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MBBS छात्रा के साथ प्रोफेसर ने किया था यौन उत्पीड़न, LG ने सस्पेंड करने का रखा प्रस्ताव, जानिए फिर AAP ने क्यों उठाए सवाल

दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने आरोपी प्रोफेसर को निलंबित करने का प्रस्ताव रखा।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: Nitesh Dubey
नई दिल्ली | Updated: April 07, 2024 08:16 IST
mbbs छात्रा के साथ प्रोफेसर ने किया था यौन उत्पीड़न  lg ने सस्पेंड करने का रखा प्रस्ताव  जानिए फिर aap ने क्यों उठाए सवाल
मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस छात्रा के यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया था।

दिल्ली सरकार की ओर से संचालित एक मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस छात्रा के यौन उत्पीड़न का मामला जनवरी में सामने आया था। इसका आरोपी कॉलेज का ही प्रोफेसर था। अब दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने आरोपी प्रोफेसर को निलंबित करने का प्रस्ताव रखा।

इसी साल जनवरी महीने में वाइवा एग्जाम के दौरान प्रोफेसर ने कथित तौर पर छात्रा के साथ दुर्व्यवहार किया था। छात्रा ने अपनी पुलिस शिकायत में कहा था कि प्रोफेसर ने परीक्षा के दौरान उसे अनुचित तरीके से छुआ और साथ ही अप्रासंगिक प्रश्न भी पूछे। उसने पहली बार 31 जनवरी को अपने कॉलेज के अधिकारियों को घटना की सूचना दी थी जिसके बाद कॉलेज ने एक आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का गठन किया। जांच में आरोपी प्रोफेसर को दूसरे कॉलेज में ट्रांसफर करने का सुझाव दिया गया था।

इसके बाद जब मामला एलजी के पास पहुंचा तो उन्होंने सस्पेंड करने का प्रस्ताव रखा। एलजी वीके सक्सेना ने कहा कि आईसीसी की सिफारिश के अनुसार संबंधित डॉक्टर का दूसरे कॉलेज में ट्रांसफर छात्रों के लिए डराने वाले माहौल को कम नहीं करता है।

एलजी ने आगे कहा: "मैं सीसीएस (सीसीए) नियम 1965 के नियम 10 के तहत अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के प्रस्ताव को मंजूरी देता हूं।" वहीं निलंबन पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आम आदमी पार्टी (AAP) द्वारा शासित दिल्ली सरकार ने कहा कि यह देखकर निराशा हुई कि मामले में कार्रवाई करने में उपराज्यपाल को दो महीने से अधिक समय लग गया, जिसे स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज ने लगातार उठाया था।"

सौरभ ने X पोस्ट में लिखा, "31 जनवरी को हमारी मेडिकल की छात्राओं का शोषण हुआ, कई अफ़सरों ने दोषी को बचाने की कोशिश की गई , बहानेबाज़ी बनाई गई। मुख्य सचिव भी बहानेबाज़ी करते रहे। मैंने भी ठान रखा था कि जब तक कार्यवाही नहीं होगी , मैं LG साब के पीछे पड़ा रहूंगा। अंततः दोषी प्रोफेसर को सस्पेंड किया गया । इतनी देरी क्यों हुई , इसके लिए LG साब आत्ममान्थन जरूर करें। दो महीने की देरी नहीं होनी चाहिए थी। शिकायतकर्ता छात्राओं पर शिकायत वापिस लेने का दबाव क्यों बनाया गया? जब मैंने पूछा कि मुझे क्यों नहीं बताया गया, तो स्वास्थ्य सचिव और मुख्य सचिव कहते है कि ये मामला LG के अधीन है इसलिए चुनी हुई सरकार को नहीं बताया जाएगा। इंटरनल कॉम्प्लेंट्स कमेटी ने भी मिली भगत करके दोषी को क्लीन चिट दे दी। जब मैंने पूछा तो मुख्य सचिव उनका बचाव कर रहे थे । LG साब मुख्य सचिव पर क्या कार्यवाही करेंगे?"

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