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चीखती महिलाएं रोते बच्चे...जालौर में कोर्ट के आदेश पर 140 घरों को ढहाने पहुंचा प्रशासन, सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी

जानकारी यह है कि  राजस्थान हाई कोर्ट ने जालोर जिले के ओडवाडा गांव में 35 एकड़ चारागाह भूमि पर बने 140 से ज़्यादा घरों को गिराने का आदेश दिया है।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: Mohammad Qasim
नई दिल्ली | Updated: May 16, 2024 18:07 IST
चीखती महिलाएं रोते बच्चे   जालौर में कोर्ट के आदेश पर 140 घरों को ढहाने पहुंचा प्रशासन  सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी
पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच झड़प भी हुई। (Photo : TwitterGovind Singh Dotasara)
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राजस्थान का जालौर ज़िला आज सुबह से सोशल मीडिया पर चर्चा में है। वजह है प्रशासन की कार्रवाई जिसके तहत 140 से ज़्यादा घरों को तोड़ा जाना था।

जानकारी यह है कि  राजस्थान हाई कोर्ट ने जालोर जिले के ओडवाडा गांव में 35 एकड़ चारागाह भूमि पर बने 140 से ज़्यादा घरों को गिराने का आदेश दिया है। लेकिन जब यह कार्रवाई शुरू हुई तो गांव की महिलाएं, बच्चे, बूढ़े, नौजवान विरोध में उतर आए। सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें आईं जिनमें लोग रोते हुए दिखाई दिए।

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जिस भूमि पर यह घर बने हुए वह भूमि ओरण किस्म की भूमि है यानी जिसपर खेती नहीं हो सकती है। हाईकोर्ट ने एक मामले पर सुनवाई करते हुए ओरण भूमि पर बने मकानों को अतिक्रमण मानते हुए कार्रवाई करने के आदेश दिए थे।

'हमारा घर मत तोड़िए, हम कहां जाएंगे?'

जब प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की तो कई लड़कियां सामने आ गई। सोशल मीडिया पर मौजूद कई वीडियोज़ में देखा जा सकता है कि वे पुलिस से कार्रवाई नहीं करने का अनुरोध कर रही हैं और कह रही हैं कि ऐसी स्थिति में वह कहां जाएंगे और कहां रहेंगे।

न्यूज़ 9 की रिपोर्ट के मुताबिक जब हाईकोर्ट का आदेश आया तो गांव के लोगों की ये प्रतिक्रिया थी कि वह यहां से जाएंगे कहां? इसमें से कुछ तो ऐसे भी थे जो कई दिन से इस दुख में खाना तक नहीं खा रहे थे।

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कांग्रेस ने उठाए सवाल

कांग्रेस के जालोर लोकसभा से प्रत्याशी रहे वैभव गहलोत ने इस मामले पर बीजेपी सरकार को घेरते हुए कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही, गहलोत ने ट्वीट किया, "आहोर के ओडवाड़ा गांव में अतिक्रमण हटाने के नाम पर 440 घरों को तोड़ा जा रहा है जबकि ये परिवार वर्षों से रहते आये हैं। प्रशासन इसके लिए हाईकोर्ट के आदेश का हवाला दे रहा है जबकि कांग्रेस सरकार के दौरान प्रभावी पैरवी से इन घरों को बचाया गया था। मेरा मानना है कि प्रभावी पैरवी के अभाव में हाईकोर्ट का फ़ैसला ग्रामीणों के ख़िलाफ़ रहा होगा। आज अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान प्रशासन का असंवेदनशील रवैया भी सामने आया।"

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गहलोत ने आगे लिखा, "इस संबंध में मैंने जालोर कलेक्टर से भी बात कर निवेदन किया है कि संवेदनशीलता से विचार कर हाईकोर्ट के फैसले के विरुद्ध इन गरीब लोगों के पक्ष में अपील करें एवं उच्चतम न्यायालय का फैसला आने तक इस कार्रवाई को रोक कर आमजन को न्याय दिलाने में मदद करें। मैं भी इस मामले में ग्रामीणों की मदद करने के लिए विधिक राय ले रहा हूं।"

सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी

वैभव गहलोत ने लिखा, "इसके संबंध में मैंने सुप्रीम कोर्ट के वकील से चर्चा की है एवं पीड़ित परिवारों की ओर से आज ही सुप्रीम कोर्ट में इस कार्रवाई के विरुद्ध सुनवाई के लिए प्रार्थना पत्र देना तय किया है। हमें आशा है कि सुप्रीम कोर्ट से पीड़ित परिवारों के घर तोड़ने पर जल्द से जल्द स्टे मिलेगा और इन्हें राहत मिल सकेगी।"

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