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Maa Ambe Ji Ki Aarti Hindi Lyrics: 'अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली', पढ़े मां अंबे जी की आरती

Maa Ambe Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi, Ambe Tu Hai Jagdambe Kali Jai Durge Khappar Wali Aarti Lyrics in Hindi: अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली, तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती। यहां पढ़े मां अंबे जी की संपूर्ण आरती लिखी हुई हिंदी में
Written by: Astro Aditya Gaur
नई दिल्ली | Updated: April 09, 2024 11:46 IST
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‘अंबे तू है जगदंबे काली…’ नवरात्रि में रोजाना करें माता रानी की ये आरती-
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Maa Ambe Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi, Ambe Tu Hai Jagdambe Kali Jai Durge Khappar Wali Aarti Lyrics(अंबे तू है जगदम्‍बे आरती): वैदिक पंचांग के अनुसार इस साल चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 9 अप्रैल यानी आज से शुरू हो रही हैं। आपको बता दें कि 9 दिन मां दुर्गा की उपासना की जाती है। सालभर में कुल 4 नवरात्रि आती हैं जिसमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि का महत्व काफी ज्यादा होता है। वहीं चैत्र नवरात्रि में देवी दुर्गा ने राक्षस महिषासुर का वध किया था। इसलिए, देवी दुर्गा को देवी काली के रूप में भी जाना जाता है। वहीं नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना की जाती है। इसके बाद ही पूजा आरंभ होती है। साथ ही नवरात्रि में मां दुर्गा की आरती करने से सुख- समृद्धि की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं मां दुर्गा की आरती के बारे में…

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घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

चैत्र नवरात्रि मंगलवार, 9 अप्रैल 2024

घटस्थापना मुहूर्त: सुबह 6 बजकर 02 मिनट से सुबह 10 बजकर 17 मिनट तक

अवधि: 4 घंटे 14 मिनट्स

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घटस्थापना अभिजीत मुहूर्त : सुबह 11 बजकर 58 मिनट से दोपहर 12 बजकर 49 मिनट तक

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मां अंबे जी की आरती: Ambe Tu Hai Jagdambe Kali Jai Durge Khappar Wali Aarti Lyrics in Hindi

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली,
तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।
तेरे भक्त जनो पर माता भीर पड़ी है भारी।
दानव दल पर टूट पड़ो मां करके सिंह सवारी॥
सौ-सौ सिहों से बलशाली, है अष्ट भुजाओं वाली,
दुष्टों को तू ही ललकारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

माँ-बेटे का है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता।
पूत-कपूत सुने है पर ना माता सुनी कुमाता॥
सब पे करूणा दर्शाने वाली, अमृत बरसाने वाली,
दुखियों के दुखड़े निवारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

नहीं मांगते धन और दौलत, न चांदी न सोना।
हम तो मांगें तेरे चरणों में छोटा सा कोना॥
सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली,
सतियों के सत को संवारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

चरण शरण में खड़े तुम्हारी, ले पूजा की थाली।
वरद हस्त सर पर रख दो माँ संकट हरने वाली॥
माँ भर दो भक्ति रस प्याली, अष्ट भुजाओं वाली,
भक्तों के कारज तू ही सारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

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