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महाराष्ट्र और अरुणाचल में भूकंप के तेज झटके, सुबह-सुबह घर से बाहर भागे लोग

महाराष्ट्र के हिंगोली में भूकंप का पहला झटका सुबह 6:08 पर महसूस किया गया, जिसकी तीव्रता 4.5 थी।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: Nitesh Dubey
नई दिल्ली | Updated: March 21, 2024 08:42 IST
महाराष्ट्र और अरुणाचल में भूकंप के तेज झटके  सुबह सुबह घर से बाहर भागे लोग
महाराष्ट्र और अरुणाचल प्रदेश में भूकंप के झटके महसूस किए गए।
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महाराष्ट्र और अरुणाचल प्रदेश में सुबह-सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। झटके इतने तेज थे कि रात को ही घर से बाहर लोग निकल गए। अरुणाचल प्रदेश में गुरुवार तड़के सुबह 3 बजकर 40 मिनट पर भूकंप का झटका महसूस किया गया। इसकी तीव्रता 3.4 थी।

महाराष्ट्र में भी आया भूकंप

वहीं महाराष्ट्र में एक के बाद एक दो झटके महसूस किए गए। महाराष्ट्र के हिंगोली में भूकंप का पहला झटका सुबह 6:08 पर महसूस किया गया, जिसकी तीव्रता 4.5 थी। तो वहीं ठीक 11 मिनट बाद 6:19 पर भूकंप का दूसरा झटका महसूस किया गया। इसकी तीव्रता 3.6 थी। जैसे ही लोगों को भूकंप का अंदेशा हुआ, तुरंत लोग अपने घर से बाहर निकल गए। हालांकि किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं हुआ है।

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पाकिस्तान में भूकंप

इससे पहले 20 मार्च को पाकिस्तान में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए थे। भूकंप का केंद्र पश्चिमी पाकिस्तान स्थित पाकिस्तान-अफगानिस्तान की सीमा थी। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक बुधवार की देर रात करीब 2:57 बजे भूकंप के झटके मससूस किए गए। रिक्टर स्केल तीव्रता 5.5 तीव्रता थी। हालांकि इससे किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ।

अफगानिस्तान में भी कांपी धरती

वहीं अफगानिस्तान के काबुल में भी बुधवार को भूकंप आया था। इसकी तीव्रता 5.5 थी। सिर्फ एक नहीं बल्कि तीन बार भूकंप आया था। इससे पहले 19 मार्च की शाम 7 बजकर 30 मिनट पर अफगानिस्तान में 4.0 तीव्रता का भूकंप आया था। वहीं काबुल में सुबह 06 बजकर 05 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। यानी दो दिनों में अफगानिस्तान में तीन बार भूकंप के झटके महसूस किए गए।

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क्यों आता है भूकंप?

भूकंप तभी आता है जब उस जगह के ठीक नीचे प्लेटों में हलचल होती है। इस हलचल से ऊर्जा बाहर निकलती है। जमीन के नीचे रहने वाली सातों प्लेट्स लगातार घूमती रहती हैं। जिस जगह ये ज्यादा टकराती हैं, उस जगह को फॉल्ट लाइन कहते हैं। इन प्लेटों के बार-बार टकराने से इनके कोने मुड़ जाते हैं। दबाव बढ़ने पर प्लेट्स टूट जाती हैं। इसके नीचे जो ऊर्जा होती है, वह बाहर आने का रास्ता खोजती हैं और इस उथल-पुथल से भूकंप आता है।

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