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Punjab Politics: गुल पनाग से लेकर जस्सी जसराज तक, जानिए क्या कर रहा AAP के 2014 का 'क्रांतिकारी बैच'

पंजाब में 2014 में कुछ बड़े चेहरे हाथों में झाड़ू, सिर पर गांधी टोपी और होठों पर 'स्वराज का शासन' की बात लेकर पंजाब की सड़कों पर उतरे थे।
Written by: दिव्या गोयल | Edited By: Nitesh Dubey
नई दिल्ली | Updated: April 27, 2024 18:04 IST
punjab politics  गुल पनाग से लेकर जस्सी जसराज तक  जानिए क्या कर रहा aap के 2014 का  क्रांतिकारी बैच
गुल पनाग, एचएस फुल्का, जस्सी जसराज और भाई बलदीप अब AAP छोड़ चुके हैं। (EXPRESS PHOTO)
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लोकसभा चुनाव 2024 के लिए दो चरण का मतदान खत्म हो चुका है। इस बीच आम आदमी पार्टी (AAP) को लेकर काफी चर्चा हो रही है। दरअसल आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दिल्ली शराब नीति घोटाले में जेल में बंद हैं। 2014 की गर्मियों में 13 लोगों का एक समूह, जिसमें एक अभिनेता, एक शिक्षक, एक वकील, एक सामाजिक कार्यकर्ता और एक डॉक्टर शामिल थे, वह हाथों में झाड़ू, सिर पर गांधी टोपी और होठों पर 'स्वराज का शासन' की बात लेकर पंजाब की सड़कों पर उतरे थे।

राजनीतिक क्षेत्र में ज्यादातर नए चेहरों ने हलचल पैदा करने में सफलता पाई और पंजाब की राजनीति में तूफान ला दिया। अब तक राज्य में कांग्रेस और अकाली-भाजपा गठबंधन के बीच द्विपक्षीय मुकाबला चल रहा था। 2014 के लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के बैनर तले चुनाव लड़ने वाले चार उम्मीदवार लोकसभा के लिए चुने गए थे। इनमें पटियाला से डॉ. धर्मवीर गांधी, फतेहगढ़ साहिब से हरिंदर सिंह खालसा, फरीदकोट से साधु सिंह और संगरूर से भगवंत मान शामिल थे। हालांकि एक दशक बाद 13 में से 10 उम्मीदवार या तो पार्टी छोड़ चुके हैं या राजनीतिक रूप से सक्रिय नहीं हैं। 2019 में भगवंत मान (जो अब पंजाब के मुख्यमंत्री हैं) संगरूर से लोकसभा के लिए फिर से चुने जाने वाले एकमात्र AAP सांसद थे।

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चूंकि AAP एक बार फिर पंजाब की सभी 13 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ रही है, इंडियन एक्सप्रेस ने 2014 बैच के सदस्यों द्वारा चुने गए रास्ते की चर्चा की।

हरविंदर सिंह फुल्का (आम आदमी पार्टी छोड़ने के बाद राजनीति भी छोड़ दी)

1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के लिए न्याय की लड़ाई लड़ने वाले सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील फुल्का ने 2014 का लोकसभा चुनाव लुधियाना से लड़ा था और कांग्रेस के रवनीत सिंह बिट्टू से मामूली अंतर से हार गए थे। 2017 के विधानसभा चुनाव में AAP ने उन्हें अकाली के गढ़ दाखा से मैदान में उतारा था। उन्होंने जीत हासिल की और पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता चुने गए।

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हालांकि 2018 में उन्होंने पहले विपक्ष के नेता के पद से इस्तीफा दिया और फिर विधायक के पद से और अंत में आप छोड़ दी। अब राजनीति में निष्क्रिय फुल्का कहते हैं, “1984 के मामले में आरोपी कांग्रेस नेता सज्जन कुमार का मामला दिल्ली उच्च न्यायालय में अंतिम सुनवाई के लिए आ रहा था और बार काउंसिल मुझे पेश होने की अनुमति नहीं दे रही थी क्योंकि मुझे मंत्री का दर्जा प्राप्त था। मुझे मामले में पेश होने के लिए विपक्ष के नेता के पद से इस्तीफा देना पड़ा। आप नेतृत्व ने मुझे पार्टी के हित में इस्तीफा न देने के लिए कहा और पूछा कि क्या 1984 के मामले अधिक महत्वपूर्ण हैं? मैंने कहा कि हां वे महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि मैंने अपना पूरा जीवन उनके खिलाफ लड़ने में बिताया है। इसलिए मैंने उनसे कहा कि मैं राजनीति छोड़ दूंगा।"

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ज्योति मान (AAP और राजनीति छोड़ दी)

2014 में AAP द्वारा मैदान में उतारे गए सबसे युवा उम्मीदवारों में से एक ज्योति मान (एक सफाई कर्मचारी की बेटी हैं) ने जालंधर (SC) सीट से अपना पहला चुनाव लड़ा था। वह कांग्रेस के संतोख सिंह चौधरी से हार गईं और अंत में AAP और राजनीति छोड़ दी। ज्योति मान कहती हैं, "आप और राजनीति में शामिल होने का मेरा एकमात्र उद्देश्य वंचितों की सेवा करना था। लेकिन जल्द ही मुझे एहसास हुआ कि आप एक खास पार्टी बन गई है, जहां आम आदमी की कोई कीमत नहीं है। इसलिए मैंने सोचा कि बिना किसी राजनीतिक मंच के अपना सामाजिक कार्य जारी रखना बेहतर है।"

डॉ. धर्मवीर गांधी (AAP द्वारा निलंबित और अब कांग्रेस में)

सामाजिक कार्यकर्ता और हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. धर्मवीर गांधी अपने पहले चुनाव में कांग्रेस की परनीत कौर को हराकर एक बड़े किलर के रूप में उभरे थे, जो पंजाब के पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की पत्नी हैं। उस समय परनीत तीन बार सांसद रह चुकी थीं और 1999 से लगातार इस सीट से जीत रही थीं। AAP ने 2015 में धर्मवीर गांधी को पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए निलंबित कर दिया था, जब उन्होंने पंजाब के पार्टी मामलों में दिल्ली नेतृत्व के हस्तक्षेप पर सवाल उठाया था और प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव के खिलाफ की गई कार्रवाई पर बात की थी। बाद में उन्होंने नवां पंजाब पार्टी (NPP) का गठन किया और 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ा और परनीत से हार गए। अब AAP और पंजाब के CM भगवंत मान के मुखर आलोचक धर्मवीर गांधी हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए और उन्हें पटियाला से पार्टी का उम्मीदवार बनाया गया है।

हरिंदर सिंह खालसा (AAP से निलंबित, अब SAD में)

पूर्व भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी खालसा ने ऑपरेशन ब्लूस्टार के विरोध में 1984 में नॉर्वे में अपनी पोस्टिंग के दौरान इस्तीफा दे दिया था। खालिस्तान आंदोलन का समर्थक होने के आरोपों का सामना करने के बाद वे कुछ वर्षों तक नॉर्वे में शरण में रहे। वे 1990 में भारत लौट आए, और 1996 में SAD के टिकट पर बठिंडा से लोकसभा के लिए चुने गए। 2014 में उन्होंने AAP उम्मीदवार के रूप में फतेहगढ़ साहिब से जीत हासिल की, लेकिन 2015 में धर्मवीर गांधी के साथ उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया गया। 2019 में आम चुनावों से पहले खालसा भाजपा में शामिल हो गए, लेकिन उन्हें टिकट नहीं दिया गया। 2020 के अंत में उन्होंने प्रदर्शनकारी किसानों का समर्थन करने के लिए भाजपा छोड़ दी। वे फरवरी 2022 में फिर से SAD में शामिल हो गए, लेकिन अब वे राजनीतिक रूप से काफी हद तक सक्रिय नहीं हैं।

सुच्चा सिंह छोटेपुर (AAP से निलंबित, अब SAD में)

धारीवाल विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रह चुके छोटेपुर (1985 में SAD के टिकट पर और 2002 में निर्दलीय) सुरजीत सिंह बरनाला सरकार में मंत्री भी रहे। उन्होंने 2014 में गुरदासपुर से चुनाव लड़ा, लेकिन भाजपा के विनोद खन्ना से हार गए। उन्होंने पार्टी छोड़ दी। बाद में उन्होंने अपना पंजाब पार्टी (APP) बनाई, लेकिन 2017 के विधानसभा चुनावों में गुरदासपुर से चुनाव लड़कर चौथे स्थान पर रहे। फिर वे SAD में शामिल हो गए और 2022 में बटाला से चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। उन्होंने कहा, "मेरे सभी दलों के विरोधियों ने भी कहा कि कुछ भी सच हो सकता है, लेकिन AAP द्वारा मुझ पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोप सच नहीं हो सकते। आज तक वे मेरे द्वारा टिकट के लिए पैसे लेने का कोई सबूत जारी करने में विफल रहे हैं।"

यामिनी गोमर (AAP से इस्तीफा दे दिया, अब कांग्रेस में हैं)

2014 में होशियारपुर से मैदान में उतरीं यामिनी गोमर अंग्रेजी की टीचर हैं और भाजपा के विजय सांपला से हार गई थीं। हालांकि दिसंबर 2016 में पार्टी से इस्तीफा देते हुए उन्होंने लिखा, "आप अपने मूल सिद्धांतों और स्वराज की विचारधारा से भटक गई है और कहा कि पार्टी में कोई लोकतंत्र नहीं बचा है।" बाद में वह कांग्रेस में शामिल हो गईं। उन्होंने कहा, "मुझे आप छोड़ने का कोई अफसोस नहीं है क्योंकि पार्टी में चीजें बदलने लगी थीं। हमने स्वराज के लिए एक यात्रा शुरू की थी जो खत्म हो गई।" गोमर को 1 जून को होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए होशियारपुर से कांग्रेस उम्मीदवार घोषित किया गया है।

भाई बलदीप सिंह (AAP से निलंबित, राजनीति में सक्रिय नहीं)

एक प्रतिष्ठित शास्त्रीय गायक, तालवादक और गुरबानी कीर्तन के 13वीं पीढ़ी के प्रतिपादक भाई बलदीप सिंह ने खडूर साहिब से चुनाव लड़ा, लेकिन अकाली दल के रंजीत सिंह ब्रह्मपुरा से हार गए। पार्टी के कामकाज के खिलाफ बोलने के कारण 2015 में वह AAP से निलंबित किए गए। वह कहते हैं, "मैं पार्टी में भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़ा होने वाला पहला व्यक्ति था। पार्टी को एकजुट रखने के मेरे प्रयासों को योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण के करीब रहने के प्रयास के रूप में देखा गया। मनीष (सिसोदिया) तब मुझ पर बहुत अधिक आदर्शवादी होने का मज़ाक उड़ाते थे। मैं एक गर्वित निलंबित AAP सदस्य हूं। मुझे टिकट या पद नहीं चाहिए।"

जस्सी जसराज (AAP से निष्कासित, अब BJP में)

2016 में केजरीवाल और भगवंत मान के खिलाफ सोशल मीडिया पर कंटेंट पोस्ट करने के बाद AAP से निष्कासित जस्सी जसराज ने SAD की दिग्गज हरसिमरत कौर बादल के खिलाफ बठिंडा से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। 2019 में उन्होंने लोक इंसाफ पार्टी (LIP) के उम्मीदवार के रूप में संगरूर से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले वे भाजपा में शामिल हो गए, लेकिन राजनीतिक रूप से काफी हद तक सक्रिय नहीं हैं।

जसराज ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, "मैंने हरसिमरत के खिलाफ बठिंडा से चुनाव लड़ने की चुनौती स्वीकार की थी, जबकि फुल्का और भगवंत मान ने भी मना कर दिया था। मैं पंजाब के लिए कुछ करना चाहता था और बदलाव की उम्मीद में AAP में शामिल हुआ था, लेकिन जब मैंने पार्टी में शामिल किए जा रहे भ्रष्ट दलबदलुओं के खिलाफ आवाज उठाई तो मुझे पार्टी से निकाल दिया गया। मैं भाजपा में शामिल हुआ। उम्मीद है कि यह पंजाब के विकास के लिए काम करेगी।"

डॉ. दलजीत सिंह (AAP से निष्कासित हुए और अब निधन हो चुका है)

एक प्रसिद्ध नेत्र सर्जन रहे दलजीत सिंह ने कांग्रेस के कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ अमृतसर से चुनाव लड़ा था, लेकिन वे हार गए थे। AAP के वरिष्ठ नेता संजय सिंह के साथ मतभेद के बाद डॉ. सिंह को AAP ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए निष्कासित कर दिया था। वे जनवरी 2017 में कांग्रेस में शामिल हुए। उसी वर्ष बाद में उनकी मृत्यु हो गई।

हिम्मत सिंह शेरगिल (राजनीति छोड़ दी और कनाडा में बस गए)

एक वकील रहे हिम्मत सिंह आनंदपुर साहिब से कांग्रेस की अंबिका सोनी और अकाली के प्रेम सिंह चडूमाजरा जैसे दिग्गजों के खिलाफ चुनाव लड़े थे। 2017 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने अकाली दल के दिग्गज बिक्रम सिंह मजीठिया का सामना किया लेकिन जमानत जब्त हो गई। उन्होंने राजनीति छोड़ दी, लेकिन AAP का समर्थन करना जारी रखा। अब कनाडा में बैरिस्टर और सॉलिसिटर हैं। हाल ही में कई AAP नेता उनकी शादी में शामिल हुए।

भगवंत मान

2014 और 2019 में संगरूर से दो बार लोकसभा के लिए चुने गए। एक स्टैंड-अप कॉमेडियन और अभिनेता रहे भगवंत मान ने 2022 का विधानसभा चुनाव धुरी से लड़ा और बाद में पंजाब के मुख्यमंत्री बने।

साधु सिंह

2014 में फरीदकोट से साधु सिंह लोकसभा के लिए चुने गए, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में वे हार गए। उनकी बेटी डॉ. बलजीत कौर मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।

सतनाम पॉल कंबोज

पार्टी के कार्यकर्ता और वकील सतनाम सिंह ने 2014 में फिरोजपुर से चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए थे। कंबोज कहते हैं कि पार्टी में कुछ मुद्दों के कारण उन्होंने खुद को सक्रिय राजनीति से अलग कर लिया था लेकिन कभी आधिकारिक तौर पर इस्तीफा नहीं दिया। वे कहते हैं, "मैं अपने स्तर पर उनके (AAP) लिए प्रचार करता रहता हूं लेकिन मेरे पास कोई पद नहीं है।"

गुलकीरत कौर पनाग उर्फ ​​गुल पनाग (आप-राजनीति छोड़ दी)

जानी-मानी अभिनेत्री, मॉडल और एक्टिविस्ट गुल पनाग ने 2014 में चंडीगढ़ से चुनाव लड़ा था और बीजेपी की किरण खेर से हार गई थीं। इसके तुरंत बाद उन्होंने खुद को AAP की राजनीतिक गतिविधियों से दूर कर लिया। 2018 में एक्स पर एक पोस्ट में पनाग ने लिखा था कि उन्होंने आप को खालिस्तानियों के साथ को लेकर बार-बार चेतावनी दी थी।"

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