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सड़क पर शव रखकर अब नहीं कर सकेंगे प्रदर्शन, हरियाणा सरकार ला रही नया कानून, जानें कितनी होगी सजा

विरोध प्रदर्शन के लिए शवों का इस्तेमाल करने पर परिवार के सदस्यों और व्यक्तियों के लिए जेल और जुर्माने का प्रावधान है।
Written by: वरिंदर भाटिया | Edited By: shruti srivastava
चंडीगढ़ | Updated: February 02, 2024 14:15 IST
सड़क पर शव रखकर अब नहीं कर सकेंगे प्रदर्शन  हरियाणा सरकार ला रही नया कानून  जानें कितनी होगी सजा
प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर। फोटो-(इंडियन एक्‍सप्रेस)।
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हरियाणा सरकार एक ऐसा कानून बनाने वाली है, जिसके बाद लोग अपनी मांगों को मनवाने के लिए शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन नहीं कर पाएंगे। हरियाणा सरकार नया कानून लाने वाली है जो सड़क या हाईवे सहित किसी भी जगह पर विरोध प्रदर्शन में शवों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाएगा। ऐसे में अगर परिवार के सदस्यों को विरोध प्रदर्शन के लिए मृत रिश्तेदार के शव का इस्तेमाल करने का दोषी पाया जाता है तो जिला प्रशासन पुलिस के सहयोग से शव को कब्जे में लेगा और अंतिम संस्कार करेगा।

अगर पुलिस मृतक के परिवार को विरोध प्रदर्शन के लिए शव का उपयोग करते हुए पाती है, तो परिवार के दोनों सदस्यों और इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को कम से कम छह महीने की कैद की सजा होगी, जिसे पांच साल तक बढ़ाया जा सकता है। साथ ही 5000 रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। ऐसे सभी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे।

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'हरियाणा शव सम्मान विधेयक 2023'

ये प्रावधान प्रस्तावित 'हरियाणा शव सम्मान विधेयक 2023' का हिस्सा हैं, जिसे 20 फरवरी से शुरू होने वाले हरियाणा विधानसभा के आगामी बजट सत्र में चर्चा के लिए निर्धारित किया गया है। विधेयक के ड्राफ्ट को राज्य मंत्रिमंडल से मंजूरी मिल गई है।

बिल के ड्राफ्ट के अनुसार, "सेक्शन 6 में कहा गया है कि परिवार के सदस्यों को शव का इस्तेमाल प्रदर्शन के लिए नहीं करना चाहिए या किसी अन्य व्यक्ति को इसके लिए सहमति नहीं देनी चाहिए।"शव रखकर प्रदर्शन करने पर प्रदर्शनकारियों से शव कब्जे में लेकर परिजनों की उपस्थिति में प्रशासन अंतिम संस्कार करवाएगा। हालांकि, परिजनों को पहले प्रशासन की तरफ से मनाया जाएगा।

सेक्शन 7 और 8 में शव को जब्त करने और अंतिम संस्कार करने के लिए पुलिस और कार्यकारी मजिस्ट्रेट की शक्तियों का वर्णन किया गया है। सेक्शन 7 बताता है कि पुलिस को शव को अपने कब्जे में लेना चाहिए और तुरंत कार्यकारी मजिस्ट्रेट और जिला पुलिस अधीक्षक को सूचित करना चाहिए।

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पुलिस और सरकार कर देगी अंतिम संस्कार

विधेयक इस बात पर जोर देता है कि अगर परिवार के सदस्य नोटिस मिलने के बाद भी ऐसा करते हैं, तो सार्वजनिक प्राधिकरण अंतिम संस्कार करेगा। विधेयक में हिरासत में मौत के मामलों में पोस्टमार्टम परीक्षाओं की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी को अनिवार्य बनाया गया है। साथ ही लावारिस शवों के आनुवंशिक डेटा और जैविक नमूनों के लिए एक डेटा बैंक की स्थापना का भी जिक्र है।

शव सम्मान विधेयक के तहत सजा का प्रावधान

सेक्शन 16 से 21 में विभिन्न अपराधों के लिए दंड का जिक्र है, जिसमें विरोध प्रदर्शन के लिए शवों का इस्तेमाल करने पर परिवार के सदस्यों और व्यक्तियों के लिए जेल और जुर्माने का प्रावधान है। अधिनियम के तहत सभी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती घोषित किये गये हैं। इस अधिनियम का उद्देश्य प्रत्येक मृत व्यक्ति के समुदाय या धार्मिक परंपराओं के अनुसार समय पर और सम्मानजनक अंतिम संस्कार के अधिकार पर जोर देना है।

शव सम्मान विधेयक में ये प्रावधान लाया जा रहा है कि अगर शव रखकर कोई प्रदर्शन करता है तो सभी लोगों पर मुकदमा चलाया जाएगा। साथ ही दोष सिद्ध होने पर एक साल की कैद और 50 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।

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