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Guru Mahadasha: 16 साल चलती है गुरु की महादशा, व्यक्ति को मिलता है अपार धन और यश, पद और मान- सम्मान की भी होती है प्राप्ति

Guru Mahadasha: वैदिक ज्योतिष अनुसार गुरु ग्रह की महादशा 16 साल की होती है। जिसमें व्यक्ति को पद और मान- सम्मान की प्राप्ति होती है...
Written by: Astro Aditya Gaur
नई दिल्ली | Updated: April 03, 2024 12:21 IST
guru mahadasha  16 साल चलती है गुरु की महादशा  व्यक्ति को मिलता है अपार धन और यश  पद और मान  सम्मान की भी होती है प्राप्ति
गुरु बृहस्पति अगर जन्मकुंडली में शुभ स्थित हों तो व्यक्ति को कार्यक्षेत्र में लाभ मिलता है-
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Guru Mahadasha Effect: ज्योतिष शास्त्रों में 27 नक्षत्र, 12 राशियां और नवग्रहों का जिक्र मिलता है। अगर व्यक्ति को नवग्रहों की महादशा से गुजरना पड़ता है। वहीं दशा में व्यक्ति को कैसा फल प्रदान होता, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उसकी जन्मकुंडली में वह ग्रह किस स्थिति में विराजमान है। ऐसे में यहां हम बात करने जा रहे हैं देवताओं के गुरु बृहस्पति की महादशा के बारे में, जिसका असर 16 साल तक व्यक्ति के ऊपर रहता है। वहीं अगर जन्मपत्री में गुरु ग्रह सकारात्मक यानी उच्च के विराजनान हो तो व्यक्ति जीवन में सभी भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। साथ ही इसके प्रभाव से व्यक्ति पद और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है साथ ही ऐसा व्यक्ति आस्तिक और दूरदर्शी होते हैं। इन लोगों की धर्म- कर्म के कामों खूब रूचि होती है। आइए जानते हैं गुरु की महादशा का जीवन में प्रभाव और लाभ…

गुरु ग्रह की महादशा का जीवन में प्रभाव

अगर कुंडली में गुरु ग्रह शुभ हो स्थित

 ज्योतिष शास्त्र अनुसार अगर कुंडली में गुरु बृहस्पति सकारात्मक यानी उच्च के स्थिति हों तो व्यक्ति को समाज में मान- सम्मान और प्रतिष्ठा पाता है। साथ ही ऐसा व्यक्ति जीवन में खूब पढ़ता- लिखता है। वहीं वह विचारक होता है। साथ ही नए- नए विषयों को पढ़ने में उसकी रूचि होती है। वहीं ऐसे व्यक्ति की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी रहती है। वह आशावादी और भगवान में आस्था रखने वाला होता है। वह ज्ञानी और ईमानदार होता है।

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वहीं गुरु ग्रह कुंडली में शुभ होने से व्यक्ति ज्योतिष, आध्यात्म, कथावाचक और विचारक के क्षेत्र में खूब नाम कमाता है। वहीं अगर किसी व्यक्ति पर गुरु ग्रह की महादशा चल रही हो तो व्यक्ति को इन चीजों से संबंधित फल प्राप्त होते हैं।

अगर कुंडली में गुरु बृहस्पति अशुभ हो विराजमान

अगर किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में गुरु बृहस्पति निगेटिव स्थित हों तो व्यक्ति का मन विचलित रहता है। साथ ही ऐसा व्यक्ति नास्तिक होता है और उसका धर्म के कार्य मतलब पूजा- पाठ में मन नहीं लगता है। साथ ही ऐसे व्यक्ति को कार्यक्षेत्र में परेशानियों का सामना करना पड़ता है और कई बार अपना कार्यक्षेत्र बदलना पड़ता है। वहीं गुरु ग्रह के अशुभ होने से व्यक्ति को पेट से सबंधित रोग, अपच, पेट दर्द, एसिडिटी, कमज़ोर पाचन तंत्र, कैंसर जैसी बीमारी हो सकती हैं। साथ ही अगर गुरु ग्रह अशुभ स्थित हों तो व्यक्ति की शादी होने में बाधा आती है। साथ ही संतान होने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। साथ ही गुरु कुंडली में अशुभ होने से व्यक्ति को वैवाहिक जीवन में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

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