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Raksha Bandhan 2024: इस साल कब है रक्षाबंधन? जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त, भद्राकाल का समय और महत्व

Raksha Bandhan 2024 Date, Puja Vidhi, Muhurat, Timings: रक्षाबंधन इस साल 19 अगस्त 2024 को मनाया जाएगा। आइए जानते हैं राखी बांधने का शुभ समय…
Written by: Astro Aditya Gaur
नई दिल्ली | Updated: July 10, 2024 14:10 IST
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रक्षाबंधन का पर्व भाई बहन के प्यार का प्रतीक है-
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Raksha Bandhan Kab Hai 2024: हिंदू धर्म में रक्षाबंधन त्योहार का विशेष महत्व है। वैदिक पंचांग के अनुसार यह त्योहार हर साल सावन महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। आपको बता दें कि रक्षाबंधन का पर्व भाई बहन के प्रेम के प्रतिक है। साथ ही  इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उनसे रक्षा का वचन मांगती है। वहीं भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं और जीवनभर उनकी रक्षा करने का वचन देते हैं। इस साल यह त्योहार 19 अगस्त को मनाया जाएगा। आइए जानते हैं तिथि, शुभ मुहूर्त और भद्रा काल का समय…

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जानिए कब मनाया जाएगा रक्षाबंधन

वैदिक पंचांग के अनुसार इस साल सावन पूर्णिमा तिथि 19 अगस्त को सुबह 3 बजकर 3 मिनट पर शुरू हो जाएगी और इसका अंत 19 अगस्त की रात 11 बजकर 56 मिनट पर होगा। ऐसे में रक्षाबंधन का पर्व 19 अगस्त को ही मनाया जाएगा।

भद्राकाल में नहीं बांधी जाती राखी

ज्योतिष में भद्राकाल का समय शुभ नहीं माना जाता है। साथ ही इस समय कोई शुुभ कार्य करने की मनाही होती है। वहीं मान्यता है कि भद्राकाल में राखी बांधने से भाई बहन के रिश्तों में खटास आ जाती है। इसलिए भाई बहन को राखी शुभ मुहूर्त में ही बांधनी चाहिए।

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भद्राकाल का समय

रक्षाबन्धन भद्रा अन्त समय - 01:30 पी एम

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रक्षाबन्धन भद्रा पूंछ - 09:51 ए एम से 10:53 ए एम

रक्षाबन्धन भद्रा मुख - 10:53 ए एम से 12:37 पी एम

रक्षाबंधन का महत्व

रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन को समर्पित है। साथ ही यह पर्व भाई बहन के मजबूत संबंधों को दर्शाता है। वहीं शास्त्रों में रक्षाबंधन को लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं। एक कहानी के अनुसार जब भगवान श्री कृष्ण ने शिशुपाल का सुदर्शन चक्र से वध किया था तो  भगवान कृष्ण की उंगली कट गई थी तो द्रौपदी ने उनकी उंगली से खून को रोकने के लिए अपनी साड़ी से एक टुकड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया था। इसपर भगवान कृष्ण ने द्रौपदी की रक्षा का वचन दिया था। तब से रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाने लगा।

राखी बांधने का मंत्र

“येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबल:

तेन त्वाम् प्रतिबद्धनामि रक्षे माचल माचल:”

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