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रविवारी सेहत: मन का विकार मस्तिष्क को न होने दें बीमार, इन उपायों को अपनाकर रखें मन को स्वस्थ

यदि मानसिक स्वास्थ्य अच्छा है तो व्यक्ति तनाव को बेहतर तरीके से संभाल सकता है। शारीरिक रूप से भी स्वस्थ रह सकता है और सामाजिक तौर लोगों से बेहतर संबंध स्थापित कर सकता है।
Written by: न्यूज डेस्क
Updated: September 24, 2023 11:01 IST
रविवारी सेहत  मन का विकार मस्तिष्क को न होने दें बीमार  इन उपायों को अपनाकर रखें मन को स्वस्थ
दिमाग को कई तरीके अपनाकर तंदरुस्त रखा जा सकता है।
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मानसिक स्वास्थ्य का व्यक्ति की दिनचर्या पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। मस्तिष्क यदि किसी परेशानी में घिरा है तो व्यक्ति दिनभर चिड़चिड़ा रहता है और कोई भी काम सही तरीके से अंजाम नहीं दे पाता। ऐसे में मानसिक समस्याओं से बचाव करना किसी के लिए भी बहुत जरूरी है।

इसके लिए सबसे पहले यह समझना होगा कि मानसिक स्वास्थ्य आखिर है क्या। किसी भी व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य का संबंध उसकी भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक स्थिति से जुड़ा मामला होता है। इसी से सोचने, समझने, महसूस करने और कोई कार्य करने की क्षमता प्रभावित होती है।

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दिमागी सेहत का असर किसी भी आदमी के लिए तनाव से लड़ने और जीवन से जुड़े जरूरी विकल्प का चयन करने पर भी पड़ सकता है। किसी भी व्यक्ति को अपने मानसिक स्वास्थ्य पर अतिरिक्त ध्यान देना चाहिए, क्योंकि इसके बिना जीवन के सभी कार्य प्रभावित होते हैं। यदि मानसिक स्वास्थ्य अच्छा है तो व्यक्ति तनाव को बेहतर तरीके से संभाल सकता है। शारीरिक रूप से भी स्वस्थ रह सकता है और सामाजिक तौर लोगों से बेहतर संबंध स्थापित कर सकता है।

विकार के प्रकार

चिंता : मानसिक विकार का कारण चिंता भी होती है। ऐसे व्यक्त को वास्तविक या काल्पनिक स्थितियों में अत्यधिक चिंता या भय का सामना करना पड़ सकता है।

अवसाद : इसमें व्यक्ति को क्रोध, निराशा, अत्यधिक तनाव की समस्या होती है।

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बाइपोलर डिसआर्डर : इस समस्या से जूझ रहे व्यक्ति को असामान्य रूप से अपनी भावनाओं को प्रकट करना और अवसाद जैसी शिकायत होती है।
असामान्य खान-पान: यह विकार भोजन से जुड़ा होता है। इससे जूझ रहा व्यक्ति बहुत कम खाना खाता है या फिर जरूरत से ज्यादा खाने लगता है।

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सिजोफ्रेनिया और सायकोटिक : यह बहुत ही गंभीर मानसिक रोग है। इसमें लोग ऐसी चीजों पर विश्वास करने लगते हैं, जो वास्तविक जीवन में होती ही नहीं हैं।

नशा: इस समस्या से जूझ रहे व्यक्ति को शराब या नशीले पदार्थों की लत लग सकती है।

व्यक्तित्व: इस स्थिति में व्यक्ति का व्यवहार पूरी तरह बदल जाता है। इससे व्यक्ति के सोचने-समझने, खाने-पीने और सोने के समय में भी बदलाव होता है, जिसका असर व्यक्ति के रिश्तों पर भी पड़ सकता है।

लक्षण

मानसिक विकारों के लक्षण यूं ही परिलक्षित नहीं होते। लंबे समय तक व्यवहार या आदतों की अनदेखी इसका प्रमुख कारण होती है।आदमी की खाने या सोने की आदतों में बदलाव, करीबी लोगों से दूरी बनाना या पसंदीदा गतिविधियां न करना, लगातार सुस्त रहना, शरीर में सुन्न महसूस करना जैसे उसके लिए किसी चीज का कोई महत्त्व ही न हो, असहाय या निराश महसूस करना, चीजों को भूलना और गुस्सा आना, चिंतित रहना ऐसे कारक हैं, जिनसे स्पष्ट पता चलता है कि व्यक्ति मानसिक विकार से जूझ रहा है।

कारण

मानसिक बीमारी के कोई स्पष्ट कारण तो नहीं होते हैं, लेकिन कुछ ऐसी घटनाएं, शारीरिक-सामाजिक बदलाव होते हैं, जिनसे मानसिक विकार उभरते हैं। जैसे परिवार में पहले किसी को मानसिक समस्या होना, तनाव और बचपन में हुए दुर्व्यवहार का दिमाग पर असर पड़ना, मस्तिष्क में चोट लगना। गर्भावस्था के दौरान विषाणु के संपर्क में आना, शराब और नशीली दवाओं का उपयोग या गंभीर बीमारी से मानसिक रोग हो जाते हैं।

उपचार

दिमाग को कई तरीके अपनाकर तंदरुस्त रखा जा सकता है। जैसे नियमित व्यायाम इसमें सबसे अधिक लाभकारी होता है। व्यायाम के दौरान कोई भी शारीरिक गतिविधि तनाव, अवसाद, चिंता को कम करने में मददगार होती है। ध्यान भी अवसाद या मानसिक विकार से लड़ने में मददगार होता है। यह मन को शांत करने में सबसे अधिक कारगर होता है। बागवानी करना, लिखना-पढ़ना और लोगों से बातचीत करना भी इस बीमारी में अच्छा रहता है। इसके अलावा अपने खानपान को बेहतर करना भी बहुत जरूरी होता है।

(यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है। उपचार या स्वास्थ्य संबंधी सलाह के लिए विशेषज्ञ की मदद लें।)

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