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रिटायरमेंट से दो दिन पहले जज को थमाया नोटिस, फिर कानून को ताक पर रख रोक दी पेंशन, जानिए SC ने कैसे दिलाया इंसाफ

कानून के परे जाकर हाईकोर्ट ने जो फैसला लिया था उसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। साथ ही आदेश दिया कि महिला जज को 9 फीसदी ब्याज के साथ सारी रकम अदा हो।
Written by: shailendragautam
June 06, 2023 20:39 IST
रिटायरमेंट से दो दिन पहले जज को थमाया नोटिस  फिर कानून को ताक पर रख रोक दी पेंशन  जानिए sc ने कैसे दिलाया इंसाफ
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
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ओड़िशा में एक सिविल जज को रिटायरमेंट से महज दो दिन पहले नोटिस थमाकर हाईकोर्ट ने उनकी पेंशन के साथ वो तमाम लाभ रोक दिए जो नौकरी खत्म होने के बाद मिलते हैं। जज ने फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। कानून के परे जाकर हाईकोर्ट ने जो फैसला लिया था उसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। साथ ही आदेश दिया कि महिला जज को 9 फीसदी ब्याज के साथ सारी रकम अदा हो।

महिला जज 28 जून 2012 से लेकर 1 नवंबर 2015 तक ओड़िशा एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल के रजिस्ट्रार के तौर पर कार्यरत थीं। इसी दौरान केयरटेकर के पदों को लेकर विज्ञापन निकाला गया। तय प्रक्रिया पूरा करने के बाद सारे पदों को भर लिया गया। हालांकि सिलेक्शन प्रोसेज को पहले एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल में चुनौती दी गई और फिर ओड़िशा हाईकोर्ट में। दोनों जगह से रिट खारिज हो गई। लेकिन उसके बाद हाईकोर्ट ने एक विभागीय जांच शुरू करा दी। इसमें केयरटेकर के पद भरे जाने के प्रोसेज की जांच करने का आदेश दिया गया।

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केयरटेकर की भर्तियों को लेकर शुरू की गई थी विभागीय जांच

मामला यहीं तक रहता तो कोई बात नहीं थी। अलबत्ता रिटायरमेंट से दो दिन पहले महिला जज को एक चिट्ठी जारी करके कहा गया कि केयरटेकर की भर्तियों में भारी धांधली मिली है। फिर महिला जज के खिलाफ एक चार्जशीट दाखिल कर दी गई। हालांकि जज का कहना था कि उसे इस तरह से दंडित नहीं किया जा सकता, क्योंकि ओड़िशा सिविल सर्विस रूल्ज (पेंशन) 1992 के सेक्शन 7 के तहत ऐसे मामले में ही किसी न्यायिक अधिकारी को दोषी ठहराया जा सकता है जो नौकरी खत्म होने से कम से कम चार साल पहले का हो। ये मामला उस कैटेगरी में नहीं आता है। जबकि दूसरे पक्ष का कहना था कि महिला जज को नोटिस उनके नौकरी में रहते ही दे दिया गया था। चार्जशीट उस चेन का हिस्सा है। ऐसे में रूल 7 लागू नहीं होता।

सुप्रीम कोर्ट ने माना, हाईकोर्ट ने किया कानून का उल्लंघन

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बेला त्रिवेदी और जस्टिस अजय रस्तोगी ने सारे मामले को देखने के बाद माना कि महिला जज के खिलाफ लिया गया एक्शन रूल 7 का उल्लंघन है। लिहाजा विभागीय जांच के साथ अन्य कार्रवाई को सिरे से खारिज किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा कि जिस दिन से पेंशन और दूसरे लाभ रोके गए थे उसी दिन से 9 फीसदी ब्याज के साथ महिला जज को सारी रकम का भुगतान किया जाए।

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