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भारतीय हॉकी टीम की कप्तान के गांव में पीने का पानी, मोबाइल टावर, पक्के घर और सड़क नहीं, कहा- PM आवास योजना में हो रहा ईसाइयों के साथ भेदभाव

झारखंड की सलीमा टेटे भारतीय हॉकी टीम की कप्तान हैं। वह भारत के लिए 100 से ज्यादा मैच खेल चुकी है।
Written by: खेल डेस्‍क | Edited By: Riya Kasana
नई दिल्ली | Updated: July 09, 2024 12:26 IST
भारतीय हॉकी टीम की कप्तान के गांव में पीने का पानी  मोबाइल टावर  पक्के घर और सड़क नहीं  कहा  pm आवास योजना में हो रहा ईसाइयों के साथ भेदभाव
सलीमा टेटे भारतीय टीम की कप्तान हैं।
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झारखंड के कई खिलाड़ियों ने भारतीय हॉकी टीम में जगह बनाई है। इस राज्य से अब तक 100 से ज्यादा खिलाड़ी भारत लिए खेल चुके हैं। वहीं सात खिलाड़ी ओलंपिक में भी देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। मौजूदा सीनियर महिला टीम की कप्तान सलीमा टेटे भी इस राज्य से हैं। हालांकि विडंबना यह है कि जो खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर रही है उसके गांव में न पीने का पानी है, न मोबाइल नेटवर्क है, न पक्की सड़क है और न ही पक्का घर। यह हाल सिर्फ सलीमा टेटे का ही नहीं बल्कि सीनियर टीम के कुछ और खिलाड़ियों का भी है।

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सलीमा टेटे के परिवार के पास नहीं पीने का पानी

सलीमा टेटे के पिता सुलक्ष्ण के हवाले से इंडिया टुडे मैग्जीन ने लिखा कि उनके गांव में जो सरकारी टंकी है उसका पानी पीने लायक नहीं है। इस पानी से दाल तक नहीं पकती है। ऐसे में सलीमा टेटे का पूरा परिवार तीन किलोमीटर पैदल चलकर पीने का पानी लाता है। परिवार के सभी लोग पानी लाने जाते हैं तभी दिन भर का काम चल पाता है।

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गांव में नहीं मोबाइल नेटवर्क

सिर्फ पानी नहीं बल्कि सलीमा के गांव में मोबाइल नेटवर्क भी नहीं है। यही कारण है कि जब सलीमा अपने घर पर जाती है तो बाकी दुनिया से पूरी तरह कट जाती है। उनसे फोन, इमेल और किसी भी जरिए से संपर्क करना बहुत मुश्किल हो जाता है। यहां तक कि जब भी सलीमा कोई अहम मैच जीत जाती हैं तो भी अपने परिवार से बात नहीं कर पाती हैं। सलीमा के गांव में बिजली की भी बहुत परेशानी है। वहां एक बार ट्रांसफॉर्मर खराब होने के बाद एक हफ्ते तक बिजली गायब हो जाती है।

पक्के घर के इंतजार में है सलीमा

सबसे परेशानी की बात यह है कि सलीमा का परिवार अब भी खपरैल के घर में रहता है। उनके गांव में पीएम आवास योजना के तहत घर तो दिए गए लेकिन सलीमा के परिवार को इसका फायदा नहीं मिला। सलीमा ने आरोप लगाया कि वह ईसाई है और इसलिए उनके साथ यह भेदभाव हो रहा है। उन्होंने कहा, 'हमें जात-पात का नहीं देखना चाहिए। हम सभी एक जैसे हैं। मेरे गांव में ईसाई परिवारों के साथ भेदभाव होता है। उन्हें पीएम आवास नहीं मिल रहा है।' टोक्यो ओलंपिक से वापस आने के बाद राज्य सरकार ने उन्हें घर देने का ऐलान किया था। सलीमा के मुताबिक उन्हें आज भी इसका इंतजार है।

सीनियर टीम में बतौर डिफेंडर खेलने वाली रोपनी कुमारी की भी यही कहानी है। उनका परिवार खपरैल के दो कमरों के घर में रहता है। रोपनी के पिता नहीं है और भाई विशाखापत्तनम में काम करता है। गांव में मां और भाभी रहती हैं। घर चलाने के लिए भाभी मजदूरी करती हैं। वहीं टीम की फॉरवर्ड खिलाड़ी ब्यूटी कुमारी का कहना है कि उनके गांव में तो पानी है न ही पानी लाने के पक्का रास्ता। बारिश के समय उन्हें पीने का पानी लाने में बहुंत दिक्कत होती है।'

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सिमडेगा के जिलाधिकारी का बयान

सिमडेगा के जिलाधिकारी अजय कुमार ने बताया कि मोबाइल कंपनी ज्यादा क्लाइंट होने पर ही नेटवर्क टावर लगाती है। इस जिले पर में बीएसएलएनल भी केवल 4G तक ही है। वहीं पानी की समस्या पर उन्होंने कहा, 'भूजल स्तर ऊपर-नीचे होने से यह समस्या आती है। साथ ही अजय कुमार यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि सलीमा टेटे के परिवार को अब तक आवास योजना के तहत घर क्यों नहीं मिला है वह इसका कारण पता लगवा रहे हैं।

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