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'बदरुद्दीन अजमल चुनाव से पहले कर लें शादी वरना जेल जाना पड़ेगा', असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का बयान

बदरुद्दीन अजमल ने कहा था--'भाजपा मुसलमानों को भड़काने की कोशिश कर रही है और अगर वह दोबारा शादी करना चाहते हैं तो उन्हें कोई नहीं रोक सकता क्योंकि उनका धर्म उन्हें ऐसा करने की इजाजत देता है।'
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: Mohammad Qasim
नई दिल्ली | Updated: March 31, 2024 09:56 IST
 बदरुद्दीन अजमल चुनाव से पहले कर लें शादी वरना जेल जाना पड़ेगा   असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का बयान
असम सीएम ने एआईडीयूएफ सांसद बदरुद्दीन अजमल पर निशाना साधा (फोटो : पीटीआई)
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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को कहा कि एआईयूडीएफ सांसद बदरुद्दीन अजमल अगर दोबारा शादी करना चाहते हैं, तो उन्हें चुनाव से पहले ऐसा करना चाहिए क्योंकि उसके बाद समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू हो जाएगी और उन्हें जेल जाना पड़ जाएगा। असम सीएम का यह बयान बदरुद्दीन अजमल के उस बयान के बाद सामने आया है जिसमें उन्होंने बीजेपी पर हमला बोला था।

बदरुद्दीन अजमल ने कहा था--"भाजपा मुसलमानों को भड़काने की कोशिश कर रही है और अगर वह दोबारा शादी करना चाहते हैं तो उन्हें कोई नहीं रोक सकता क्योंकि उनका धर्म उन्हें ऐसा करने की इजाजत देता है।"

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क्या बोले हिमंत बिस्वा सरमा?

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने उदलगुड़ी में एक चुनावी सभा के दौरान कहा--‘‘चुनाव के बाद यूसीसी लागू हो जाएगा और अगर वह (अजमल) दोबारा शादी करेंगे तो उन्हें जेल जाना पड़ेगा क्योंकि सभी के लिए एक से अधिक शादियां गैर-कानूनी घोषित कर दी जाएंगी।’’

पिछले महीने, असम मंत्रिमंडल ने राज्य में बाल विवाह को समाप्त करने और यूसीसी के कार्यान्वयन की दिशा में एक कदम के रूप में असम मुस्लिम विवाह एवं तलाक पंजीकरण अधिनियम, 1935 को निरस्त करने के निर्णय को मंजूरी दी थी।

इसके अलावा असम सीएम ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा--"2026 तक असम कांग्रेस में कोई भी हिंदू नहीं रहेगा और लगभग सभी मुसलमान भी 2032 तक पार्टी से अलग हो जाएंगे. हम रविवार को राजीव भवन में एक ब्रांच खोल रहे हैं, जिसे महानगर बीजेपी कहा जाएगा. इस दौरान कई कांग्रेस नेता बीजेपी में शामिल होंगे।"

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क्या है UCC?

यूसीसीका के तहत समाज के सभी वर्गों, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो, के साथ इस कानून के तहत समान व्यवहार किया जाएगा, जिसमें विवाह, तलाक, भरण-पोषण, विरासत, गोद लेना और संपत्ति उत्तराधिकार जैसे मामले शामिल होंगे।

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