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हर भारतीय है सैनिक: शहीदों के लिए 1000 KM दौड़ेंगे सेना के पूर्व अफसर-जवान, बाहरी संग देश के भीतरी दुश्मनों से भी करेंगे रक्षा

अल्ट्रा मैराथन गुजरात के दीव से शुरू हुई थी। यह 5 चरणों में होनी है। आखिरी चरण कश्मीर में होगा और मैराथन ऊधमपुर में पूरी होगी।
Written by: खेल डेस्‍क | Edited By: ALOK SRIVASTAVA
Updated: March 19, 2024 16:42 IST
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देश के लिए कुर्बान होने वाले सैन्य अधिकारियों और जवानों को शृद्धांजलि देने और लोगों को जागरूक करने के लिए कर्नल मंदीप सिंह मान, कर्नल राजेश दत्ता और मास्टर वारंट आफिसर सुनील कुमार शर्मा की अगुआई में सेवानिवृत्त हो चुके करीब 18 सैन्य दिग्गजों ने 40 दिन में 1000 किमी ऐतिहासिक अल्ट्रा मैराथन पूरी करने की ठानी है। इसमें से वे 600 से ज्यादा किमी की रेस पूरी भी कर चुके हैं। यह अल्ट्रा मैराथन 5 चरणों (लेग) में पूरी होगी।

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यह अल्ट्रा मैराथन मार्च के पहले सप्ताह में गुजरात के दीव से शुरू हुई थी और अप्रैल के दूसरे सप्ताह में कश्मीर में जाकर खत्म होगी। कश्मीर लेग में ऊधमपुर से मैराथन शुरू होगी और वहीं पर खत्म होगी। इस अल्ट्रा मैराथन की खास बात यह है कि इसमें रिटायर्ड सैन्य अफसर या सैनिक ही हिस्सा ले रहे हैं। इसमें हिस्सा लेने वाले हर धावक की उम्र 60 साल से ज्यादा ही है।

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60 साल के बाद फिर से खुद को तैयार करना होगा: कर्नल मंदीप सिंह मान

कर्नल मंदीप सिंह मान ने जनसत्ता.कॉम को बताया, ‘देश पर जान न्योछावर करने वाले सैनिकों को शृद्धांजलि देने के अलावा इस मैराथन का उद्देश्य स्वस्थ और फिट भारत का संदेश भी देना है। साथ ही सीमावर्ती आबादी के साथ जुड़ने और साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देना है। सेवानिवृत्त हो चुके लोगों को यह विश्वास दिलाना है कि 60 साल की उम्र के बाद भी ऐसी साहसिक गतिविधियां की जा सकती हैं। 60 की उम्र में आपको खुद को रिटायर नहीं मानना चाहिए, बल्कि फिर से खुद को तैयार करना चाहिए।’

बार्डर वाला इलाका चुनने की है खास वजह

अल्ट्रा मैराथन के लिए बार्डर का इलाका चुनने की कोई खास वजह के सवाल पर कर्नल मान ने बताया, ‘बार्डर का इलाका काफी खुला होता है। वहां ज्यादा प्रदूषण नहीं होता। ज्यादा ट्रैफिक नहीं होता। खुला होता है। जरूरत पड़ने पर हम वहां पर अपने फौजी भाइयों की भी मदद ले सकते हैं। शहरों में प्रदूषण और ट्रैफिक इतना ज्यादा है कि वहां बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता।’

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दिक्कतें तो आती हैं, लेकिन उनसे पार पाना है: कर्नल मंदीप सिंह मान

मैराथन के दौरान आने वाली चुनौतियों के बारे में कर्नल मान ने बताया, ‘हां दिक्कतें तो आती हैं, क्योंकि किसी के पैर में सूजन हो जाती है। किसी को मेडिकल हेल्प चाहिए होती है। तो यह सब तो होता है, लेकिन यह कुछ ऐसा नहीं है जिस पर काबू नहीं पाया जा सके। कई ऐसे लोग थे जो रेस पूरी नहीं कर पा रहे थे तो फिर हमने उनको गाड़ी में बैठा दिया।’

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कर्नल राजेश दत्ता ने बताया, ‘इस मैराथन ने मुझे लोगों तक ‘हर भारतीय एक सैनिक है’ का संदेश पहुंचाने का मौका दिया। मेरा मानना है कि हर भारतीय न केवल बाहरी खतरे, बल्कि बल्कि आंतरिक दुश्मनों (भ्रष्टाचार, प्रदूषण और अन्य बुराइयों) से भी देश और मानवता की रक्षा कर सकता है।’

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शहीदों को शृद्धांजलि देने के लिए पूर्व सैन्य अफसर और सैनिक ने 1000 किलोमीटर की अल्ट्रा मैराथन पर निकले हैं।

कर्नल मंदीप सिंह मान, कर्नल राजेश दत्ता और मास्टर वारंट ऑफिसर एसके शर्मा इस अल्ट्रा मैराथन के सभी लेग में हिस्सा लेंगे, मतलब ये तीनों 1000 किलोमीटर की रेस पूरी करेंगे। वहीं, गुजरात लेग के दौरान मेजर जनरल देवेंद्र कपूर, कर्नल पीकेएस घुम्मान, डॉ. संध्या एलेटी ने करीब 300 किमी की रेस पूरी की। मेजर जनरल समय की कमी के कारण दो दिन ही गुजरात लेग में हिस्सा पाए। राजस्थान लेग में कर्नल सुरेश राना और मेजर मनोज भी रेस में हिस्सा ले रहे हैं। सुरेश राना कश्मीर लेग का भी हिस्सा रहेंगे।

हर भारतीय है सैनिक: शहीदों के लिए 1000 KM दौड़ेंगे सेना के पूर्व अफसर-जवान, बाहरी के साथ देश के भीतरी दुश्मनों से भी करेंगे रक्षा
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