scorecardresearch
For the best experience, open
https://m.jansatta.com
on your mobile browser.

'आप मुस्लिम नहीं इसलिए अदालत आकर…', आपसी समझौते से लिए तलाक को हाईकोर्ट ने किया खारिज

Madhya Pradesh High Court: पति-पत्नी के बीच आपसी सहमति से हुए अलगाव को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
Written by: न्यूज डेस्क
नई दिल्ली | Updated: May 24, 2024 13:52 IST
 आप मुस्लिम नहीं इसलिए अदालत आकर…   आपसी समझौते से लिए तलाक को हाईकोर्ट ने किया खारिज
MP High Court (symbolic)।
Advertisement

पति-पत्नी के बीच लिए गए आपसी तलाक को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। मध्य प्रदेश स्थित जबलपुर हाईकोर्ट ने तलाक के एक मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि आपसी समझौते से अलग होने को कानून मान्यता नहीं देता है। तलाक के लिए आपको कानूनी प्रक्रिया से गुजरना ही होगा।

बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक जबलपुर हाईकोर्ट ने पति-पत्नी के आपसी रजामंदी से अलग होने को तलाक मानने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही पति द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि विवाहित जोड़े का आपसी समझौता करके अलग हो जाना तलाक नहीं होता।

Advertisement

याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि आपसी समझौता कानूनी रूप से मान्य नहीं है। आपसी समझौता तभी तक के लिए होता है जब तक कि दोनों पक्ष में से किसी को भी आपत्ति न हो। यानी दोनों पक्ष सहमत हो। पति द्वारा दायर याचिका पत्नी द्वारा लगाए गए आरोपों को रद्द करने के लिए की गई थी। याचिका में कहा गया था कि साल 2023 में ही दंपति ने आपसी रजामंदी के तहत दस्तखत करके रिश्ता खत्म कर लिया था। ऐसे में पत्नी द्वारा पति पर इसके बाद कोई आरोप नहीं लगाए जा सकते हैं। जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

आप दोनों मुस्लिम पक्ष से नहीं

Advertisement

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति गुरपाल सिंह अहलूवालिया ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि पति और पत्नी दोनों ही मुस्लिम धर्म से नहीं आते हैं। ऐसे में आपके तलाक को आपसी सहमति से मंजूरी नहीं दी जा सकती है। चिंता का विषय यह है कि आप दोनों ने नोटरी पर ही आपसी समझौता कर लिया। जबकि नोटरी अलगाव के समझौते के आधार पर तलाक को मंजूरी नहीं दे सकता है।

Advertisement

तलाक हो जाए तो तलाक के पहले किए गए दुर्व्यवहार पर दर्ज होगा केस

पत्नी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए कहा था कि दोनों की शादी 21 अप्रैल 2022 को हुई थी। जिसके कुछ ही दिनों बाद उसके पति और ससुराल वालों ने उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था। इसके साथ ही पत्नी ने अपने ससुराल वालों पर मारपीट का भी आरोप लगाया है। इस मामले पर कोर्ट ने कहा कि आपसी रजामंदी से अलगाव को कानूनी मान्यता नहीं है। ऐसे में कोर्ट इस बात को स्पष्ट किया है कि अगर तलाक हो जाए तो तलाक से पहले किए गए दुर्व्यवहार को लेकर आईपीसी की धारा 498-ए के तहत मामला दर्ज कराया जा सकता है।

Advertisement
Tags :
Advertisement
Jansatta.com पर पढ़े ताज़ा एजुकेशन समाचार (Education News), लेटेस्ट हिंदी समाचार (Hindi News), बॉलीवुड, खेल, क्रिकेट, राजनीति, धर्म और शिक्षा से जुड़ी हर ख़बर। समय पर अपडेट और हिंदी ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए जनसत्ता की हिंदी समाचार ऐप डाउनलोड करके अपने समाचार अनुभव को बेहतर बनाएं ।
×
tlbr_img1 Shorts tlbr_img2 टी20 tlbr_img3 LIVE TV tlbr_img4 फ़ोटो tlbr_img5 वीडियो