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Som Pradosh Vrat 2024: धन- समृद्धि के लिए प्रदोष व्रत पर करें इस स्त्रोत का पाठ, भोलेनाथ होंगे प्रसन्न, जय देव जगन्नाथ जय शंकर शाश्वत...

वैदिक ज्योतिष अनुसार प्रदोष व्रत के दौरान इस स्त्रोत का पाठ करने से धन- समृद्धि प्राप्ति होती है...
Written by: Astro Aditya Gaur
नई दिल्ली | May 16, 2024 17:11 IST
som pradosh vrat 2024  धन  समृद्धि के लिए प्रदोष व्रत पर करें इस स्त्रोत का पाठ  भोलेनाथ होंगे प्रसन्न  जय देव जगन्नाथ जय शंकर शाश्वत
प्रदोष व्रत भगवान शंकर को अति प्रिय है-
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Pradosh Vrat 2024: प्रदोष व्रत का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। वहीं प्रदोष व्रत एक महीने में 2 बार आता है। यह व्रत त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति पूरी श्रद्धा से व्रत रखकर भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा- अर्चना करता है। तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। वहीं आपको बता दें कि साल का पहला  सोम प्रदोष व्रत 20 मई, 2024 दिन सोमवार को रखा जाएगा। सोमवार को पड़ने की वजह से इसे सोम प्रदोष के नाम से जाना जाता है। वहीं हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसे स्त्रोत के बारे में जिसका पाठ करने से भगवान शिव प्रसन्न हो सकते हैं और आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती है। आइए जानते हैं ये स्त्रोत कौन सा है…

शिव प्रदोष स्तोत्र

जय देव जगन्नाथ जय शंकर शाश्वत ।

जय सर्वसुराध्यक्ष जय सर्वसुरार्चित ।।

जय सर्वगुणातीत जय सर्ववरप्रद ।

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जय नित्यनिराधार जय विश्वम्भराव्यय ।।

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जय विश्वैकवन्द्येश जय नागेन्द्रभूषण ।

जय गौरीपते शम्भो जय चन्द्रार्धशेखर ।।

जय कोट्यर्कसंकाश जयानन्तगुणाश्रय ।

जय भद्र विरुपाक्ष जयाचिन्त्य निरंजन ।।

जय नाथ कृपासिन्धो जय भक्तार्तिभंजन ।

जय दुस्तरसंसारसागरोत्तारण प्रभो ।।

प्रसीद मे महादेव संसारार्तस्य खिद्यत: ।

सर्वपापक्षयं कृत्वा रक्ष मां परमेश्वर ।।

महादारिद्रयमग्नस्य महापापहतस्य च ।

महाशोकनिविष्टस्य महारोगातुरस्य च ।।

ऋणभारपरीतस्य दह्यमानस्य कर्मभि: ।

ग्रहै: प्रपीड्यमानस्य प्रसीद मम शंकर ।।

दरिद्र: प्रार्थयेद् देवं प्रदोषे गिरिजापतिम् ।

अर्थाढ्यो वाऽथ राजा वा प्रार्थयेद् देवमीश्वरम् ।।

दीर्घमायु: सदारोग्यं कोशवृद्धिर्बलोन्नति: ।

ममस्तु नित्यमानन्द: प्रसादात्तव शंकर ।।

शत्रव: संक्षयं यान्तु प्रसीदन्तु मम प्रजा: ।

नश्यन्तु दस्यवो राष्ट्रे जना: सन्तु निरापद: ।।

दुर्भिक्षमारिसंतापा: शमं यान्तु महीतले ।

सर्वसस्यसमृद्धिश्च भूयात् सुखमया दिश: ।।

एवमाराधयेद् देवं पूजान्ते गिरिजापतिम् ।

ब्राह्मणान् भोजयेत् पश्चाद् दक्षिणाभिश्च पूजयेत् ।।

सर्वपापक्षयकरी सर्वरोगनिवारिणी ।

शिवपूजा मयाख्याता सर्वाभीष्टफलप्रदा ।।

भगवान शिव की आरती

जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव…॥

एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव…॥

दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव…॥

अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव…॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव…॥

कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव…॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव…॥

काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव…॥

त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव…॥

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