scorecardresearch
For the best experience, open
https://m.jansatta.com
on your mobile browser.

कोलकाता पुलिस की बातों को करें नजरंदाज… छेड़छाड़ के आरोपों के बीच बंगाल राज्यपाल ने राजभवन के कर्मचारियों को लिखा पत्र

राज्यपाल ने राजभवन के कर्मचारियों से यह भी कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान राज्यपाल के खिलाफ कोई आपराधिक कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती।
Written by: शांतनु चौधरी
नई दिल्ली | Updated: May 05, 2024 18:53 IST
कोलकाता पुलिस की बातों को करें नजरंदाज… छेड़छाड़ के आरोपों के बीच बंगाल राज्यपाल ने राजभवन के कर्मचारियों को लिखा पत्र
बंगाल के राज्यपाल पर एक महिला ने छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। (Express File Photo)
Advertisement

बंगाल के राज्यपाल सी वी आनंद बोस ने रविवार को राजभवन के कर्मचारियों को पत्र लिखा। पत्र में उन्होंने अपने खिलाफ लगाए गए छेड़छाड़ के आरोपों के संबंध में पुलिस के किसी भी कम्युनिकेशन को नजरअंदाज करने को कहा। राज्यपाल ने राजभवन के कर्मचारियों से यह भी कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान राज्यपाल के खिलाफ कोई आपराधिक कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती।

महिला ने लगाया है छेड़छाड़ का आरोप

राज्यपाल का यह कदम कोलकाता पुलिस द्वारा राजभवन में एक संविदा महिला कर्मचारी द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने के एक दिन बाद आया है। कोलकाता पुलिस के सूत्रों ने बताया कि कमिश्नर (सेंट्रल) इंदिरा मुखर्जी के नेतृत्व में विशेष टीम ने घटना की पूछताछ शुरू कर दी है। विशेष जांच टीम में आठ वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हैं।

Advertisement

महिला कर्मचारी ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल पर राजभवन में छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए कोलकाता पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। राज्यपाल ने आरोपों को 'बेतुका नाटक' बताया और कहा कि कोई भी उन्हें 'भ्रष्टाचार को उजागर करने और हिंसा पर अंकुश लगाने के उनके दृढ़ प्रयासों' से नहीं रोक पाएगा।

राज्यपाल आनंद बोस ने लिखा पत्र

Advertisement

राजभवन के कर्मचारियों को रविवार को लिखे पत्र में राज्यपाल आनंद बोस ने कहा, "मीडिया की रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि पुलिस घटना की जांच करने का प्रस्ताव रखती है और वे राजभवन के कर्मचारियों की जांच करेंगे। यह भी खबर है कि जांच टीम राजभवन से सीसीटीवी फुटेज इकट्ठा करने का इरादा रखती है। सवाल यह उठता है कि क्या भारत के संविधान की धारा 361(2) और (3) के तहत राज्यपाल को मिली छूट के मद्देनजर पुलिस जांच कर सकती है और सबूत इकट्ठा कर सकती है?

Advertisement

संविधान के अनुच्छेद 361 (2) के अनुसार राष्ट्रपति या किसी राज्य के राज्यपाल के खिलाफ उनके कार्यकाल के दौरान किसी भी अदालत में कोई आपराधिक कार्यवाही शुरू या जारी नहीं रखी जा सकती है।

सीवी बोस ने लिखा, “चूंकि राज्यपाल को उनके खिलाफ शुरू की गई या जारी रखने वाली किसी भी आपराधिक कार्यवाही से संवैधानिक छूट दी गई है, इसलिए यह तर्कसंगत है कि पुलिस किसी भी तरह से मामले की जांच/पूछताछ नहीं कर सकती है। कोई भी अदालत अंतिम रिपोर्ट का संज्ञान नहीं ले सकती, क्योंकि यह भारत के संविधान की धारा 361 का अपमान होगा।"

Advertisement
Tags :
Advertisement
Jansatta.com पर पढ़े ताज़ा एजुकेशन समाचार (Education News), लेटेस्ट हिंदी समाचार (Hindi News), बॉलीवुड, खेल, क्रिकेट, राजनीति, धर्म और शिक्षा से जुड़ी हर ख़बर। समय पर अपडेट और हिंदी ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए जनसत्ता की हिंदी समाचार ऐप डाउनलोड करके अपने समाचार अनुभव को बेहतर बनाएं ।
tlbr_img1 चुनाव tlbr_img2 Shorts tlbr_img3 गैलरी tlbr_img4 वीडियो