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Sita Navami 2024: सीता नवमी पर करें इस स्त्रोत का पाठ, मां जानकी का मिलेगा आशीर्वाद, धन- समृद्धि की होगी प्राप्ति

Sita Navami 2024: हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को सीता नवमी मनाई जाती है। जो इस साल 16 मई को पड़ रही है...
Written by: Astro Aditya Gaur
नई दिल्ली | May 15, 2024 14:06 IST
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सीता नवमी के दिन इस स्तोत्र का पाठ करके माता सीता की कृपा के पात्र बन सकते हैं-
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Sita Navami 2024 Date: शास्त्रों में सीता नवमी का विशेष महत्व है। सीता नवमी हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को सीता नवमी मनाई जाती है। यह दिन मां सीता का समर्पित होता है और इस दिन श्रीराम की पत्नि माता सीता का प्राकट्योत्सव मनाया जाता है। इस साल सीता नवमी 16 मई को मनाई जाएगी। वहीं इस दिन मां सीता की आराधना करने से सुख- समृद्धि की प्राप्ति होती है। वहीं हम आपको ऐसे स्त्रोत के बारे में बताने जा रहे हैं। जिसका इस दिन पाठ करने से मां जानकी की कृपा आपको प्राप्त होगी। साथ ही सभी मनोरथ पूर्ण होंगे। आइए जानते हैं इस स्त्रोत के बारे में…

सीता नवमी का शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार वैशाख माह में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि की शुरुआत 16 मई 2024 को सुबह 04 बजकर 51 मिनट पर हो रही है। साथ ही इस तिथि का समापन 17 मई को सुबह 07 बजकर 19 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि को आधार मानते हुए सीता नवमी 16 मई गुरुवार के दिन मनाई जाएगी। वहीं सीता नवमी शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 07 मिनट से शुरू होकर दोपहर 01 बजकर 22 मिनट तक रहेगा।

जानकी स्तोत्र (Janki Stotra)

नीलनीरज-दलायतेक्षणां लक्ष्मणाग्रज-भुजावलम्बिनीम्।

शुद्धिमिद्धदहने प्रदित्सतीं भावये मनसि रामवल्लभाम्।

रामपाद-विनिवेशितेक्षणामङ्ग-कान्तिपरिभूत-हाटकाम्।

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ताटकारि-परुषोक्ति-विक्लवां भावये मनसि रामवल्लभाम्।।

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कुन्तलाकुल-कपोलमाननं, राहुवक्त्रग-सुधाकरद्युतिम्।

वाससा पिदधतीं हियाकुलां भावये मनसि रामवल्लभाम्।।

कायवाङ्मनसगं यदि व्यधां स्वप्नजागृतिषु राघवेतरम्।

तद्दहाङ्गमिति पावकं यतीं भावये मनसि रामवल्लभाम्।।

इन्द्ररुद्र-धनदाम्बुपालकै: सद्विमान-गणमास्थितैर्दिवि।

पुष्पवर्ष-मनुसंस्तुताङ्घ्रिकां भावये मनसि रामवल्लभाम्।।

संचयैर्दिविषदां विमानगैर्विस्मयाकुल-मनोऽभिवीक्षिताम्।

तेजसा पिदधतीं सदा दिशो भावये मनसि रामवल्लभाम्।।

।।इति जानकीस्तोत्रं सम्पूर्णम्।।

श्री जानकी स्तुति: (Janki Stuti)

जानकि त्वां नमस्यामि सर्वपापप्रणाशिनीम्।

जानकि त्वां नमस्यामि सर्वपापप्रणाशिनीम्।।1।।

दारिद्र्यरणसंहर्त्रीं भक्तानाभिष्टदायिनीम्।

विदेहराजतनयां राघवानन्दकारिणीम्।।2।।

भूमेर्दुहितरं विद्यां नमामि प्रकृतिं शिवाम्।

पौलस्त्यैश्वर्यसंहत्रीं भक्ताभीष्टां सरस्वतीम्।।3।।

पतिव्रताधुरीणां त्वां नमामि जनकात्मजाम्।

अनुग्रहपरामृद्धिमनघां हरिवल्लभाम्।।4।।

आत्मविद्यां त्रयीरूपामुमारूपां नमाम्यहम्।

प्रसादाभिमुखीं लक्ष्मीं क्षीराब्धितनयां शुभाम्।।5।।

नमामि चन्द्रभगिनीं सीतां सर्वाङ्गसुन्दरीम्।

नमामि धर्मनिलयां करुणां वेदमातरम्।।6।।

पद्मालयां पद्महस्तां विष्णुवक्ष:स्थलालयाम्।

नमामि चन्द्रनिलयां सीतां चन्द्रनिभाननाम्।।7।।

आह्लादरूपिणीं सिद्धिं शिवां शिवकरीं सतीम्।

नमामि विश्वजननीं रामचन्द्रेष्टवल्लभाम्।

सीतां सर्वानवद्याङ्गीं भजामि सततं हृदा।।8।।

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