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मोदी सरकार के लिए क्यों जरूरी हैं YSRCP-BJD, जानें क्या है राज्यसभा का गणित

राज्यसभा में दोनों ही दलों के पास अच्छी संख्या है और इसी कारण बिल पास कराने में सरकार को उनकी मदद लेनी पड़ सकती है।
Written by: ईएनएस | Edited By: Nitesh Dubey
नई दिल्ली | Updated: June 16, 2024 21:34 IST
मोदी सरकार के लिए क्यों जरूरी हैं ysrcp bjd  जानें क्या है राज्यसभा का गणित
मोदी सरकार के लिए राज्यसभा में जगन मोहन रेड्डी और नवीन पटनायक संकटमोचक साबित हो सकते हैं।
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आंध्र प्रदेश की वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) और ओडिशा की बीजू जनता दल (BJD) चुनाव हारने के बाद भी मोदी सरकार के लिए महत्वपूर्ण हैं। राज्यसभा में दोनों ही दलों के पास अच्छी संख्या है और इसी कारण बिल पास कराने में सरकार को उनकी मदद लेनी पड़ सकती है।

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बीजेडी-वाईएसआर के पास 20 राज्यसभा सांसद

वाईएसआरसीपी के पास 11 राज्यसभा सांसद हैं, जबकि बीजेडी के पास नौ सांसद हैं। वर्तमान में 245 सदस्यीय राज्यसभा में 117 एनडीए सांसद, 80 इंडिया गठबंधन के सांसद और 33 अन्य सांसद हैं। निर्वाचित सदस्यों के लिए 10 और मनोनीत सदस्यों के लिए पांच जगह खाली है। 10 निर्वाचित सदस्यों की जो जगह खाली है उसमे, भाजपा के पास सात, कांग्रेस के पास दो और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के पास एक सीट है। फिलहाल बीजेपी इनमें से कम से कम छह सीटें जीतने का दम रखती है। ऐसे परिदृश्य में एनडीए को कानून पारित करने के लिए दूसरों के समर्थन की आवश्यकता नहीं होगी, लेकिन वाईएसआरसीपी और बीजेडी का समर्थन उसे आरामदायक स्थिति में रखेगा।

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बीजेडी ने अभी तक अपनी राज्यसभा रणनीति के बारे में बात नहीं की है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में पार्टी ज्यादातर संसद में भाजपा के साथ गठबंधन करती रही है। वहीं वाईएसआरसीपी ने कहा है कि वह भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को मुद्दा-आधारित समर्थन देगी। पिछले हफ्ते दिल्ली में वाईएसआरसीपी नेता वी विजयसाई रेड्डी ने केंद्र सरकार से आंध्र प्रदेश में चुनाव-संबंधी हिंसा का जायजा लेने के लिए कहा और कहा कि एनडीए को राज्यसभा में बिल पारित करने के लिए हमारी संख्या की आवश्यकता होगी।

वाईएसआरसीपी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बीजेपी के बाद एनडीए की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी टीडीपी पर चुनाव के दौरान ज्यादतियां करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, ''उन्हें (भाजपा को) हमारी शिकायत पर ध्यान देना होगा क्योंकि लोकसभा और राज्यसभा दोनों में मिलाकर हमारे पास 15 सांसद हैं। यह टीडीपी की संख्या से सिर्फ एक सांसद कम है।''

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TDP पर वाईएसआर ने लगाया है हिंसा का आरोप

टीडीपी ने आंध्र प्रदेश में विधानसभा चुनावों में 135 सीटें और 16 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल की। वाईएसआरसीपी 11 विधानसभा सीटों पर सिमट गई और लोकसभा में उसके चार सांसद हैं। वाईएसआरसीपी ने स्पष्ट किया है कि वह एनडीए या इंडिया गठबंधन को बिना शर्त समर्थन देने को तैयार नहीं है। रेड्डी ने कहा हम उन मामलों का समर्थन करेंगे जो देश के हित में हैं। उन्होंने कहा कि वाईएसआरसीपी के फैसले संवैधानिक मूल्यों पर आधारित होंगे।

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वाईएसआरसीपी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वाईएसआरसीपी समान नागरिक संहिता (UCC) पर किसी भी कानून का समर्थन नहीं करेगी। रेड्डी ने कहा, "चुनाव से पहले ही हमने स्पष्ट कर दिया था कि हम यूसीसी का समर्थन नहीं करेंगे।" हालांकि पार्टी ने यह सार्वजनिक नहीं किया है कि क्या वह 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' का समर्थन करेगी या नही। रेड्डी ने कहा कि इसपर निर्णय बाद में लिया जाएगा। वहीं बीजेडी ने भी अभी तक यूसीसी या 'वन नेशन, वन इलेक्शन पर अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है।

पिछली लोकसभा के कार्यकाल के दौरान वाईएसआरसीपी और बीजेडी ने दोनों सदनों में अनुच्छेद 370 को निरस्त करने और नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) जैसे कानून पारित करने में भाजपा का समर्थन किया था। हालांकि वाईएसआरसीपी ने अपने रुख पर फिर से विचार किया और मार्च में कहा कि वह मौजूदा प्रारूप में CAA का समर्थन नहीं करती है। इससे पहले पार्टी ने आंध्र प्रदेश में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) का विरोध किया था। तीन तलाक पर बीजेडी ने बीजेपी का समर्थन किया जबकि वाईएसआरसीपी ने इसका विरोध किया। हालांकि वाईएसआरसीपी ने भाजपा सरकार के विवादास्पद कृषि कानूनों का समर्थन किया, जिन्हें किसानों के साल भर के विरोध के बाद 2021 में निरस्त कर दिया गया था। बीजेडी ने भी कृषि कानूनों का विरोध किया था।

राज्यसभा में जो अन्य दल अपनी बात रखेंगे उनमें 26 सांसदों वाली कांग्रेस और 13 सांसदों वाली तृणमूल कांग्रेस शामिल हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) और DMK (जो दोनों इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं) के पास 10-10 सदस्य हैं। राज्यसभा सदस्यों वाली अन्य प्रमुख पार्टियों में पांच सांसदों वाली भारत राष्ट्र समिति शामिल है। सीपीआई (एम) और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के पास पांच-पांच सदस्य, AIADMK, जनता दल (यूनाइटेड), और समाजवादी पार्टी के पास चार-चार सदस्य, झारखंड मुक्ति मोर्चा, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और शिवसेना के पास तीन सांसद और दो सांसद सीपीआई के पास हैं।

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