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अधिकारियों ने नहीं सुनी बात तो सीवर में खुद उतर गया पार्षद, जानिए क्या है मामला

पार्षद देवेन्द्र राठोर ने कहा कि वह इस इलाके के पार्षद हैं और इसे गंदा नहीं देख सकते--'जनता ने मुझे वोट दिया है और यहां का पार्षद बनाया है। ऐसे में जनता के वोट की कीमत चुकाना बहुत जरूरी है।'
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: Mohammad Qasim
नई दिल्ली | Updated: April 02, 2024 20:36 IST
अधिकारियों ने नहीं सुनी बात तो सीवर में खुद उतर गया पार्षद  जानिए क्या है मामला
पार्षद ने सीवर में उतर उठाई मांग (फोटो : X)
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मध्यप्रदेश के ग्वालियर में एक वार्ड पार्षद ने अधिकारियों से अपनी बात मनवाने का ऐसा तरीका अपनाया कि पार्षद की हर तरफ चर्चा है। दरअसल ग्वालियर नगर निगम पर भाजपा का कब्जा है लेकिन बावजूद इसके पार्षद कई मर्तबा अधिकारियों से अपनी बात मनवाने में सफल नहीं हो पाते।

शहर में इन दिनों सीवर लाइन के ओवरफ्लो होने का मुद्दा काफी तूल पकड़ रहा है। शहर के वार्ड-15 के पार्षद देवेन्द्र राठोर इस मुद्दे को लेकर कई दिनों से अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन जब बात नहीं बनी तो वह खुद एक ओवर फ्लो सीवर में उतर गए। अब उनका वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल है।

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क्या है पूरा मामला?

जब वार्ड-15 के पार्षद देवेन्द्र राठोर खुद सीवर में उतर गए तो उन्हें देख भीड़ जमा हो गई। पार्षद ने कहा कि वह कई दिन से सीवर साफ कराने की मांग कर रहे हैं लेकिन उन्हें जब हल होता नहीं दिख रहा तो वह यह कदम उठा रहे हैं। वहां मौजूद लोगों ने उनका सहयोग किया और उनके साथ काम में जुट गए। देवेन्द्र राठोर ने इस दौरान कहा कि कई बार वह चक्कर काट चुके हैं लेकिन समस्या का हल नहीं हो रहा है। अब जनता के लिए उन्हें खुद आगे आना पड़ा है।

क्या बोले पार्षद?

पार्षद देवेन्द्र राठोर ने बताया कि वह प्रधानमंत्री आवास जन योजना के संयोजक हैं। मुझे अचार संहिता के तहत हद में रहने के लिए कहा गया। कहा गया कि आम शिकायतों के लिए अधिकारियों को फोन तक नहीं कर सकते। ऐसे में हम क्या करेंगे। इसलिए मैं खुद इस चैंबर में उतर गया हूं।

'मैं अपने इलाके को साफ रखूंगा'

पार्षद देवेन्द्र राठोर ने कहा कि वह इस इलाके के पार्षद हैं और इसे गंदा नहीं देख सकते--"जनता ने मुझे वोट दिया है और यहां का पार्षद बनाया है। ऐसे में जनता के वोट की कीमत चुकाना बहुत जरूरी है। मुझे लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरना है। शिकायत करते हैं लेकिन कोई ध्याना नहीं देता, ऐसे में हमें ही आगे आना पड़ रहा है।"

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