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 Holika Dahan 2024: सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग में होगा होलिका दहन, जानिए पूजन- विधि और पूजा सामग्री

Holi 2024, Holika Dahan Date Time : वैदिक पंचांग के अनुसार होलिका दहन पर सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग का संयोग बन रहा है। आइए जानते हैं पूजन- विधि और सामग्री...
Written by: Astro Aditya Gaur
नई दिल्ली | March 24, 2024 07:18 IST
 holika dahan 2024  सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग में होगा होलिका दहन  जानिए पूजन  विधि और पूजा सामग्री
Holika Dahan 2024: होलिका दहन की विधिवत पूजा करने से घर में नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती हैं-
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Holi 2024, Holika Dahan 2024 Date Time: होली का पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप मानाया जाता है। इस दिन लोग एक दूसरे को गले लगाकर रंग लगाते हैं। आपको बता दें कि फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा की रात को होलिका दहन किया जाता है और अगले दिन रंग से होली खेली जाती है। आपको बता दें कि इस बार होलिका दहन 24 मार्च यानी आज किया जा रहा है। वहीं आज सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग का भी निर्माण हो रहा है। वहीं आपको बता दें कि शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन की विधिवत पूजा करने से घर में नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती हैं। साथ ही धन की देवी मां लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है। आइए जानते हैं होलिका दहन की पूजा- विधि और सामग्री…

होलिका दहन का मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार होलिका दहन 24 मार्च को रात्रि 11 बजकर 12 मिनट से मध्यरात्रि 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। इस बीच में होलिका दहन किया जा सकता है। वहीं इस दिन पूर्णिमा तिथि 24 मार्च को 9 बजकर 5 मिनट पर आरंभ हो रही है और इसका अंत 25 मार्च को दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर हो रहा है।

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होलिका दहन पूजा सामग्री

  1. कच्चा सूती धागा
  2. नारियल
  3. गुलाल पाउडर
  4. रोली, अक्षत, धूप और फूल
  5. गाय के गोबर से बनी माला
  6. बताशा, नया अनाज और मूंग की साबूत दाल
  7. हल्दी का टुकड़ा
  8. एक कटोरी पानी
  9. गेहूं और चने की पकी बालियां 
  10. फल

होलिका दहन की पूजा विधि

होलिका दहन की पूजा करने के लिए जहां होलिका दहन होना वहां जाएं और पूर्व दिशा में मुख करके बैठ जाएं। इसके बाद बाद पूजन सामग्री लें। इसके बाद होलिका के पास ही गाय के गोबर से बनी ढाल रखें। इसके बाद गुलाल में रंगी, मौली, ढाल और खिलौने से बनी चार अलग-अलग मालाएं रख लें। वहीं इसके बाद भगवान का स्मरण करें। साथ ही घूप- अगरबत्ती जलाएं। इसके बाद इसमें पहली माला पितरों के लिए, दूसरी हनुमान जी के लिए, तीसरी मां शीतला और चौथी माला परिवार के नाम से रखें। इसके बाद होलिका की 5 या 7 परिक्रमा करें। साथ ही फिर होलिका की परिक्रमा करते हुए उसमें कच्‍चा सूत लपेट दें। इसके बाद जल डालें। साथ ही अंत में अनाज की बालियां अर्पित कर लें।

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