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Budhwa Mangal 2024: कब है बुढ़वा मंगल? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व

Budhwa Mangal 2024: बुढ़वा मंगल के दिन भगवान हनुमान की पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
Written by: Shivani Singh
नई दिल्ली | Updated: May 11, 2024 11:13 IST
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Budhawa Mangal 2024: बुढ़वा मंगल की तिथि सहित अन्य जानकारी
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Budhwa Mangal 2024: हिंदू धर्म में ज्येष्ठ माह का विशेष महत्व है। खासकर हनुमान भक्तों के लिए क्योंकि इस माह के हर मंगलवार के दिन बड़ा मंगलवार के तौर पर मनाया जाता है। इसे बुढ़वा मंगल  (Bada Mangal 2023 Date) भी कहा जाता है। इस दिन भगवान हनुमान की पूजा करने से सुख-समृद्धि, धन-संपदा की प्राप्ति हो रही है। जानें ज्येष्ठ माह में कब है सबसे बड़ा मंगलवार? साथ ही जानें महत्व के साथ अन्य जानकारी...

कब है बड़ा मंगल? (Bada Mangal 2024 Date)

हिंदू पंचांग के अनुसार, 22 मई की शाम को 6 बजकर 48 मिनट पर वैशाख पूर्णिमा शुरू होगी, जो 23 मई को शाम में 7 बजकर 23 मिनट तक समाप्त होगी। इसके साथ ही शाम 7 बजकर 23 से  ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष का आरंभ प्रतिपदा तिथि आरंभ हो जाएगाी। ज्येष्ठ मास 24 मई 2024 से आरंभ हो रहा है। इसलिए बुढ़वा मंगल 28 मई 2024 को पड़ रहा है।

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ज्येष्ठ माह में कब-कब होगा बुढ़वा मंगल

28 मई के अलावा बुढ़वा मंगल ज्येष्ठ माह में 4 जून, 11 जून और 18 जून को पड़ेगा।

बुढ़वा मंगल का महत्व (Significance Of Budhwa Mangal)

हिंदू धर्म में बुढ़वा मंगल का विशेष महत्व है। खासकर के उत्तर प्रदेश में इसे बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं। शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि इस दिन भगवान हनुमान पहली बार अपने प्रभु श्री राम से मिले थे। इसके साथ ही इसी माह उन्होंने भीम का घमंड तोड़ा था। माना जाता है कि इस दिन भगवान हनुमान की पूजा करने से हर दुख-दर्द  दूर हो जाता है। इसके साथ ही सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही लाल या फिर नारंगी रंग का चोला चढ़ाने से मानसिक, शारीरिक और आर्थिक समस्याओं से निजात मिल जाती है।

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क्यों मनाते हैं बुढ़वा मंगल? (Why We Celebrate budhwa Mangal)

महाभारत काल में भीम को अपनी शक्ति पर काफी घमंड था, क्योंकि उसके पास हजारों हाथियों के बराबर ताकत थी। ऐसे में उनके इस घमंड को तोड़ने के लिए हनुमान जी ने एक बूढ़े बंदर का भेष धारण किया और भीम का घमंड चूर कर दिया था। जिस दिन ये किया उसे बुढ़वा मंगल के नाम से जाने गया।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन हनुमान जी अपने प्रभु श्री राम से मिले थे। जब पहली बार हनुमान जी श्री राम से मिले थे, जो उन्होंने एक बूढ़े ऋषि का भेष धरा था। इसी के कारण इसे बुढ़वा मंगलवार कहा गया।

डिसक्लेमर- इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, पंचांग, मान्यताओं या फिर धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इसके किसी भी तरह के उपयोग करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।

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