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Sheetala Ashtami 2024: रोगों से मुक्ति और सुख- समृद्धि के लिए शीतला अष्टमी के दिन करें माता शीतला की आरती

Sheetala Mata Ki Aarti Lyrics: चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को शीतलाष्टमी के रूप में मनाते हैं। इस दिन शीतला मां की विशेष पूजा की जाती है।
Written by: Astro Aditya Gaur
नई दिल्ली | Updated: April 02, 2024 12:25 IST
sheetala ashtami 2024  रोगों से मुक्ति और सुख  समृद्धि के लिए शीतला अष्टमी के दिन करें माता शीतला की आरती
Sheetala Mata Ki Aarti Lyrics: चैत्र शुक्लपक्ष की अष्टमी को शीतला अष्टमी मनाई जाती है-
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Sheetala Ashtami 2024 Puja Mantra, Aarti Lyrics in Hindi: शास्त्रों में शीतला माता का विशेष महत्व है। मान्यता है जो भी शीतला अष्टमी का पूजन करता है उसे रोगों के संक्रमण से मुक्ति मिल जाती है। वहीं पंचांग के अनुसार हर साल होली के आठवें दिन और चैत्र शुक्लपक्ष की अष्टमी को शीतला अष्टमी मनाई जाती है। इसे बासोड़ा भी कहते हैं।

शीतला अष्टमी तिथि 2024 (Sheetala Ashtami 2024 Tithi)

वैदिक पंचांग के मुताबिक चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 1 अप्रैल दिन की रात 09 बजकर 08 मिनट पर शुरू हो रही है और शीतला अष्‍टमी तिथि का अंत 2 अप्रैल को रात 08 बजकर 09 मिनट पर होगा। इसलिए उदया तिथि के अनुसार शीतला अष्‍टमी या बासौड़ा पर्व 2 अप्रैल को मनाया जाएगा। शीतला अष्‍टमी के द‍िन सुबह जल्दी उठ जाएं और स्नान करके साफ- सुथरे वस्त्र पहन लें। वहीं फिर पूरी श्रद्धा साथ शीतला माता को जल अर्पित करें। थोड़ा सा जल बचा लें और उसे घर के हर कमरे और हर द‍िशा में छ‍िड़क दें। ऐसा करने से घर से निगेटिविटी खत्म होती है। साथ ही जीवन में संपन्नता बनी रहती है।

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माता शीतला की आरती

शीतला माता की पूजा करते समय ठंडक की देवी शीतला माता की आरती जरूर करनी चाहिए। ये है शीतला माता की आरती -

ओम जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता,
आदि ज्योति महारानी सब फल की दाता, जय शीतला माता...

रतन सिंहासन शोभित, श्वेत छत्र भ्राता,
ऋद्धि-सिद्धि चंवर ढुलावें, जगमग छवि छाता, जय शीतला माता...

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विष्णु सेवत ठाढ़े, सेवें शिव धाता,
वेद पुराण बरणत पार नहीं पाता, जय शीतला माता...

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इन्द्र मृदंग बजावत चन्द्र वीणा हाथा,
सूरज ताल बजाते नारद मुनि गाता, जय शीतला माता...

घंटा शंख शहनाई बाजै मन भाता,
करै भक्त जन आरति लखि लखि हरहाता, जय शीतला माता...

ब्रह्म रूप वरदानी तुही तीन काल ज्ञाता,
भक्तन को सुख देनौ मातु पिता भ्राता, जय शीतला माता...

जो भी ध्यान लगावें प्रेम भक्ति लाता,
सकल मनोरथ पावे भवनिधि तर जाता, जय शीतला माता...

रोगन से जो पीड़ित कोई शरण तेरी आता,
कोढ़ी पावे निर्मल काया अन्ध नेत्र पाता, जय शीतला माता...

बांझ पुत्र को पावे दारिद कट जाता,
ताको भजै जो नाहीं सिर धुनि पछिताता, जय शीतला माता...

शीतल करती जननी तू ही है जग त्राता,
उत्पत्ति व्याधि विनाशत तू सब की घाता, जय शीतला माता...

दास विचित्र कर जोड़े सुन मेरी माता,
भक्ति आपनी दीजै और न कुछ भाता,
ओम जय शीतला माता....

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