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तमिलनाडु BJP के फायर ब्रांड नेता अन्नामलाई के खिलाफ क्यों दर्ज हुआ नफरत फैलाने का मामला? नहीं है हिन्दू-मुस्लिम एंगल

पीयूष मानुष ने सलेम पुलिस और जिला प्रशासन के पास शिकायत दर्ज कर अन्नामलाई के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: Mohammad Qasim
नई दिल्ली | Updated: May 14, 2024 20:51 IST
तमिलनाडु bjp के फायर ब्रांड नेता अन्नामलाई के खिलाफ क्यों दर्ज हुआ नफरत फैलाने का मामला  नहीं है हिन्दू मुस्लिम एंगल
तमिलनाडू बीजेपी चीफ अन्नामलाई (एक्सप्रेस फाइल)
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तमिलनाडु सरकार ने बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई के खिलाफ समुदायों के बीच नफरत को बढ़ावा देने के आरोपों के तहत मामला दर्ज किया है।

के अन्नामलाई के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता पीयूष मानुष ने शिकायत दर्ज कराई थी। जिसमें अन्नामलाई पर सितंबर 2022 में मदुरै में दिए गए एक भाषण के माध्यम से नफ़रत फैलाने का आरोप लगाया था।

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क्या बयान दिया था? 

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई ने डीएमके के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री सीएन अन्नादुरई से जुड़ी 1956 की एक घटना के बारे में बात की थी, जिसमें कहा गया था कि अन्नादुरई द्वारा की गई कुछ टिप्पणियों ने देवी मीनाक्षी अम्मन के भक्तों को नाराज कर दिया था, जिसके कारण फॉरवर्ड ब्लॉक नेता मुथुरामलिंगा थेवर की चेतावनी के बाद उन्हें माफी मांगनी पड़ी थी।

इस घटना की सत्यता पर कई लोगों ने सवाल उठाया और पीयूष मानुष ने सलेम पुलिस और जिला प्रशासन के पास शिकायत दर्ज कर अन्नामलाई के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

सलेम में न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने याचिका पर सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया और उनके ऊपर मामला शुरू हुआ। सरकारी आदेश में कहा गया है, "सरकार इस बात से संतुष्ट है कि अन्नामलाई द्वारा दिया गया बयान विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य, शत्रुता, घृणा और दुर्भावना की भावनाओं को बढ़ावा देने, जनता में भय या चिंता पैदा करने और सार्वजनिक शांति को बिगाड़ने के इरादे से है।" .

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इसपर अन्नामलाई ने कहा कि यह राजनीतिक उद्देश्यों के तहत हो रहा है और वह इसको चुनौती दे रहे हैं। इस बीच राजभवन स्थित तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि के कार्यालय ने एक स्पष्टीकरण जारी किया, जिसमें अन्नामलाई के खिलाफ आपराधिक मामले की जानकारी होने से इनकार किया गया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज किया गया।

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अन्नामलाई पहले से ही अल्पसंख्यक समुदायों और धर्मांतरण के बारे में अपनी कथित टिप्पणियों के लिए इसी तरह के आरोप का सामना कर रहे हैं। पिछले महीने, सुप्रीम कोर्ट ने एक यूट्यूब चैनल को 2022 के साक्षात्कार में कथित तौर पर ईसाइयों के खिलाफ भाषण देने के लिए उनके खिलाफ मुकदमे और आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।

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