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Chaitra Navratri 2024 Ashtami Date: दुर्गा अष्टमी पर बन रहे 2 शुभ योग, जानिए तिथि और कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त

Chaitra Navratri 2024 Ashtami Date, Puja Vidhi: महाष्टमी के दिन मां दुर्गा की विधिवत पूजा करने के साथ कन्या पूजन करने से धन-ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है...
Written by: Astro Aditya Gaur
नई दिल्ली | Updated: April 15, 2024 13:44 IST
chaitra navratri 2024 ashtami date  दुर्गा अष्टमी पर बन रहे 2 शुभ योग  जानिए तिथि और कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त
Chaitra Navratri 2024 Ashtami Date: दुर्गा अष्टमी पर बन रहे 2 योग-
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Chaitra Navratri 2024 Ashtami Date, Puja Vidhi: नवरात्रि में 9 दिन मां दुर्गा के नव स्वरूपों की आराधना की जाती है। वहीं अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन करने का विधान है। मान्यता है कन्या पूजन करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं। साथ ही सुख- समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। आपको बता दें कि इस साल अष्टमी तिथि 16 अप्रैल को मनाई जाएगी। वहीं इस दिन दो शुभ योग भी बन रहे हैं। जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है। आइए जानते हैं कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त और तिथि…

चैत्र नवरात्रि अष्टमी तिथि

वैदिक पंचांग के अनुसार नवरात्री अष्टमी तिथि की शुरुआत 15 अप्रैल को दोपहर में 12 बजकर 11 मिनट से हो रही है। साथ ही इसका अंत 16 अप्रैल को दोपहर 1 बजकर 21 मिनट पर हो रहा है। ऐसे में उदया तिथि को आधार मानते हुए अष्टमी तिथि 16 अप्रैल को मनाई जाएगी। वहीं महाअष्टमी कन्या पूजन 16 अप्रैल को किया जाएगा। जबकि नवमी तिथि 17 अप्रैल को है।

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अष्टमी कन्या पूजन शुभ मुहूर्त

अष्टमी तिथि पर कन्या पूजन के लिए 16 अप्रैल को दो मुहूर्त बन रहे हैं। जिसमें पहले मुहूर्त 7 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर 10 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। वहीं दूसरा शुभ मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त रहेगा। जो 11 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। इन दोनों मुहूर्त में कन्या पूजन कर सकते हैं।

बन रहे हैं 2 शुभ योग

पंचांग के मुताबिक अष्टमी तिथि पर सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग बन रहे हैं। ज्योतिष में इन योगों को बेहद शुभ माना जाता है। इन योगों में पूजा करने का दोगुना फल प्राप्त होता है।

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कन्या के साथ बटुक की भी पूजा

नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर घर जाकर कन्याओं को निमंत्रण दें। साथ ही कन्या पूजन में 2 से 10 साल तक कन्याओं का विशेष महत्व बताया गया है। इसलिए इस उम्र की कन्याओं को ही निमंत्रण दें। साथ ही कन्या पूजन के दौरान बटुक करने का भी विधान है। वहीं कन्या जब भी घर पर आएं तो उनके पैर धोएं। साथ ही कन्याओं को भोजन कराएं और फिर अंत में कुछ उपहार भी दें।

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