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आर्थिक तंगी कहीं तोड़ न दे ओलंपिक मेडल का सपना, गुरविंदरवीर को गुमनामी के अंधेरे से बचने के लिए मदद की जरूरत

भारतीय स्प्रिंटर गुरविंदरवीर सिंह बिना किसी स्पॉन्सरशिप के नियमित प्रदर्शन करते आ रहे हैं।
Written by: Riya Kasana
नई दिल्ली | Updated: May 31, 2024 10:35 IST
आर्थिक तंगी कहीं तोड़ न दे ओलंपिक मेडल का सपना  गुरविंदरवीर को गुमनामी के अंधेरे से बचने के लिए मदद की जरूरत
गुरविंदर सिंह ने फेडरेशन कप में गोल्ड मेडल जीता।
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भारत ने अब तक ओलंपिक खेलों में एथलेटिक्स के ट्रैक इवेंट्स में मेडल हासिल नहीं किया है। भारत में कई प्रतिभाशाली एथलीट्स हैं जो इस मेडल के सूखे को खत्म करना चाहते हैं। इनमें से कुछ ऐसे हैं जिनके अंदर प्रतिभा तो है लेकिन एक वर्ल्ड चैंपियन बनने वाली बाकी चीजे नहीं। आज के समय में अगर हम किसी भी वर्ल्ड चैंपियन खिलाड़ी को देखें तो उनके पीछे एक पूरी टीम की मेहनत है। इस टीम में फिजियो, थेरेपिस्ट, मेंटल कंडीशनिंग कोच, ट्रेनर और नूट्रिशनिस्ट जैसे कई लोग होते हैं। भारत में एक आम और गरीब पृष्ठभूमि से आने वाले खिलाड़ियों के लिए यह सब सपना है। एक ऐसा सपना जो स्पॉन्सरशिप और सरकार के साथ के कारण पूरा हो सकता है।

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पंजाब के गुरविंदरवीर सिंह भी उन्हीं खिलाड़ियों में शामिल जिनकी प्रतिभा को स्पॉन्सरशिप की दरकार है। हाल ही में हुए फेडरेशन कप में 100 मीटर में गोल्ड जीतने वाले गुरविंदरवीर ने अब तक बिना किसी स्पॉन्सर और सरकारी मदद के सफलता हासिल की है लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का झंड़ा बुलंद करने के लिए उन्हें अब मदद की दरकार है। ऐसा न होने से वह भी गुमनामी के उस अंधेरे में गुम हो जाएंगे जहां जाकर न जाने देश की मेडल की कितनी उम्मीदें खो गई हैं।

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अच्छी डाइट

गुरविंदरवीर ने जनसत्ता.कॉम से बातचीत में बताया था कि उनके लिए अच्छी डाइट लेना मुश्किल काम है। एथलीट्स को जिन चीजों की जरूरत है उसका खर्च वह नहीं उठा सकते। स्पॉन्सर मिलने पर गुरविंदरवीर की यह परेशानी दूर हो जाएगी। उन्हें न सिर्फ एक अच्छा नूट्रिशनिस्ट से डाइट मिलेगी बल्कि डाइट में शामिल चीजों पर खर्च करने की उनकी चिंता भी दूर हो जाएगी।

ज्यादा से ज्यादा टूर्नामेंट्स में ले पाएंगे हिस्सा

गुरविंदरवीर के मुताबिक एक एथलीट के प्रदर्शन में सुधार के लिए यह काफी जरूरी है ज्यादा से ज्यादा टूर्नामेंट में हिस्सा लें। गुरविंदरवीर के लिए परेशानी यह है कि पैसों की कमी के कारण वह केवल भारत में होने वाले टूर्नामेंट्स में हिस्सा लेने के लिए मजबूर हैं। उनके मुताबिक स्पॉन्सरशिप मिलने से वह देश के बाहर होने वाले टूर्नामेंट्स में हिस्सा ले पाएंगे। उन्हें बाकी देशों के एथलीट्स के खेलने का मौका मिलेगा साथ ही साथ एक्सपोजर भी मिलेगा।

सफर के लिए नहीं होगी परेशानी

गुरविंदर सिंह के कोच सरबजीत ने बताया था कि उन्हें हर टूर्नामेंट के समय उन्हें खर्चे कि चिंता सताती रहती है। जहां एक ओर खिलाड़ियों का ध्यान टूर्नामेंट में प्रदर्शन पर रहता हैं वहीं दूसरी ओर उन्हें अपने रहने और खाने की चिंता भी सताती है। स्पॉन्सरशिप आने के बाद खिलाड़ियों की यह चिंता दूर हो जाएगी। वह पूरी तरह अपने प्रदर्शन पर ध्यान दे सकेंगे।

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मिलेगा अच्छा इंफ्रास्टकचर

एक एथलीट की ट्रेनिंग के लिए अच्छे इंफास्ट्रक्चर की भी बहुत जरूरत होती है। अब तक गुरविंदरवीर अपने कोच के बनाए जिम में किसी तरह अपनी ट्रेनिंग कर रहे हैं लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर का एथलीट बनने के लिए उन्हें इससे कहीं ज्यादा की जरूरत है। महंगी मशीन से लेकर एक अच्छे ट्रेनर का साथ है उनकी फिटनेस को और बेहतर बना सकता है।

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