Nath Jha
Updated: October 22, 2023 12:20 IST
रविवारी सेहत  पैरों में सूजन गंभीर खतरा  कभी न करें नजरअंदाज
प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर। फोटो- (इंडियन एक्‍सप्रेस)।
Advertisement

खतरे का संकेत

पैरों में सूजन आना शरीर में किसी बीमारी के उभरने का संकेत हो सकता है। इसे नजरअंदाज करना खतरे से खाली नहीं होता। कई बार लिवर एल्बुमिन नाम का प्रोटीन बनाना बंद कर देता है। यह वह प्रोटीन होता है जो रक्त वाहिकाओं खून का रिसना रोकता है। यदि रक्त रिसना शुरू हुआ तो पैरों में तरल पदार्थ इकठ्ठा हो जाता है और पैरों में सूजन आ जाती है।

Advertisement

इसी प्रकार शरीर के ऊपरी हिस्से में यदि तरल पदार्थ एकत्र होने लगता है तो समझ जाइए किडनी ढंग से काम नहीं कर रही है। इसका पता तब चलता है जब आदमी की सांस फूलने लगती है या बहुत कम पेशाब आता है और पैरों के साथ-साथ पूरे शरीर में सूजन बढ़ने लगती है।

Advertisement

कई बार पैर इसलिए भी सूज जाते हैं, क्योंकि हृदय का कोई हिस्सा या तो क्षतिग्रस्त हो गया हो या वह खून को अच्छी तरह संचरित नहीं कर पा रहा हो। लिम्फेटिक सिस्टम, टाक्सिंस व बैक्टेरिया आदि को हमारे शरीर से बाहर निकालने का काम करता है। यदि यह काम करना बंद कर दे, तो ये पदार्थ शरीर में ही एकत्र होने लगते हैं। इस वजह से वहां इंफेक्शन या सूजन होने लगती है। वैसे गर्भावस्था के दौरान ज्यादातर महिलाओं को पैरों में सूजन की शिकायत आम होती है।

कुछ को दवाओं के प्रतिकूल प्रभाव के कारण भी ऐसा हो सकता है। पैर या टखने में कोई भी आघात जैसे मोच, चोट, फोड़ा आदि के संक्रमण की वजह से भी पैर सूज सकते हैं। आमतौर पर ज्यादा देर तक खड़े रहने या पैदल चलने के कारण भी यह समस्या हो जाती है। लेकिन, पैरों में सूजन बिना किसी बाहरी कारण हो जाए तो यह गंभीर बीमारी हो सकती है।

रहें सतर्क

दर्द रहित सूजन आमतौर पर अपने आप ठीक हो जाती है, कुछ घरेलू उपचार सूजन को और जल्दी कम कर सकते हैं। इसके लिए दिन में 8 से 10 गिलास पानी पिएं। जूते और मोजे बदल दें। लगभग 15 से 20 मिनट के लिए नमक मिले पानी में पैरों को रखें। सोते समय पैरों को कुशन, तकिए पर ऊपर उठाएं। मैग्नीशियम, पोटेशियम व सोडियम से भरपूर खाद्य पदार्थ खाने से भी मदद मिल सकती है।

Advertisement

विशेष यह कि अपना वजन नियंत्रित करें। सूजे हुए पैरों की मालिश करने से आराम मिलता है। इसके बावजूद सूजन नहीं जा रही है तो यह किडनी से जुड़ी बीमारियों का संकेत हो सकता है। लगभग 30 फीसद किडनी के मरीज डाक्टर के पास तब जाते हैं, जब काफी देर हो चुकी होती है और उस समय इलाज के सिर्फ दो ही विकल्प बचते हैं, डायलिसिस और दूसरा, गुर्दा प्रत्यारोपण।

Advertisement

उपाय

चिकित्सीय जांच से ही यह पता चलता है कि पैरों और टखनों में सूजन क्यों आई है। इसके बाद ही इलाज शुरू किया जाता है। इसके लिए खून की जांच यानी सीबीसी सबसे आम जांच होती है। इसके अलावा डाक्टर छाती का एक्स-रे कराने की भी सलाह देते हैं। यदि सूजन जीवनशैली की आदत या मामूली चोट की वजह से आई है, तो डाक्टर घरेलू उपचार की सिफारिश करते हैं और यदि सूजन किसी आंतरिक स्वास्थ्य स्थिति के कारण आई तो उसी हिसाब से इलाज शुरू किया जाता है।

(यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है। उपचार या स्वास्थ्य संबंधी सलाह के लिए विशेषज्ञ की मदद लें।)

Advertisement
Tags :
Advertisement
Jansatta.com पर पढ़े ताज़ा एजुकेशन समाचार (Education News), लेटेस्ट हिंदी समाचार (Hindi News), बॉलीवुड, खेल, क्रिकेट, राजनीति, धर्म और शिक्षा से जुड़ी हर ख़बर। समय पर अपडेट और हिंदी ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए जनसत्ता की हिंदी समाचार ऐप डाउनलोड करके अपने समाचार अनुभव को बेहतर बनाएं ।
×
tlbr_img1 Shorts tlbr_img2 खेल tlbr_img3 LIVE TV tlbr_img4 फ़ोटो tlbr_img5 वीडियो