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Mutual Fund: मल्टी-एसेट फंड में क्यों करें निवेश? सबसे अच्छी स्कीम चुनने के लिए इन 5 बातों पर दें ध्यान

Why invest in Multi Asset Funds: मल्टी-एसेट फंड में निवेश की सबसे बड़ी खूबी डायवर्सिफिकेशन है, जिसकी वजह से रिस्क और रिटर्न का संतुलन बेहतर रहता है.
Written by: Viplav Rahi
July 05, 2024 18:46 IST
mutual fund  मल्टी एसेट फंड में क्यों करें निवेश  सबसे अच्छी स्कीम चुनने के लिए इन 5 बातों पर दें ध्यान
मल्टी-एसेट फंड की सबसे बड़ी खूबी अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश करना है. (Image : Pixabay)
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Why invest in Multi asset funds : मल्टी-एसेट फंड, हाइब्रिड म्यूचुअल फंड की कैटेगरी में आते हैं। इन फंड्स के जरिए अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश किया जाता है। ये फंड उन निवेशकों के लिए बेहतर विकल्प हैं, जो एक ही फंड में पैसे लगाकर करके अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश करने का फायदा लेना चाहते हैं। इससे उन्हें एसेट डायवर्सिफिकेशन का लाभ मिलता है। इनमें निवेश का सबसे बड़ा फायदा जोखिम और मुनाफे का बेहतर संतुलन है। दरअसल ये फंड रिस्क और रिटर्न के बीच बेहतर तालमेल बनाने के लिए इक्विटी, बॉन्ड, कमोडिटी और कभी-कभी रियल एस्टेट में भी निवेश करते हैं। मल्टी-एसेट फंड में निवेश का फैसला करने से पहले उनके प्रदर्शन का आकलन करना जरूरी है, जिसके लिए कई पहलुओं पर गौर करना पड़ता है।

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1. फंड की इनवेस्टमेंट स्ट्रैटजी

मल्टी-एसेट फंड को सही ढंग से समझने के लिए सबसे पहले उसकी इनवेस्टमेंट स्ट्रैटजी को जानना जरूरी है। किसी भी म्यूचुअल फंड की ग्रोथ, मुनाफा और उसका बैलेंस इसी रणनीति पर निर्भर होता है। सेबी की डिफिनिशन यानी परिभाषा के मुताबिक हाइब्रिड म्यूचुअल फंड की कैटेगरी में आने वाले मल्टी एसेट फंड के लिए कम से कम 3 एसेट क्लास में निवेश करना जरूरी है। इनमें से हरेक एसेट क्लास में कम से कम 10 फीसदी इनवेस्टमेंट होना चाहिए। इस हिसाब से देखें तो सिर्फ 30 फीसदी फंड का एलोकेशन ही सेबी के नियम से बंधा हुआ है। बाकी फंड के निवेश का फैसला फंड मैनेजर अपनी सुविधा के हिसाब से कर सकते हैं। इसलिए यह देखना जरूरी है कि आप जिस फंड का चुनाव करने जा रहे हैं, उसके मैनेजर की निवेश की रणनीति क्या है। क्योंकि उस फंड का रिस्क-रिटर्न का संतुलन इसी रणनीति पर टिका होता है। जिस मल्टी-एसेट फंड के पोर्टफोलियो में इक्विटी का हिस्सा अधिक होगा, उसमें हाई रिटर्न की गुंजाइश रहेगी, लेकिन रिस्क भी ज्यादा होगा। वहीं, बॉन्ड या दूसरे स्थिर या फिक्स्ड रिटर्न वाले एसेट में निवेश से रिस्क कम होगा, लेकिन रिटर्न औसत मिलेगा।

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2. पिछले प्रदर्शन पर नजर

हालांकि पिछला प्रदर्शन, भविष्य में वैसे ही रिटर्न देने की गारंटी नहीं है, लेकिन उससे यह पता चलता है कि फंड मैनेजर की स्ट्रैटजी क्या है और बाजार की अगल-अलग परिस्थितियों में उसकी रणनीति कितनी सफल रही है। अलग-अलग समय पर फंड के प्रदर्शन की तुलना उसके बेंचमार्क और समान कैटेगरी के दूसरे फंड्स से करनी चाहिए। इससे पता चलेगा कि फंड मैनेजर ने बेंचमार्क और दूसरे फंड्स की तुलना में लगातार बेहतर प्रदर्शन दिखाया है या पीछे रहा है। लगातार अच्छा प्रदर्शन, बेहतर मैनेजमेंट और रणनीति का संकेत दे सकता है।

3. एक्सपेंस रेशियो और फीस का आकलन

किसी म्यूचुअल फंड को मैनेज करने की एक लागत होती है, जिसमें मैनेजमेंट फीस, एडमिनिस्ट्रेटिव फीस और अन्य ऑपरेशनल कॉस्ट शामिल हैं। निवेशक को यह कॉस्ट पंड के एक्सपेंस रेशियो और अन्य फीस के रूप में चुकानी पड़ती है। यह लागत निवेशक के नेट रिटर्न पर असर डालती है। इसलिए फंड के पिछले रिटर्न के साथ ही साथ उसके एक्सपेंस रेशियो पर भी गौर करना जरूरी है। कम एक्सपेंस रेशियो वाले फंड में निवेश करना आम तौर पर बेहतर रहता है। लेकिन इस लागत को हमेशा फंड प्रदर्शन के साथ रखकर देखना चाहिए। अगर कोई फंड लगातार बेहतर रिटर्न दे रहा है, तो उसकी फीस कुछ अधिक होना भी वाजिब माना जा सकता है।

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4. फंड मैनेजर का ट्रैक रिकॉर्ड 

मल्टी-एसेट फंड का मूल्यांकन करने में फंड मैनेजर का अनुभव और ट्रैक रिकॉर्ड महत्वपूर्ण है। एक कुशल मैनेजर बाजार की स्थितियों के आधार पर एसेट अलोकेशन और एडजस्टमेंट पर सही फैसला ले सकता है। फंड के साथ मैनेजर के पिछले ट्रैक रिकॉर्ड यानी अन्य फंडों के मैनेजमेंट में उनके प्रदर्शन को भी देखना चाहिए।

5. कितना अच्छा है डायवर्सिफिकेशन

जैसा हमने पहले भी जिक्र किया है, मल्टी-एसेट फंड का सबसे बड़ा फायदा उसका डायवर्सिफाइड होना यानी अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश है। इससे निवेश पर रिस्क को कम करने में मदद मिलती है। इसलिए फंड का चुनाव करते समय यह भी जरूर देखें कि उसका पोर्टफोलियो सिर्फ एसेट क्लास के मामले में ही नहीं, अलग-अलग सेक्टर्स और भौगोलिक क्षेत्रों में निवेश के लिहाज से भी कितनी अच्छी तरह से डायवर्सिफाइड है। बेहतर ढंग से डायवर्सिफाइड फंड किसी एक एसेट क्लास या बाजार में खराब प्रदर्शन के असर को कम करके बेहतर रिटर्न दे सकता है।

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3, 5 और 10 साल में कैसा रहा है रिटर्न 

अगर रिटर्न के लिहाज से टॉप 5 मल्टी एसेट फंड्स के प्रदर्शन पर नजर डालें तो इन स्कीम्स ने पिछले तीन साल में औसतन 19.46 फीसदी से लेकर 25.76 फीसदी तक सालाना रिटर्न दिया है। वहीं, 5 साल के दौरान टॉप परफॉर्मेंस दिखाने वाले फंड्स का सालाना रिटर्न 17.52 फीसदी से 30.65 फीसदी के बीच है। 10 साल के टॉप परफॉर्मेंस वाले 5 मल्टी एसेट फंड्स का रिटर्न 13.36 फीसदी से 18.08 फीसदी तक रहा है।

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